गीतकार मनोज मुंतशिर ने अमर उजाला को दिए इंटरव्यू में अपनी लेखनी और शायरी से जुड़ी तमाम बाते की। साथ ही जीवन से जुड़े कुछ अनुभवों को भी शेयर किया। इतना ही नहीं मनोज ने ये भी बयाता कि उनके इस सफर की शुरुआत कैसे हुई।
चलिए आपको भी मनोज के इस सफर से रूबरू करवाते हैं। सबसे पहले आपको बता दें कि मनोज ने फिल्मों में लिखने का सिलसिला फिल्म 'द ग्रेट इंडियन बटरफ्लाई' से शुरू हुआ लेकिन इनको पहचान फिल्म 'एक विलेन' के सॉन्ग 'तेरी गलिया' से मिली। ये गाना आज भी नौजवानों की जुबां पर रटा हुआ है।
इंटरव्यू में जब मनोज से उनके इस सफर की शुरुआत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया था कि वे अपने मां-बाप के साथ एक रेलवे प्लेटफॉर्म पर खड़े थे जहां उन्हें एक बुक स्टॉल दिखा और उन्होंने वहां किसी शायर की वो किताब खरीदने की जिद की। उस वक्त मनोज की उम्र लगभग 6 से 7 साल थी।
आगे उन्होंने ये भी बताया कि वे ग्रेजुएट होने के बाद एक बार फिर एक रेलवे प्लेटफॉर्म पर गाड़ी खराब होने के कारण उनको रुकना पड़ा। जहां उनकी नजर फिर एक बुक स्टॉल पर पड़ी। ऐसे में ये सिलसिला आगे बढ़ा और मनोज का इस ओर रुझान बढ़ता ही चला गया और वे अपन इस शौक के चलते आज इस मुकाम तक पहुंचे।
आपको बता दें कि मनोज ने ही ब्लॉकबस्टर फिल्म 'बाहुबली 2' के गीत 'गली-गली तेरी राह चली जियो रे बाहुबली' अपनी कलम से पिरोया है। इतना ही नहीं मनोज ने 'तेरे संग यारा', मैं फिर भी तुमको चाहूंगा, कौन तुझे यूं प्यार करेगा, तेरी गलियां जैसे सुपरहिट गाने लिखे हैं। शायद ही आपको पता हो कि राहत फतेह अली खान का 'तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी' और 'मेरे रश्के कमर' का नया वर्जन भी मनोज ने ही लिखा है।