अभिनेत्री आलिया भट्ट की बहन शाहीन भट्ट की खासियत ये है कि उनका अपना अनुभव उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सबक बन चुका है। उनको हादसों ने पाला है। और, उनका हर एक चलन निराला है। वह मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर खुलकर बात करती हैं और जिस तरह से बात करती हैं, उससे किशोरों, युवाओं के साथ साथ इनके अभिभावकों को भी बहुत सारी जानकारी इस बात की मिलती है कि बदलते परिवेश में जिंदगी का मतलब क्या है।
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एम टीवी के कार्यक्रम एमटीवी क्वेश्चन मार्क्स वर्कशॉप में पहुंची शाहीन भट्ट इस बात से इत्तेफाक रखती हैं कि पढ़ाई के मामले में माता-पिता अपने बच्चों पर कुछ ज्यादा ही दबाव डालते हैं। ऐसे समय में माता-पिता की भूमिका बहुत अहम होती है। वह कहती हैं, 'मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मेरे माता-पिता ने हमेशा मुझे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए कहा लेकिन उसका परिणाम जो भी आया वह उन्होंने खुले मन से स्वीकार किया। उन्होंने कभी भी मुझ पर टॉपर बनने के लिए दबाव नहीं डाला।'
शाहीन भट्ट ने कहा, 'अगर बच्चे किसी बात को लेकर परेशान हैं तो माता-पिता की जिम्मेदारी बनती है कि बच्चे की समस्या को समझे। माता-पिता अपने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य में सहायता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। और, इस मामले में बच्चों को भी अपने मां बाप से खुलकर बात करना चाहिए। मानसिक तनाव में रहकर कोई भी काम सही नहीं होता है।'
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अकेलापन और तनाव डिप्रेशन का सबसे बड़ा कारण है। शाहीन भट्ट लगभग 20 साल तक डिप्रेशन का शिकार रही। और, अपने अनुभवों पर उन्होंने एक किताब 'आई हैव नेवर बीन (अन) हैप्पीयर' लिख चुकी हैं। जिसमे उन्होंने इस बात का उल्लेख किया है कि जब आप डिप्रेशन में होते हैं तो आपको कोई अच्छा ख्याल नहीं आता, बल्कि कभी -कभी सुसाइड करने का मन करता है। शाहीन भट्ट ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि अपनी किताब लिखने से पहले उन्होंने सुसाइड करने की कोशिश की थी।
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शाहीन भट्ट खुद मानती हैं कि उन्होंने डिप्रेशन के चलते अपनी जिंदगी के करीब 20 साल बेकार किए हैं। वह हर पल खुद को खुद में ही सिमटा हुआ पाती रहीं। शाहीन भट्ट कहती हैं, 'मैंने अपने मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के बारे में बात करने की कोई योजना नहीं बनाई थी, लेकिन दिन सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए एक तस्वीर ढूंढने की कोशिश कर रही थी। तब मुझे एहसास हुआ कि मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर मेरा जो अनुभव रहा है उसे लोगों के बीच साझा करना चाहिए।
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