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Pran: 'राम ने हर युग में जन्म लिया लेकिन लक्ष्मण फिर पैदा नहीं हुआ', प्राण के इन 10 किरदारों में छिपी अदाकारी की दास्तां

अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: मेघा चौधरी Updated Tue, 12 Jul 2022 10:42 PM IST
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Interesting and unknown facts of Pran Sikand the most famous villain of Hindi cinema 10 best roles dialogues
प्राण सिकंद - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

प्राण, प्राण सिकंद, बस नाम ही काफी है। ऐसा नाम, जो एक बार बड़े पर्दे पर हिट हुआ तो दशकों तक माएं अपने बच्चों का नाम प्राण रखने से कतराती रहीं। गुलशन ग्रोवर जैसे एकलव्य उन्हें अपना द्रोणाचार्य मानते हैं। किरदारों को लेकर मेहनत इतनी कि कभी एक फिल्म में अपनाया गेटअप दूसरी फिल्म में रिपीट नहीं किया। छह दशक लंबे करियर में साढ़े तीन सौ से ज्यादा फिल्में। और, इनमें से यादगार इतनी कि गिनाने बैठों तो सांस फूल जाए। 'मधुमति', 'जिस देश में गंगा बहती है', 'उपकार', 'शहीद', 'पूरब और पश्चिम', 'राम और श्याम', 'जंजीर', 'डॉन', 'अमर अकबर एंथनी' जैसी सुपरहिट फिल्मों में प्राण ने शानदार काम किया। प्राण अपने अभिनय के साथ डायलॉगबाजी में बहुत मशहूर रहे। 12 जुलाई 2013 को ये दुनिया छोड़ गए भारत सरकार से मिलने वाले सिनेमा के सबसे बड़े पुरस्कार दादा साहब फाल्के पुरस्कार के विजेता प्राण के 10 बेहतरीन किरदारों पर आइए डालते हैं एक नजर...

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जिस देश में गंगा बहती है - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

किरदार : राका
फिल्म : जिस देश में गंगा बहती है (1960)

प्राण ने शुरुआत से ही अपने अभिनय से लोगों पर प्रभाव जमाना शुरू किया था। उन्होंने अपनी शुरुआत एक पंजाबी फिल्म 'यमला जट' से की और हिंदी में उनकी पहली फिल्म वर्ष 1942 में रिलीज हुई 'खानदान'। जब 1960 में रिलीज हुई फिल्म 'जिस देश में गंगा बहती है' में प्राण को राज कपूर के साथ देखा गया तो उनके काम की बहुत तारीफ हुई। प्राण ने इस फिल्म में डाकू राका का किरदार निभाया जो अपने ही सरदार को मार कर उसकी बेटी से शादी करना चाहता है। इस फिल्म में प्राण के संवाद काफी मशहूर रहे। उनमें से एक संवाद तब आया जब राका का सरदार अपनी बेटी की शादी राज कपूर के किरदार राजू से करना चाहता है। इस पर राका का डायलॉग होता है, 'एक डाकू की लड़की पुलिस वाले से शादी करेगी, गोली मारिए सरदार'।

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कश्मीर की कली - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

किरदार : मोहन
फिल्म : कश्मीर की कली (1964)
शक्ति सामंत के निर्देशन में बनी वर्ष 1964 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'कश्मीर की कली' में प्राण नजर आए शम्मी कपूर, शर्मिला टैगोर और नजीर हुसैन के साथ। यहां भी प्राण एक विलेन रहे। वह शम्मी कपूर के किरदार राजीव और शर्मिला टैगोर के किरदार चंपा के प्रेम के बीच रोड़ा बनते हैं। उनके किरदार का नाम मोहन है जो एक फॉरेस्ट मैनेजर है। वह चंपा के पिता दीनू को कर्जा देता है और वापस न करने की हालत में चंपा से शादी करने की शर्त रखता है। चंपा कश्मीर में फूल बेचने का काम करती है। यहां भी प्राण का एक संवाद काफी मशहूर रहा। वह कहते हैं, 'ये फूलों के साथ-साथ दिल कब से बेचना शुरू कर दिया है'। 

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उपकार - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

किरदार : मलंग चाचा
फिल्म : उपकार (1967)
वर्ष 1967 में बॉक्स ऑफिस पर सबसे ज्यादा पैसे कमाने वाली फिल्म 'उपकार' में प्राण ने एक रिटायर फौजी मलंग चाचा का किरदार निभाया। इस फिल्म में मनोज कुमार, आशा पारेख और प्रेम चोपड़ा मुख्य भूमिकाओं में हैं। मनोज कुमार को तो इस फिल्म से देशभक्त का दर्जा मिलना शुरू हो गया और प्राण को इस फिल्म के लिए अपना पहला फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। प्राण को यह पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता की श्रेणी में मिला। इस फिल्म में प्राण ने भरपूर डायलॉगबाजी की। उनमें से कुछ संवाद हैं, 'यह पाप की नगरी है, यहां कंस और दुर्योधन का ठिकाना है', 'राम ने हर युग में जन्म लिया लेकिन लक्ष्मण फिर पैदा नहीं हुआ', 'जिंदगी में चढ़ते की पूजा मत करना, डूबते की भी सोचना'। 

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आन बान - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

किरदार : राजा बहादुर
फिल्म : आन बान (1972)

'शेर और बकरी जिस घाट पर एक साथ पानी पीते हों, वह घाट न हमने देखा है और न देखना चाहते हैं।' प्राण ने यह संवाद बोला प्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी वर्ष 1972 की फिल्म 'आन बान' में। इस फिल्म में राजेंद्र कुमार, प्राण, राखी गुलजार और कुमकुम जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं। शीर्षक से ही पता चलता है कि यह फिल्म कुछ आन बान और शान जैसी चीजों को ही दर्शाती होगी। प्राण ने फिल्म में राजा बहादुर का किरदार निभाया है जो जानता है कि उसकी राजशाही के दिन बहुत कम हैं। फिर भी वह शराब में डूबा रहता है, औरतों में खेलता है और ठाट बाट से रहता है।

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