बंगाली संगीतकार, संगीत निर्देशक और अभिनेता के. सी. डे यानी कृष्ण चंद्र डे की आज पुण्यतिथि है। के. सी. डे को संगीत के क्षेत्र में उनके बेहतरीन योगदान के लिए आज भी याद किया जाता है। वे सचिन देव बर्मन के पहले संगीत गुरु थे। वे कीर्तनों में अपने भजन से समां बांध देते थे। के. सी. डे को कलकत्ता के कई रईस परिवारों से गाने के लिए आमंत्रित किया जाता था और उन्हें इसके लिए अच्छे खासे पैसे भी मिलते थे। संगीत के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने के साथ ही उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में भी अपना लोहा मनवाया। हालांकि, उनके साथ बचपन में ही एक घटना घटी, लेकिन वह उनके जज्बे को नहीं तोड़ सकी। आइए आज के. सी. डे की पुण्यतिथि पर उनके जीवन से जुड़े कुछ अहम पहलुओं पर गौर फरमा लेते हैं-
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के. सी. डे
- फोटो : सोशल मीडिया
कलकत्ता में जन्में के. सी. डे का सिनेमा में योगदान
कलकत्ता में जन्में के. सी. डे ने 1932 से 1946 तक फिल्मों के लिए संगीत दिया और कई गानों को अपनी रूहानी आवाज से भी सजाया। उसी दौरान उन्होंने फिल्मों में भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया। इतना ही नहीं के. सी. डे ने अपने करियर में कई थिएटरओं के लिए काम किया और आखिर में वह कलकत्ता के न्यू थिएटरर्स जुड़े थे।
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संगीत और गाने के लिए किया अभिनय का त्याग
करियर को ध्यान में रखते हुए के. सी. डे ने साल 1942 में मुंबई का रुख किया। हालांकि, जब साल 1946 में अभिनय से उनके संगीत और गायन पर असर पड़ने लगा तो उन्होंने इसका त्याग कर दिया। के.सी. डे ने अपने करियर में बंगाली, हिंदी, उर्दू, गुजराती और 8 नातें यानी मुसलमान भक्ति गीत मिलाकर कुल 600 गाने रिकॉर्ड किए।
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मन्ना डे के भतीजे थे के. सी. डे
के. सी. डे, मन्ना डे के भतीजे थे। वहीं, 1906 में उनके साथ एक दुखद घटना घटी। संगीतकार ने महज 13 साल की उम्र में अपनी आंखों रोशनी खो दी और पूरी तरह से दृष्टिहीन हो गए थे। हालांकि, यह घटना उनके जज्बे को नहीं हरा सकी। के.सी.डे ने काम करना जारी रखा और दुनिया के लिए एक मिसाल साबित हुए।
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के. सी. डे का यादगार काम
के.सी. डे ने पुराबी (1948), शकुंतला (1941), मिलाप (1937), अंबिकापथी (1937) (पार्श्व संगीत), बाघी सिपाही (1936), सोनार संसार (1936), सुनहरा संसार (1936), चंद्रगुप्त (1934) और शहर का जादू (1934) जैसी फिल्मों के लिए संगीत तैयार किए थे। इसके अलावा उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण चैतन्य (1954) (पार्श्व गायक), तमन्ना (1942), सपूरे (1939), धरती माता (1938), विद्यापति (1937), भाग्य चक्र (1935), देवदास (1935) और चण्डीदास (1932) जैसी फिल्मों में गाने गाए। वहीं, बतौर अभिनेता के.सी. डे ने भगवान श्रीकृष्ण चैतन्य (1954), प्रहलाद (1952), अनिर्बान (1948), दृष्टिदान (1948), पुराबी (1948), इंसान (1944), तमन्ना (1942), चाणक्य (1939) और सपेरे (1939) समेत कई फिल्मों में अपने कौशल का लोहा मनवाया। हालांकि, 27 नवंबर, 1962 को उन्होंने आखिरी सांस लेकर दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।