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मसाला फिल्मों के दौर में महिलाओं की आवाज बनीं कल्पना लाजमी, सबूत हैं ये फिल्में
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-मुंबइया-मसाला फिल्मों के दौर में नायिका प्रधान फिल्मों से पहचानी जाने वालीं निर्देशक कल्पना लाजमी का रविवार की सुबह देहांत हो गया। वह 64 वर्ष की थीं। कल्पना लंबे समय से बीमार चल रही थीं। फिल्मों से प्यार करने वाले उन्हें एक पल (1986), रुदाली (1993), दरमियान (1997) और दमन (2001) जैसी फिल्मों के लिए याद करते हैं। उनकी अंतिम फिल्म थी, चिंगारी (2006)।
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कल्पना लाजमी
- फोटो : SELF
करीब चार साल पहले कल्पना की किडनियों में कैंसर का पता चला था। किडनियां निकालने के बाद वे लगातार डायलीसिस पर थीं और हर चौथे दिन उन्हें अस्पताल जाना पड़ता था। मुंबई के कोकिला बेन अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। इसी अस्पताल में रविवार सुबह 4.30 के करीब उन्होंने अंतिम सांस लीं। उनका अंतिम संस्कार ओशिवरा (अंधेरी, वेस्ट) के शवदाह गृह में किया गया। इस मौके पर बॉलीवुड की तमाम शख्सीयतें मौजूद थीं।
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rudali
कल्पना हिंदी सिनेमा के बेहतरीन निर्देशकों-अभिनेताओं में शुमार गुरुदत्त की भांजी थीं। वह अविवाहित थीं और उन्होंने जीवन के 40 वर्ष असमिया गायक, गीतकार, फिल्मकार भूपेन हजारिका के साथ बिताया। पिछले दिनों ही भूपेन हजारिका पर कल्पना लाजमी की किताब ‘भूपेन हजारिका: एज आई न्यू हिम’ जारी हुई थी। 1954 में जन्मी कल्पना को शुरू से कलात्मक जीवन मिला। उनकी मां ललिता लाजमी भी प्रतिष्ठित चत्रकार थीं। श्याम बेनेगल जैसे निर्देशक उनके रिश्तेदार थे।
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कल्पना लाजमी
- फोटो : इंडियन एक्सप्रेस
कल्पना ने श्याम बेनेगल की भूमिका और मंडी जैसी फिल्मों में सहायक निर्देशक के रूप में करिअर शुरू किया। इन्हीं फिल्मों का प्रभाव था कि कल्पना ने मसाला फिल्मों के दौर में हाशिये पर समझी जाने वाली नायिका प्रधान कहानियों को अपने फिल्मों में उतारा। फिल्म रुदाली के लिए उन्हें सबसे ज्यादा प्रशंसा मिली, जो राजस्थान की ऐसी जनजातीय महिलाओं की कहानी थी, जो शोक के मौके पर पैसे लेकर राजे-रजवाड़ों में रोने का काम करती थीं। इस फिल्म में डिंपल कपाड़िया को उनके अभिनय के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। कल्पना ने टीवी पर चर्चित सीरियल लोहित किनारे का भी निर्माण किया था।
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कल्पना लाजमी
बीमारी के अंतिम दिनों में कल्पना को इंडस्ट्री के लोगों का भरपूर साथ मिला। उन्होंनें बताया था कि हर महीने उनके स्वास्थ्य पर ढाई लाख रुपये का खर्च आता था। इसके लिए उन्हें आमिर खान, सलमान खान, करन जौहर, रोहित शेट्टी, महेश भट्ट, आलिया भट्ट, सोनी राजदान, नीना गुप्ता से लेकर श्याम बनेगल समेत कई लोगों की मदद मिलती रही। मां ललिता और भाई देव लाजमी आखिरी दिनों में उनकी देखभाल कर रहे थे।
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