फिल्म 'बर्फी' से हिंदी सिनेमा में कदम रखने वाली अभिनेत्री इलियाना डिक्रूज की नई फिल्म 'पागपंती' भले बॉक्स ऑफिस पर करतब दिखाने में नाकाम रही हो, पर फिल्म में इलियाना के अभिनय की तारीफ हो रही है।
हीरोइनों के लुक्स के पीछे की ये है असली कहानी, इलियाना ने अमर उजाला से बातचीत में खोले राज
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मल्टीस्टारर फिल्मों में अपना दमखम दिखाने का कितना मौका किसी कलाकार को मिलता है, डर तो लगता होगा सितारों की फौज में खो जाने का?
यह जरूरी नहीं है कि हर कलाकार को ऐसी फिल्मों से डर ही लगे। फिल्म में आपका किरदार क्या और कैसा है और उसे आप कैसे निभाते हैं, सब उस पर निर्भर करता है। आपका किरदार शुरू से लेकर अंत तक होने के बावजूद असर छोड़ने में नाकाम हो सकता है। ऐसे रोल से बेहतर मैं 10 मिनट के उस किरदार को मानती हूं तो लोगों को सिनेमाघरों से बाहर निकलने के बाद भी याद रह जाता है। जितना किरदार है उसी में सर्वोत्तम देने की कोशिश करनी चाहिए। स्क्रीन टाइम या दूसरे बड़े कलाकारों की मौजूदगी मेरे लिए मायने नहीं रखती है।
सोशल मीडिया को आप सितारों के लिए कितना जरूरी मानती हैं?
सोशल मीडिया पर आप नए रिश्ते गढ़ सकते हैं। पहले हम अपने हर एक चाहने वाले से नहीं मिल पाते थे। सोशल मीडिया ने यह सहूलियत दी है। मैं अपने फैंस के साथ अपनी वह जिंदगी भी साझा करना चाहती हूं जहां मैं स्टार नहीं हूं। लोगों को भी यह समझ आना चाहिए कि हम लोग भी साधारण लोग हैं, हम जिस लुक में दिखते हैं उसमें आने के लिए हमें दो घंटा लगते हैं। मैं बहुत ही साधारण लड़की हूं और मैं चाहती हूं कि लोग मेरे इस रूप के बारे में भी जानें।
आप भावुक फिल्में कर चुकी हैं, प्रेम कहानियां कर चुकी हैं, कॉमेडी का कोटा भी पूरा ही हो गया, अब किस तरह की फिल्में करना चाहती हैं?
मुझे कम से कम एक महिला प्रधान फिल्म तो जरूर करनी है। इसके साथ ही मैं ऐतिहासिक फिल्में और बायोपिक भी करना चाहती हूं। मुझे ऐसी फिल्मों की तलाश रहती है जिनमें महिला किरदार को कायदे से लिखा गया होगा।
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