रोचक तथ्य: 4 बार पार्टी बदल चुकी हैं जया प्रदा, अब भाजपाई बन आजम खान को देंगी चुनौती
एक वक्त वो भी था जब आजम खान उनके लिए रामपुर की जनता से वोट मांगा करते थे, लेकिन अब वो उन्हें वोट ना देने की अपील करते हुए नजर आएंगे। जया प्रदा के राजनीतिक सफर का जब भी जिक्र होगा तो उसके साथ अमर सिंह का नाम जुड़ा होगा। अमर सिंह जब भी जिस राजनीतिक पार्टी में रहे जया प्रदा भी उनके साथ रहीं। बीजेपी से पहले जया प्रदा समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल और तेलगू देशम पार्टी का हिस्सा रही थीं।
तेलुगू सिनेमा में जया प्रदा ने अपने करियर की शुरुआत 1975-76 के आसपास की। साल 1979 में के. विश्वनाथ के निर्देशन में बनी फिल्म सरगम से उन्होंने बॉलीवुड में एंट्री ली। ये फिल्म काफी हिट रही लेकिन इसने उनके करियर को कोई फायदा नहीं दिया। उनके बॉलीवुड करियर के लिए सबसे बड़ा साल रहा 1984। इस साल जितेंद्र और श्रीदेवी के साथ उनकी फ़िल्म 'तोहफा' आई। इस फिल्म में उनकी को-स्टार रहीं श्रीदेवी आगे चल कर उनकी बड़ी प्रतिद्वंदी बनीं। वरिष्ठ पत्रकार यासिर उस्मान बताते हैं कि देश के महान फिल्म निर्माताओं में से एक सत्यजीत रे ने जया प्रदा को "बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत अभिनेत्री" बताया था।
वो बड़े स्टार्स के साथ काम करती थीं। उन्होंने अमिताभ बच्चन, जितेंद्र जैसे उस वक्त के स्टार्स के साथ काम किया लेकिन साल 1988 से उनके फिल्मी करियर का ढलान शुरू हुआ। 1990 में आज का अर्जुन फिल्म उनके करियर की आखिरी मुख्य भूमिका वाली फिल्म रही"
शायद अपने फिल्मी करियर की परिस्थिति भांपते हुए ही जया प्रदा ने राजनीति में संभावनाएं तलाशनी शुरू की। 1994 में वो एनटी रामा राव (एनटीआर) के बुलावे पर आंध्र प्रदेश की तेलुगू देशम पार्टी में शामिल हुईं। एनटीआर और जया प्रदा ने कई तेलुगू फिल्मों में एक साथ काम किया था और यही वजह रही कि उन्होंने ये प्रस्ताव स्वीकार भी किया लेकिन राजनीतिक महत्वकांक्षाओं ने जया प्रदा को दक्षिण की राजनीति से उत्तर भारत की राजनीति का रास्ता दिखाया। आंध्र प्रदेश के पत्रकार कृष्णा राव कहते हैं, ''1996 में टीडीपी ने जया प्रदा को राज्यसभा सांसद बनाया लेकिन जब उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए नामित नहीं किया गया तो वो नाराज हो गईं। टीडीपी में रहते हुए रेणुका चौधरी और जया प्रदा के बीच मुकाबला रहा। जया प्रदा की हमेशा शिकायत रही कि रेणुका चौधरी को पार्टी ज्यादा तरजीह देती है।''