दबंग अभिनेत्री कंगना रणौत की फिल्म 'तेजस' की रिलीज का काउंटडाउन शुरू हो गया है। इस फिल्म के निर्देशक हैं सर्वेश मेवाड़ा जिनकी बड़े परदे पर बोहनी अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन की प्रस्तावित फिल्म 'गुलाब जामुन' से होनी थी। व्हिसलिंग वूड्स इंस्टीट्यूट से साल 2008 में पढ़ाई कर निकले सर्वेश को बतौर निर्देशक अब जाकर पहला मौका मिला है। इंजीनियरिंग करके फिल्ममेकिंग में आए सर्वेश की डेब्यू फिल्म 'तेजस' 27 अक्तूबर को रिलीज होने जा रही है। इस फिल्म के बारे में सर्वेश मेवाड़ा से एक खास बातचीत।
Sarvesh Mewara Interview: कंगना ने हैदराबाद में सुनी ‘तेजस’ की कहानी, ‘गुलाब जामुन’ का फैसला रॉनी करेंगे
फिल्म 'तेजस' को विचार क्या है और इसका ख्याल सबसे पहले किसे आया ?
फिल्म के निर्माता रॉनी स्क्रूवाला ने ही सुझाव दिया कि मेरे करियर की शुरुआत के लिए 'तेजस' का विषय अच्छा रहेगा। इस फिल्म की कहानी का आइडिया भी उन्हीं का है। मैं मिलिट्री स्कूल में पढ़ा हूं। मेरे पिता श्याम मेवाड़ा आईएएस अधिकारी थे, उनका ट्रांसफर होता रहता है। मेरे स्कूल और कॉलेज भी बदलते रहते थे। ‘तेजस’ मुझे बचपन की यादों में ले गया। फिल्म का यूनिक सेलिंग प्वाइंट (यूएसपी) यही है कि ये एक महिला पायलट की कहानी है।
और विषय को करीब से जानने क लिए किन-किन लोगों से मदद मिली?
मैंने भारतीय वायु सेना के बहुत सारे अधिकारियों से इसके बारे में बातें और मुलाकातें की हैं। बेंगलुरु में जहां तेजस को डिजाइन किया गया, वहां जाकर देखा और समझा कि मिसाइल कैसे छोड़ते हैं? विंग कमांडर गोखले ने शोध के दौरान मेरी बहुत मदद की है। इस दौरान वह मेरे विश्वसनीय सलाहकार और दोस्त बन गए।
जब आपने कंगना को स्क्रिप्ट सुनाई तो उनकी क्या प्रतिक्रिया थी?
उस समय वह 'थलाइवी' की शूटिंग कर रही थी। हम लोग उनसे मिलने हैदराबाद गए। कंगना के भाई अक्षत भी उनके साथ ही थे। वह खुद भई कमर्शियल पायलट का कोर्स कर चुके हैं। कंगना से मिलकर हम लिफ्ट से नीचे उतर ही रहे थे कि तब तक रॉनी स्क्रूवाला का फोन आ गया। रॉनी ने ही बताया कि कंगना को कहानी बहुत अच्छी लगी है और वह फिल्म कर रही हैं।
कंगना रणौत ने इस फिल्म को लेकर किस तरह की तैयारी की?
इस फिल्म के कुछ सीन को लेकर कंगना के मन में कुछ सवाल थे जिसे समझने के लिए वह मनाली गई और वहां वायुसेना की टीम से मिलकर जाना कि किस तरह से वह लोग अपने आप को तैयार करते हैं। उनके हाव-भाव और दैहिक भाषा के बारे में सीखा। युद्ध से पहले वे सब भावनात्मक तौर पर कैसे सोचते हैं? जब एयरक्रॉफ्ट में बैठते हैं तो कैसी फीलिंग आती है, जैसी तमाम बातों को कंगना ने बहुत ही गहराई के साथ समझा। विंग कमांडर गोखले से भी कंगना कई बार मिलीं।
