विधु विनोद चोपड़ा ने सिनेमा में अपने 30 साल पूरे होने पर कुछ साल पहले एक किताब प्रकाशित की, “30 ईयर्स ऑफ स्ट्राइविंग इन सिनेमा” (सिनेमा में प्रयासों के 30 साल)। इस किताब में विधु के पसंदीदा लेखक रहे अभिजात जोशी फिल्म परिंदा का जिक्र आने पर लिखते हैं कि कैसे विधु ने नाना पाटेकर को एक मराठी नाटक में देखने के बाद इस फिल्म में अन्ना के किरदार के लिए चुना। लेकिन, फिल्म के संवाद लेखक इम्तियाज हुसैन के मुताबिक इस किरदार की परदे के पीछे की कहानी कुछ और ही है।
परिंदा की कैसेट पर नाम न देख इस लेखक ने छोड़ा था विधु का साथ, पढ़ें अन्ना के क्रिएशन की कहानी
अमर उजाला से एक्सक्लूसिव बातचीत में इम्तियाज कहते हैं, “हिंदी सिनेमा में अभिनेता हों या निर्देशक, लेखकों के नामों का जिक्र बहुत कम करते हैं। मुझे अन्ना के किरदार की लाइनें तक अब तक याद हैं। ‘ना भाई ना बहन ना बेटा, धंधे के मामले में कोई किसी का भाई नहीं, कोई किसा का बेटा नहीं। करन को चुप रहना होगा या जाना होगा। उसको अपनी बोट पे ले जा, समझा, नहीं समझे तो गोली मार दे।’, ये अन्ना के किरदार का असली खाका है। ये संवाद मुझे 30 साल बाद अब भी याद है तो इसलिए क्योंकि मैंने अन्ना को गढ़ा है, क्रिएट किया है।”
इम्तियाज के मुताबिक इस किरदार का नाम पहले फिल्म में पाट्या था। जो उस समय के एक बड़े डॉन युसूफ पटेल के नाम पर रखा गया। इम्तियाज हुसैन को इस फिल्म में संवाद लेखन के लिए विधु विनोद चोपड़ा के कास्टिंग डायरेक्टर जनक टोपरानी ने उनके एक नाटक के बाद संपर्क किया था। दरअसल विधु ये नाटक देखने के बाद इम्तियाज के बच्चों को फिल्म में करन और किशन के बचपन के रोल देना चाहते थे लेकिन दोनों बच्चों ने थिएटर को तरजीह दी और फिल्म करने से मना कर दी। इस घटना के नौ-दस महीने बाद जनक के बुलावे पर इम्तियाज इस फिल्म का हिस्सा बतौर संवाद लेखक बने।
इम्तियाज बताते हैं, “जब मैं इस फिल्म का हिस्सा बना तो मुझे फिल्म की पटकथा का 16वां ड्राफ्ट मिला था। फिल्म में विलेन का नाम था पाट्या और इसे परेश रावल करने वाले थे। ये रोल नाना के पास कैसे गया इसका भी दिलचस्प किस्सा है। दो भाइयों की इस कहानी में बड़े भाई किशन का रोल सबसे पहले नसीरुद्दीन शाह को करना था। उनको मैंने विधु के घर पर कहानी सुनाई। विधु नहाने जा रहे थे औऱ मुझे बोलकर गए कि इनको पूरी कहानी मत सुनाना बस इंटरवल तक ही सुनाना, लेकिन एक लेखक के तौर पर मैंने ईमानदारी दिखाते हुए नसीर को पूरी कहानी सुना दी। तो नसीर बोले जब छोटे भाई का मर्डर हो जाएगा तो उसके बाद हॉल में कौन रुकेगा। और, ये कहकर उन्होंने फिल्म छोड़ दी।”
नसीर के बाद परिंदा में किशन का ये रोल अमिताभ बच्चन को भी सुनाया गया और फिर नाना पाटेकर ये किरदार करने को तैयार हो गए। इम्तियाज बताते हैं, “अनिल कपूर को तब लगा कि अगर नाना पाटेकर ये रोल करते हैं तो उनका रोल कमजोर हो जाएगा। अनिल के कहने पर हम जैकी श्रॉफ से मिले और जैकी ने कहानी सुनते ही बोल दिया, ‘”ठीक है बिड़ू, मैं करेगा ये फिल्म।’ फिल्म में जैकी श्रॉफ का एक सीन है जिसमें वह फूटफूट कर रोते हैं। इस सीन में किशन अपने गांव में बसने के सपने करन को समझा रहा है। ये जैकी श्रॉफ के करियर का सबसे लंबा अनकट सीन है, जिसे करने के लिए मैंने जैकी को कई कई दिन रात जागकर रिहर्सल कराई थी।”
