‘खिलौना’ फिल्म याद है आपको? जी हां, वही जिसमें संजीव कुमार पर फिल्माया गया है सुपरहिट गाना, ‘खिलौना जानकर तुम तो मेरा दिल तोड़े जाते हो...!’ निर्माता एल वी प्रसाद ने ये फिल्म बनाई उस समय के नंबर वन लोकप्रिय उपन्यासों के लेखक गुलशन नंदा के उपन्यास ‘पत्थर के होंठ’ की कहानी पर। दिलचस्प बात यहां ये है कि इस उपन्यास को पढ़ने के बाद ही अभिनेता, निर्देशक और निर्माता गुरु दत्त ने गुलशन नंदा को मुंबई आमंत्रित किया था लेकिन ये बात उन्होंने गुलशन नंदा को मुंबई आने के बाद ही बताई कि वह उनके उपन्यास ‘पत्थर के होंठ’ पर फिल्म बनाना चाहते हैं। गुलशन नंदा से ये बात फोन पर हो जाती तो वह बता भी देते कि इस उपन्यास पर फिल्म बनाने के अधिकार तो वह निर्माता एल वी प्रसाद को बेच चुके हैं। गुरुदत्त ने उस समय इस उपन्यास के अधिकार के लिए 50 हजार रुपये की मोटी रकम नंदा को ऑफर की थी। फिल्म ‘खिलौना’ बनी और सुपर हिट रही। गुरुदत्त मुंबई आए तो फिर यहीं एक कमरा किराए पर लेकर रहने लगे और मुंबई में रहकर जो उपन्यास उन्होंने लिखा, उस उपन्यास के नाम ‘कटी पतंग’ पर ही बनी फिल्म हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म है। इस फिल्म की रिलीज के आज 50 साल पूरे हो रहे हैं।
Bioscope S2: ‘कटी पतंग’ की रिलीज को पूरे हुए 50 साल, इस तरह आशा पारेख को याद आए राजेश खन्ना
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गुलशन नंदा की कलम का जादू
फिल्म ‘कटी पतंग’ दरअसल गुलशन नंदा के उपन्यास पर बनी छठी फिल्म है। इससे पहले उनके उपन्यासों पर बनी फिल्में रहीं, ‘फूलों की सेज’, ‘काजल’, ‘सावन की घटा’, ‘पत्थर के सनम’ और ‘नील कमल’। अपने समय की इन चर्चित फिल्मों में से एक फिल्म ऐसी भी रही जिसने बॉक्स ऑफिस पर कमाल तो नहीं किया लेकिन एक आम जनता में लोकप्रिय उपन्यास लेखक और एक ऐसे निर्देशक की दोस्ती करा दी, जिसने हिंदी सिनेमा को दिया था पहला पोस्टर ब्वॉय हीरो शम्मी कपूर। ये फिल्म थी ‘सावन की घटा’ और इसके निर्देशक शक्ति सामंत जब राजेश खन्ना के साथ अपन पहली फिल्म ‘आराधना’ बना रहे थे तो वहीं बैठकर एक दिन गुलशन नंदा, पटकथा लेखक सचिन भौमिक ने ‘कटी पतंग’ का ताना बाना बुन डाला। गुलशन नंदा की लिखी फिल्में ‘कटी पतंग’ और ‘खिलौना’ दोनों 1970 में रिलीज हुईं और दोनों सुपरहिट रहीं। इसके बाद गुलशन नंदा का नाम एक दर्जन से ज्यादा और फिल्मों से भी जुड़ा रहा, इनमें यश चोपड़ा की बतौर निर्माता पहली फिल्म ‘दाग’ भी शामिल है। गुलशन नंदा की ये कहानी यश चोपड़ा तक राजेश खन्ना ने ही पहुंचाई थी और यश चोपड़ा ने अपनी कंपनी का नाम यश राज फिल्म्स अपनी और राजेश खन्ना की दोस्ती पर ही रखा था।
कहानी विधवा विवाह की
खैर, आगे बढ़ते हैं और बताते हैं आपको कि आखिर फिल्म ‘कटी पतंग’ में ऐसा खास क्या रहा जो ये हिंदी सिनेमा की एक कल्ट फिल्म कहलाई। मैंने ये फिल्म थिएटर में रिलीज होने के बहुत बाद दूरदर्शन पर तब देखी, जब दूरदर्शन ब्लैक एंड व्हाइट ही हुआ करता था। गर्मियों के दिन थे और अपनी बुआ के यहां नौघड़ा, कानपुर की संकरी गलियों में बने मकानों की एक छत से दूसरी छत होते हुए हम किसी ऐसे घर की छत पर जा चिपके थे, जिसके आंगन में टीवी खुले में रखा ही इसीलिए गया था कि छत पर आ जमे बिन बुलाए मेहमान भी फिल्म देख सकें। फिल्म का एक एक गाना, राजेश खन्ना की एक एक अदा और आशा पारेख की एक एक बेबसी, बरसों बरस वैसी ही ताजी बनी हुई है। कहानी देखने में एक विधवा विवाह की कहानी जैसी लगती है लेकिन कहानी इतनी