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कथक करना शुरू किया तो 'वेश्या' कहकर बुलाते थे लोग, डांसर के परिवार को झेलना पड़ा था बहिष्कार

Wed, 08 Nov 2017 01:02 PM IST
amarujala.com- Written by :भावना शर्मा
amarujala.com- Written by :भावना शर्मा Updated Wed, 08 Nov 2017 01:02 PM IST
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sitara devi kathak dancer birthday special story
सितारा देवी

देश की मशहूर कथक डांसर सितारा देवी की आज 97वीं बर्थ एनिवर्सरी है। काशी के कबीरचौरा की गलियों में पली ‘धन्नो’ मुंबई की फिल्मी दुनिया में ‘सितारा’ बनकर छा गईं थीं। धनतेरस के दिन पैदा होने की वजह से माता-पिता ने उनका नाम धनलक्ष्मी रखा और प्यार से उन्हें धन्नो कहते थे। उन्हें दुनिया सितारा देवी के नाम से जानती है। उनके कथक की कोई सानी नहीं थी। बनारस घराने से कथक की महारत हासिल कर उन्होंने इस डांस स्टाइल को विश्व पटल तक पहुंचाया।

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सितारा देवी

सितारा देवी के शिष्य विशाल कृष्ण ने बताया कि 16 साल की उम्र में कोलकाता के शांति निकेतन में एक संगीत प्रस्तुति के दौरान उनके नृत्य से प्रभावित होकर गुरु रवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें ‘कथक क्वीन’ की उपाधि दी थी। कथक नृत्य में उनकी मयूर की गत, थाली की गत, जटायु मोक्ष, गत निकास की प्रस्तुति बेमिसाल थी। सितारा देवी का निधन 25 नवंबर 2014 में लंबी बीमारी के बाद हो गया था। 

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सितारा देवी
उन्होंने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान लगातार 11:30 घंटे तक डांस करने का रिकॉर्ड भी बनाया था। सितारा देवी का जन्म 1920 में कोलकाता के नाथुन बाजार में हुआ था। 5 साल की उम्र में वह पैतृक आवास बनारस के कबीरचौरा आ गई थीं। सिने तारिका के रूप में भी सितारा देवी ने बालीवुड में अपनी खास जगह बनाई थी। 1935 में फिल्म ‘वसंत सेना’ से अपने करियर की शुरुआत करने वाली इस नृत्यांगना ने दर्जन भर से अधिक फिल्मों में अपने अभिनय से सिने दर्शकों के बीच लोकप्रियता अर्जित की।

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सितारा देवी

साल 1933 में बॉलीवुड से काशी आए फिल्म निर्माता निरंजन शर्मा को एक ऐसी अदाकारा की तलाश थी जिसमें नृत्य के साथ  सुरीले गायन की भी प्रतिभा हो। कबीर चौरा में उनकी नजर उन दिनों कथक नर्तक पं. सुखदेव महाराज की सबसे छोटी बेटी धन्नो के हुनर पर पड़ी। बेटी का भविष्य संवारने के लिए चिंतित पिता सुखदेव ने धन्नो को फिल्म में काम करने के लिए मुंबई भेजने के आग्रह को स्वीकार करने में तनिक भी देरी नहीं लगाई। 

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सितारा देवी

बुजुर्गों को अब भी याद है, जब महज 13 साल की उम्र में धन्नो को फिल्म की शूटिंग के लिए मुंबई रवाना करने मोहल्ले के बच्चे-महिलाएं तक स्टेशन गए थे। सितारा देवी ने निरंजन की पहली फिल्म ‘वसंत सेना’ में नृत्यांगना के तौर पर अभिनय की शुरुआत की। इसके बाद फिल्मों में कोरियोग्राफी के जरिये भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। वहीं कथक नृत्य को दुनिया में विशिष्ट पहचान भी दिलाई।

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