बॉलीवुड में हीरो और विलेन ऐसे किरदार होते हैं जो एक दूसरे से बिल्कुल विपरीत होते हैं। इस समय तो विलेन भी बेहद हैंडसम हुआ करते हैं। जिन्हें देखकर लगता ही नहीं है कि ये विलेन होंगे। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब फिल्मों के विलेन किरदार के साथ ही अपने लुक्स से भी खूंखार नजर आते थे। इन्हीं विलेन में से एक थे के एन सिंह। जो अपनी डरावनी आंखों के लिए पहचाने जाते थे।
हिंदी सिनेमा का एक ऐसा विलेन, जिसने अपनी आंखों से ही लोगों के जेहन में खौफ भर दिया था
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हिंदी सिनेमा के जाने माने अभिनेता कृष्ण निरंजन सिंह जिन्हें केएन सिंह के नाम से भी जाना जाता है। के एन सिंह ने ज्यादातर फिल्मों में विलेन का किरदार निभाया है। के एन सिंह का जन्म 1 सितंबर 1908 को देहरादून में हुआ था। उन्होंने अपने अभिनय की शुरुआत नायक के रूप में की थी। उनकी पहली फिल्म 'सुनहरा संसार' थी। जो 1936 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में उन्होंने एक डॉक्टर की छोटी सी भूमिका निभाई थी।
के एन सिंह ने भूमिका भले ही हमेशा विलेन की निभाई लेकिन उनकी सोच किसी हीरो से कम नहीं थी। वो अपने जमाने के बेहतरीन अभिनेता थे। लेकिन वो अगली पीढ़ी को बढ़ावा देना भी जानते थे। एक इंटरव्यू के दौरान के एन सिंह से जब पूछा गया था कि आप आज के नए कलाकारों के बारे में क्या कहना चाहेंगे? इस सवाल के जवाब में केएन ने कहा, 'जितने पुराने लोग थे हमारे समय के किसी ने ये फिकर नहीं की, कि कल क्या होगा। जो बच्चे अब आए हैं 70 के बाद वो बहुत समझदार हैं। उन्होंने अपनी आगामी दो पीढ़ियों का भी इंतजाम कर लिया है। ये बात वाकई काबिल-ए तारीफ है।'
वहीं इसी इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपने खास दोस्तों पृथ्वीराज जी, सान्याल साहब और सहगल साहब से जुड़े एक किस्से को भी याद किया था। जिसके जरिए उन्होंने बताया था कि सहगल साहब की फैन फॉलोइंग कितनी ज्यादा थी। उन्होंने बताया, 'मेरे यहां अक्सर लोग आया करते थे। एक रात काफी लोग थे मेरे रूम में। करीब दो बज रहे थे और सहगल साहब कोई गाना गुनगुना रहे थे। कमरे में सिगरेट का धुंआ बहुत ज्यादा हो गया था। जिस वजह से मैंने उठकर पर्दे खोले। जैसे ही मैंने पर्दे खोले तो देखा कि वहां बहुत लोग जमा थे केवल सहगल साहब की आवाज सुनने के लिए।'
गौरतलब है कि के एन सिंह ने अपने करियर में करीब 200 फिल्मों में काम किया है। ये एक ऐसे विलेन रहे हैं जिन्होंने अपनी आंखों से ही लोगों के जेहन में खौफ भर दिया था। वो अपनी आवाज, अपने स्टाइल और अपनी आंखों की वजह से ही मशहूर हुए थे। उन्होंने बागबान, सिकंदर, हावड़ा ब्रिज, एन इवनिंग इन पेरिस, जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया है। के एन सिंह का निधन 31 जनवरी 2000 को मुंबई में हुआ। अपने अंतिम समय में उन्होंने अपने दोस्तों को और करीबियों को खूब याद किया। लेकिन उनके अंतिम समय में उनके पास कोई भी नहीं था।
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