आसान नहीं है। नायिका अपनी सहेली के बच्चे को लेकर उसकी ससुराल रहने आती है विधवा के तौर पर। उसकी सहेली दुर्घटना में मरने से पहले उससे यही वादा लेती है। नायिका मान भी जाती है क्योंकि वह अपना घर छोड़कर भागी आई है। शादी के मंडप से भागकर जिस प्रेमी के पास पहुंची, उससे धोखा खा चुकी है। रिश्तेदारों को गंवा चुकी है और फिर सामने आता है नायक। ये वही है जिससे शादी से इनकार कर नायिका मंडप से भागी थी। कहानी पूरी फिल्मी है और इसी कहानी पर हॉलीवुड की एक फिल्म इससे पहले ‘नो मैन ऑफ हर ओन’ के नाम से बन चुकी है। ये फिल्म भी एक उपन्यास पर आधारित है जिसका नाम है, ‘आई मैरीड अ डेड मैन’ और जिसके लेखक हैं कॉर्नेल वूलरिच। फिल्म ‘कटी पतंग’ के बाद में तमिल में ‘नेनिजिल ओरू मुल’ और तेलुगू में ‘पुन्नामी चंद्रडुडु’ के नाम से रीमेक भी बने।
शम्मी कपूर के बाद राजेश खन्ना
शक्ति सामंत का नाम हिंदी सिनेमा में बहुत सम्मान के साथ आज भी लिया जाता है। राजेश खन्ना को फिल्म ‘आराधना’ में उनके करियर का सबसे अहम किरदार देने वाले शक्ति सामंत ने उससे पहले शम्मी कपूर के साथ सुपर डुपर हिट फिल्में बनाई थीं। ‘आराधना’ की ये जोड़ी इसके बाद ‘कटी पतंग’ और ‘अमर प्रेम’ में भी बनी। ‘अमर प्रेम’ तक आते आते राजेश खन्ना लाइन से 15 सुपरहिट फिल्मे दे चुके थे। ‘अमर प्रेम’ इस लिस्ट में शामिल इसलिए नहीं है क्योंकि राजेश खन्ना ने तीन साल में ही शोहरत का जो आसमान छू लिया था, उसके तब सिमटने की बारी शुरू हो चुकी थी। ‘आनंद’ में अमिताभ बच्चन की झलक लोगों को भा गई थी। राजेश खन्ना में सुपरस्टारडम के सारे ऐब आ चुके थे और ‘जंजीर’ की शूटिंग शुरू हो चुकी थी। प्रकाश मेहरा इसकी शूटिंग आर के स्टूडियो में कर रहे थे। वहीं राज कपूर ने पहली बार अमिताभ बच्चन की आवाज सुनी और आवाज सुनकर ही एलान कर दिया कि अगला सुपरस्टार यही होगा। उनकी बात सौ फीसदी सही साबित हुई।
फिल्म ‘कटी पतंग’ से पहले फिल्म ‘आराधना’ में राजेश खन्ना के साथ शक्ति सामंत ने उस समय की नंबर वन और अपनी फेवरिट हीरोइन शर्मिला टैगोर को ही लिया था। फिल्म ‘कटी पतंग’ में भी वह शर्मिला को ही लेना चाहते थे, लेकिन उस समय तक सैफ अली खान उनकी कोख में आ चुके थे। वह यह रोल चाहकर भी नहीं कर पाईं। आशा पारेख के साथ राजेश खन्ना इससे पहले फिल्म ‘बहारों के सपने’ में काम कर चुके थे, और फिल्म कब आई, कब गई किसी को पता तक नहीं चला लेकिन शक्ति सामंत को आशा पारेख की क्षमता पर पूरा भरोसा था। फिल्म ‘कटी पतंग’ की कहानी दरअसल महिला प्रधान फिल्म की कहानी है। आशा पारेख ने ये रोल सुना तो तपाक से स्वीकार कर लिया। इस फिल्म की चर्चा चलने पर आशा पारेख कहती हैं, ‘शक्ति सामंत जी की फेवरिट हीरोइन तब शर्मिला टैगोर हुआ करती थीं। वह शायद विधवा का किरदार नहीं करना चाहती थीं और मैंने पर्दे पर बिना ग्लैमर के दिखने का ये मौका जाने नहीं दिया। फिल्म विधवा विवाह के एक बहुत ही संवेदनशील विषय पर बनी फिल्म थी और राजेश खन्ना तब तक बहुत बड़े सुपरस्टार भी बन चुके थे लेकिन उन्होंने एक महिला प्रधान फिल्म में काम करने में जरा भी हिचक नहीं दिखाई। हमने इससे पहले फिल्म ‘बहारों के सपने’ में काम किया था, लेकिन अब मामला अलग था। फिल्म के सारे हिट गाने राजेश पर फिल्माए गए। लेकिन, फिल्म का शीर्षक गीत जिसे लता जी ने गाया है, ‘ना कोई उमंग है, ना कोई तरंग है, मेरी जिंदगी है क्या, एक कटी पतंग है..’ मेरे ऊपर फिल्माया गया और आज भी मैं ये गाना सुनती हूं तो मेरे दिल में एक हूक सी उठती है।’