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Javed Akhtar: न सिर पर छत थी और न ही भूख मिटाने को खाना...मुंबई आकर दर-दर भटकने को मजबूर हुए थे जावेद अख्तर

Tue, 17 Jan 2023 07:16 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Tue, 17 Jan 2023 07:16 AM IST
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Javed Akhtar Birthday: Unknown Facts About Famous Poet Lyricist Screenwriter Life Struggle Details in Hindi
जावेद अख्तर - फोटो : अमर उजाला

मशहूर कवि, गीतकार और स्क्रीनराइटर जावेद अख्तर साहब आज 78 वर्ष के हो गए हैं। सिनेमा, कला और साहित्य की दुनिया में जावेद अख्तर साहब का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। इसके पीछे वजह है उनकी प्रतिभा, ज्ञान और उनका नाम। वह नाम जो उन्होंने संघर्ष के कड़े दौर से गुजर कर बनाया है। बता दें कि जावेद साहब का जन्म 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में मशहूर शायर रहे जांनिसार अख्तर के घर हुआ। इतनी बड़ी शख्सियत के बेटे होने के बाद भी जावेद अख्तर को इंडस्ट्री में पैर जमाने के लिए खूब संघर्ष करना पड़ा। कई बार तो ऐसा हुआ कि उन्हें पेड़ के नीचे सोकर अपनी रातें गुजारनी पड़ीं। आइए जानते हैं जावेद अख्तर की जिंदगी के बारे में...

Javed Akhtar Birthday: Unknown Facts About Famous Poet Lyricist Screenwriter Life Struggle Details in Hindi
जावेद अख्तर - फोटो : सोशल मीडिया

'कल हो ना हो', 'वेक अप सिड', 'वीर-जारा' और 'लगान' जैसी फिल्मों के गाने लिखने वाले गीतकार और शायर जावेद अख्तर सिनेमाई दुनिया की एक हस्ती हैं। आज की तारीख में जावेद अख्तर की खुद की शख्सियत काफी बड़ी है, मगर वह जिस खानदान से ताल्लुक रखते हैं उसका भी अपना एक इतिहास है। वह जांनिसार अख्तर और मशहूर लेखिका सफिया अख्तर के बेटे हैं। प्रसिद्ध रससिद्ध शायर मुज्तर खैराबादी जावेद के दादा थे और मुज्तर के पिता सैयद अहमद हुसैन एक कवि थे, मुज्तर की मां हिरमां उन्नीसवीं सदी की चंद कवियत्रियों में से एक रहीं और उनके पिता फजले-एहक खैराबादी अरबी के शायर थे।
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जावेद अख्तर - फोटो : social media

जावेद अख्तर ने भी अपने परिवार की लेखन परंपरा को कायम रखा। वह ग्वालियर, लखनऊ, अलीगढ़ और भोपाल के बीच अपना सफर कायम करते रहे। इसके बाद मायानगरी में आकर तमाम संघर्ष से गुजरने के बाद एक सफल गीतकार और पटकथा लेखक के तौर पर खुद को स्थापित किया। इतने बड़े और नामी परिवार से होने के बाद भी उनकी डगर कठिन रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक जावेद अख्तर को मुंबई आने के छह दिन बाद ही अपने पिता का घर छोड़ना पड़ा था और दो साल तक किसी ठिकाने के लिए परेशान होते रहे। इस बीच उन्होंने सौ रुपए महीने पर डॉयलॉग लिखे और कुछ अन्य छोटे-मोटे काम किए। ऐसी भी नौबत आई कि उन्होंने चने खाकर पेट भरा और पैदल सफर किया।
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जावेद अख्तर, सलीम खान - फोटो : सोशल मीडिया

बता दें कि जावेद अख्तर साल 1964 में मुंबई आ गए। यहां लंबे वक्त तक वह बेघरों की तरह रहे। रिपोर्ट्स के मुताबिक जावेद अख्तर ने कई रातें पेड़ के नीचे बिताईं। बाद में उन्हें जोगेश्वरी में कमाल अमरोही के स्टूडियो में रहने के लिए जगह मिली। जावेद अख्तर को 1969 में पहला कामयाब ब्रेक मिला और उसके बाद उनके दिन बंबई में बदल गए। बता दें कि जावेद अख्तर का असली नाम जादू था। उनके पिता जांनिसार अख्तर की नज्म 'लम्हा किसी जादू का फसाना होगा' से उनका ये नाम रखा गया था। जावेद साहब के करियर की बात करें तो सलीम खान के साथ इनकी जुगलबंदी खूब रही। सलीम-जावेद की जोड़ी ने करीब 24 फिल्मों के डायलॉग लिखे हैं। मगर, कुछ वैचारिक मतभेदों के बाद दोनों की जोड़ी अलग हो गई। इसके बाद जावेद साहब ने गीतकार के रूप में करियर को आगे बढ़ाया।
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