जाने माने शास्त्रीय गायक पंडित जसराज का अमरीका में सोमवार को निधन हो गया है। वो 90 साल के थे। पंडित जसराज की पोती मीनाक्षी ने बीबीसी की सहयोगी पत्रकार मधु पाल से उनकी मौत की पुष्टि की है। उनके परिवार ने एक बयान जारी कर कहा है कि अमरीका के न्यू जर्सी में अपने घर पर दिल का दौरा पड़ने से उनका देहांत हुआ। उनका निधन स्थानीय समयानुसार सवेरे 5.15 बजे हुआ।
शास्त्रीय गायक पंडित जसराज का निधन, कहते थे 'संगीत में नहीं दिया मैंने कोई योगदान'
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पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित जसराज का जन्म संगीतकारों के एक परिवार में हुआ था। संगीत से उनका परिचय उनके पिता पंडित मोतिराम ने कराया था। जब जसराज केवल चार साल के थे उनके पिता का देहांत हो गया। इसके बाद उनके भाई और गुरू पंडित मणिराम ने उनकी संगीत शिक्षा शुरू की। पंडित जसराज का नाता संगीत के मेवाती घराने से रहा था जिसकी शुरूआत जोधपुर के पंडित घग्गे नजीर खान ने की थी। उनके शिष्य पंडिय नत्थुलाल से पंडित जसराज के पिता ने संगीत की शिक्षा ली थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक जताया है और कहा है कि 'उनकी मौत से भारतीय शांस्त्रीय संगीत को अपूरणीय क्षति पहुंची है। उनका संगीत अपने आप में उत्कृष्ट था। कई गायकों के लिए एक असाधारण गुरु के रूप में भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई। उनके परिवार और प्रशंसकों को मेरी संवेदनाएं।' राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोशल मीडिया पर उनकी मौत पर दुख प्रकट किया है और कहा है कि 'पंडित जसराज लगभग आठ दशकों तक गायकी करते रहे हैं।'
'मैं नहीं मानता संगीत के क्षेत्र में मेरा कोई योगदान है'
पंडित जसराज ने बीबीसी हिंदी के साथ 2005 में एक बातचीत में कुछ दिलचस्प बातें शेयर की थीं। इस इंटरव्यू में अपनी संगीत यात्रा के बारे में पंडित जसराज ने कहा था, 'यह कह पाना बहुत कठिन है कि कितनी सांसें लेनी हैं, कितने कार्यक्रम करने हैं। मैं नहीं मानता कि संगीत के क्षेत्र में मेरा कोई योगदान है। मैं कहां गाता हूं। मैंने कुछ नहीं किया है। मैं तो केवल माध्यम मात्र हूं। सब ईश्वर और मेरे भाईजी की कृपा और लोगों का प्यार है। कई बार ऐसा होता है कि गाते-गाते स्वरों को खोजने लगता हूं, ढूंढने लगता हूं कि कहीं से कोई सुर मिल जाए। उस दिन लोग कहते हैं कि आपने तो आज ईश्वर के दर्शन करा दिए और जिस दिन मुझे लगता है कि मैंने बहुत अच्छा गाया, कोई पूछ बैठता है, पंडित जी, आज क्या हो गया था।'
उन्होंने आगे कहा, ' पर हां, मैं ये मानता हूं कि हर कलाकार, जो इस देश में पैदा हुआ और जिसने अपनी जगह बनाई है, उसका संगीत को एक बड़ा योगदान होता है। ये योगदान तो लोग ही सही-सही बता सकते हैं। कलाकार अपने योगदान को नहीं जान पाता। शास्त्रीय संगीत को लेकर होने वाले प्रयोगों पर पंडित जसराज ने कहा था, 'ये मेरी दृष्टि से किसी बड़ी बहस का विषय नहीं है। नए कलाकारों ने अपने स्तर पर मेहनत करके अपनी जगह बनाई है और आज एक बड़ी संख्या ऐसे कलाकारों को सुन रही है। कई कलाकारों ने अपने काम के जरिए शास्त्रीय संगीत के प्रसार को बढ़ाया है और दुनियाभर में लोग उनको सुन रहे हैं, यह सकारात्मक संकेत है।'
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