हॉलीवुड फिल्म 'द गॉडफादर' (1972) फेम एक्टर मार्लन ब्रैंडो अपने अभिनय के लिए जाने जाते हैं। ब्रैंडो अपने आप में अभिनय का एक संस्थान रहे। आज भी दुनियाभर में जब अंडरवर्ल्ड पर फिल्में बनाई जाती हैं तो दिवंगत अभिनेता को ही कॉपी किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि बॉलीवुड के दिग्गज स्टार्स ने भी कभी न कभी मार्लन ब्रैंडो को कॉपी किया है। मगर, हैरानी की बात है कि खुद ब्रैंडो को अपने फिल्मी करियर में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। देखा जाए तो उनका पूरा जीवन ही संघर्ष भरा रहा। जिंदगी का वह दौर, जिसकी ढेर सारी यादें ताउम्र साथ रहती हैं, ब्रैंडो की जिंदगी में उस दौर की भी बेहद कड़वी यादें साथ रहीं। जी हां, हम बात कर रहे हैं उनके बचपन की। ब्रैंडो को इस कच्ची उम्र में कई झकझोर देने वाले अनुभवों का सामना करना पड़ा। फिर पर्सनल लाइफ को लेकर विवादों में रहे और करियर में भी कई मुश्किलें आईं।
Marlon Brando: बड़ी मुश्किल से मिली थी मार्लन ब्रैंडो को 'द गॉडफादर', जब ऑस्कर मिला तो इसलिए ठुकरा दिया
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मॉर्लन ब्रैंडो के बचपन की शुरुआत शराबी माता-पिता से हुई। एक्टर के लिए एक ट्यूटर रखी गई और वह भी ब्रैंडो का शोषण करने में पीछे नहीं रही। ब्रैंडो की उम्र महज चार साल थी और उन्हें यौन शोषण से गुजरना पड़ा। यह शोषण किसी और ने नहीं, बल्कि उनकी टीचर ने किया था। जब अभिनय की दुनिया में कदम रखा तो यहां भी मुश्किलों ने पीछा नहीं छोड़ा। ब्रैंडो का करियर डूबने को था। कोई फिल्म मेकर ब्रैंडो को नहीं लेना चाहता था। दरअसल, ब्रैंडो की पूरी जिंदगी विवादों से भरी रही। जिंदगी में तीन शादियां, कई अफेयर, 11 बच्चे और तीन पुरुषों के साथ होमोसेक्शुअल रिलेशन। कुल मिलाकर सभी चीजों ने एक्टर की छवि पर असर डाला।
ब्रैंडो जब 11 वर्ष के थे, तो उनके पेरेंट्स अलग हो गए। मां ने अकेले एक्टर की परवरिश की। महज 15 साल की उम्र में ही मार्लन शहर के इकलौते मूवी थिएटर की लाइब्रेरी में 1939-1941 बतौर सहायक शिक्षक काम करने लगे। मार्लन लोगों की नकल उतारने में माहिर थे। वह साथियों की मिमिक्री करते। मार्लन थिएटर और स्कूल दोनों में बेहतरीन थे। 1943 में युद्ध काल के दौरान उन्हें एक मिलिट्री कर्नल के पास प्रोबेशन पर रखा गया। इससे बचने के लिए मार्लन ने खुद को अपने कमरे में कैद कर लिया। एक दिन मार्लन घर से निकले और उन्हें पकड़ लिया गया। बदमाशियों के चलते फिर टीचर्स ने इन्हें स्कूल से निकालने का फैसला किया, लेकिन स्टूडेंट्स की मदद से उन्हें रोक लिया गया। इसके बावजूद मार्लन ने स्कूल छोड़ दिया। स्कूल और आर्मी से रिजेक्ट होने के बाद मार्लन अपनी बहन के पास न्यूयॉर्क चले गए, जो वहां एक्टिंग स्कूल में पढ़ाई कर रही थीं। उनके अभिनय से लोग हैरान हुए। इसके बाद उन्हें एक्टिंग में मजा आने लगा तो वो दोस्त रॉय साम्लेयो के साथ रहने लगे।
1945 में मार्लन ब्रांडो को एजेंट की मदद से पहली फिल्म 'द ईगल हैज टू हेड्स' मिली। ऑडिशन में खराब प्रदर्शन करने के बावजूद डायरेक्टर तालूलाह बैंकहैड ने उन्हें साइन कर लिया, क्योंकि उन्होंने मार्लन की मेथड एक्टिंग के किस्से सुने थे। मार्लन ब्रैंडो को फिल्म द मैन (1950) में पहली बार स्क्रीन रोल मिला। इसके बाद उन्हें कई फिल्में मिली, लेकिन 1958- 1971 तक एक भी हिट फिल्म उनके खाते में नहीं थी। 1971 तक ब्रैंडो लगभग कंगाली की कगार पर आ चुके थे। मेकर्स को परेशान करने वाले रवैये के कारण लोगों ने उन्हें बड़ी फिल्मों में लेना बंद कर दिया। जब फिल्म 'गॉडफादर' की कास्टिंग शुरू हुई तो प्रोडक्शन ने कई बड़े अभिनेताओं की लिस्ट बनाई, जिसमें मार्लन भी शामिल थे।
प्रोडक्शन हाउस पैरामाउंट पिक्चर के प्रेसिडेंट मार्लन के खिलाफ थे। जब कई लोगों ने उनके नाम पर हामी भरी तो प्रेसिडेंट ने उन्हें कास्ट करने की तीन बड़ी शर्ते रखीं। पहली शर्त थी, मार्लन को मिनिमम फीस दी जाएगी। दूसरी- अगर मार्लन के रवैये से प्रोडक्शन में रुकावट आई तो इसके खर्च की भरपाई वो खुद करेंगे। तीसर शर्त- उन्हें इस फिल्म से पहले ऑडिशन और स्क्रीन टेस्ट देना होगा। मार्लन ऑडिशन देने पहुंचे। उन्होंने खुद अपना मेकअप किया। ऑडिशन के दौरान ब्रैंडो ने अच्छा प्रभाव जमाया और उन्हें कास्ट कर लिया गया। हालांकि, शर्त के अनुसार उन्हें फिल्म के लिए महज 50 हजार डॉलर फीस मिली और ग्रॉस प्रॉफिट में एक प्रतिशत की हिस्सेदारी। मगर, यह फिल्म दुनियाभर के सिनेमा की बेहतरीन फिल्मों में से एक है और इसने ब्रैंडो की किस्मत पलट दी। इस फिल्म के लिए मार्लन ब्रैंडो को बेस्ट एक्टर का ऑस्कर अवॉर्ड मिला था। हालांकि उन्होंने इसे लेने से इनकार कर दिया। सेरेमनी में जब उनके नाम की घोषणा हुई तो हॉलीवुड एक्ट्रेस साचीन क्रूज 12 पेज के साथ स्टेज पर पहुंचीं और बोलीं- मार्लन इसलिए यह अवॉर्ड नहीं लेंगे, क्योंकि हॉलीवुड फिल्मों में अमेरिकियों की छवि खराब की जा रही है।