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'जिंदगी की पहेली' को संगीत के 'आनंद' से सुलझाया इस गायक ने, सरकार से मिला सिनेमा का सबसे बड़ा सम्मान

Wed, 01 May 2019 09:36 AM IST
shrilata biswas मुंबई डेस्क, अमर उजाला
मुंबई डेस्क, अमर उजाला Published by: shrilata biswas Updated Wed, 01 May 2019 09:36 AM IST
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manna dey - फोटो : file photo

भारतीय संगीत की बात की जाए तो मन्ना डे का नाम खुद-ब-खुद नजरों के सामने तैरने लगता है। ये वो नाम है जिसके बिना आधुनिक भारतीय संगीत की परिकल्पना मुश्किल है। 1 मई 1919 को कोलकाता में जन्मे मन्ना का वास्तविक नाम 'प्रबोध चंद्र डे' था। इनके पिता का नाम पूर्ण चंद्र डे और मां का नाम महामाया था। इन्होंने प्रारंभिक संगीत शिक्षा अपने मामा संगीताचार्य कृष्ण चंद्र और उस्ताद कबीर खान से प्राप्त की। 

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manna dey - फोटो : social media

बतौर पार्श्व गायक मन्ना डे अपने करियर की शुरुआत 1943 में आई फिल्म ‘तमन्ना’ से की थी। इसमें संगीत दिया था कृष्ण चंद्र डे ने। सुरैया के साथ गाया गया मन्ना डे का गीत जबरदस्त हिट रहा। इन्हें पहला एकल गाना रिकॉर्ड करने का मौका मिला 1950 में बनी फिल्म मशाल में। संगीतकार सचिन देव बर्मन के संगीत से सजे 'ऊपर गगन विशाल' गाने से मन्ना का नाम पूरे हिंदी सिनेमा में छा गया। पचास और साठ के दशक में अगर हिंदी फिल्मों में राग पर आधारित कोई गाना होता, तो उसके लिए संगीतकारों की पहली पसंद मन्ना डे ही होते थे। 

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manna dey - फोटो : file photo

मन्ना डे की संगीत की प्राथमिक भाषा हिंदी और बांग्ला थी इसके अलावा उन्होंने भोजपुरी, मगधी, मैथिली, पंजाबी, असमी, उड़िया, कोंकणी, मराठी, गुजराती, सिंधी, मलयालम, कन्नड़ और नेपाली जैसी तमाम क्षेत्रीय भाषाओं में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा है। मन्ना दा ने खुद को किसी एक शैली के संगीत से बांधकर नहीं रखा। उन्होंने लोकगीत से लेकर पॉप संगीत तक सभी प्रकार में प्रयोग किया। इस प्रयोग से वे सिर्फ भारत में ही नही अपितु विदेशों में भी अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे। 

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manna dey - फोटो : file photo

मन्ना डे ने गंभीर गानों पर अपनी आवाज का जादू बिखेरने के साथ-साथ 'दिल का हाल सुने दिल वाला', 'ना मांगू सोना चांदी' और 'एक चतुर नार' जैसे हल्के-फुल्के गीत भी गाए हैं। उनकी आवाज की उदासी और भारीपन गानों को अमरत्व प्रदान करने के लिए काफी था। काबुलीवाला का 'ए मेरे प्यारे वतन' और आनंद फिल्म का 'जिंदगी कैसी है पहेली' इसकी मिसाल हैं। 

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manna dey - फोटो : file photo

मन्ना डे ने कवि हरिवंश राय बच्चन की रचना 'मधुशाला' को भी अपनी आवाज दी है। मन्ना डे ने 1953  में केरल की सुलोचना कुमारन से शादी की। मन्ना दा की शुरोमा और सुमिता नाम की दो बेटियां हुईं। जनवरी 2012 में लंबे समय तक कैंसर से जूझने के बाद इनकी पत्नी सुलोचना की मृत्यु हो गई।  मन्ना डे को संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्हें 1971 में पद्मश्री और 2005 में पद्म विभूषण से नवाजा गया था। साल 2007 में उन्हें संगीत के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान के लिए भारतीय फिल्म जगत का सबसे प्रतिष्ठित पुरष्कार 'दादा साहब फाल्के अवार्ड' से सम्मानित किया गया।

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