पर्दे पर अपनी एक अलग ही छवि के लिए पहचानी गईं ललिता पवार का जन्म 18 अप्रैल 1916 को नासिक में हुआ। उनका असल नाम अंबा था। ललिता ने बाल कलाकार के तौर पर नौ साल की उम्र में फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' (1928) से अपना करियर शुरू किया था। 1942 में फिल्म 'जंग-ए-आजादी' में मशहूर एक्टर भगवान दादा ने शूटिंग में ललिता को ऐसा जोरदार चांटा मारा कि वह जमीन पर जा गिरीं। उनके शरीर के दाहिने भाग को लकवा भी मार गया। ललिता को इस हादसे के बाद कभी बतौर हीरोइन काम नहीं मिला और उन्होंने फिल्मों में सास और मां का रोल करना शुरू कर 24 फरवरी 1998 को दुनिया को अलविदा कहने वाली ललिता ने करीब 700 फिल्मों में काम किया। हम आपको आज उनके 10 बेहतरीन किरदारों के बारे में बताते हैं।
Lalita Pawar: ‘रामायण’ में मंथरा बनने से पहले इन बेहतरीन किरदारों से ललिता पवार ने मचाई हलचल
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फिल्म-श्री 420 (1955)
किरदार- गंगा माई
यह फिल्म राजकपूर द्वारा निर्देशित और निर्मित है। फिल्म में नरगिस भी मुख्य किरदार में नजर आईं। फिल्म में ललिता पवार ने गंगा माई का किरदार निभाया था। वह सड़कों पर फल बेचती हैं। फिल्म में एक सीन हैं जहां राजकपूर केले खरीदने के लिए उनके पास पहुंचते हैं। मोल-भाव को लेकर दोनों में बहस होती है। श्री 420 की बात होते ही लोगों को यही सीन याद आ जाता है। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी।
फिल्म- मिस्टर एंड मिसेज 55 (1955)
किरदार- सीता देवी
इस फिल्म में ललिता पवार, मधुबाला की आंटी सीता देवी के रोल में हैं। वह अनीता (मधुबाला) को अपने काबू में रखने की कोशिश में रहती हैं। इसके लिए वह प्रीतम (गुरु दत्त) के साथ मिलकर चाल चलती है लेकिन उन्हें पता ही नहीं होता है कि अनीता और प्रीतम पहले से एक दूसरे को जानते हैं। इस फिल्म में ललिता पवार का चालाक किरदार फिल्म में कई दिलचस्प मोड़ लेकर आता है। इस फिल्म में मुख्य अभिनय करने के साथ ही गुरु दत्त ने ही फिल्म का निर्देशन और निर्माण किया था। फिल्म में संगीत ओपी नय्यर ने दिया है।
फिल्म- अनाड़ी(1959)
किरदार- मिसेज डीसा
यह फिल्म उस साल की सुपरहिट फिल्मों में शुमार है। फिल्म में ललिता पवार ने मिसेज डीसा का किरदार अदा किया था। यह किरदार आज तक लोगों को याद है। अपनी अदाकारी से वह जिस तरह से दिग्गज अभिनेता राज कपूर के साथ अभिनय करती हैं और अपनी तीखी बातों से नूतन का दिल दुखाती हैं, वह देखते ही बनता है। फिल्म का निर्देशन ऋषिकेश मुखर्जी ने किया था। 16 जनवरी 1959 में रिलीज हुई इस फिल्म का निर्माण एल. बी. लछमन ने किया तो वहीं फिल्म में संगीत शंकर जयकिशन ने दिया।
फिल्म- सुजाता (1959)
किरदार- गिरीबाला
सुजाता निर्देशक बिमल रॉय की फिल्म है। फिल्म में सुनील दत्त और नूतन मुख्या किरदारों में हैं। वहीं सलोचना, ललिता पवार और शशिकला ने सहायक भूमिका निभाई है। यह फिल्म एक बंगाली लघु कहानी के ऊपर आधारित है। यह फिल्म देश में व्याप्त जाति व्यवस्था पर तंज कसती है। फिल्म में जहां सुनील दत्त को एक ब्राह्मण परिवार से दिखाया गया है तो वहीं नूतन को अछूत जाति का दिखाया गया है। दोनों एक दूसरे से प्यार करने लग जाते हैं जिससे दोनों की जिंदगी में मानो भूचाल आ जाता है।