बात सन 1955 की है.भारतीय सिनेमा के मशहूर फिल्मकार कमाल अमरोही साहब अपनी पत्नी मशहूर फिल्म अभिनेत्री मीना कुमारी के साथ दक्षिण भारत में जीवन बिता रहे थे। वहीं उन्हें एक ख्याल आया कि जैसे शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज के लिए ताजमहल बनाया था, वैसे ही उन्हें भी अपनी मुहब्बत मीना कुमारी के लिए कुछ करना चाहिए। इसी सोच में उन्होंने फैसला किया कि वह मीना कुमारी को लेकर भारत की सबसे शानदार फिल्म बनाएंगे। कमाल अमरोही साहब चाहते थे कि इस फिल्म से मीना कुमारी बतौर एक महान अभिनेत्री भारतीय सिनेमा जगत में स्थापित हो जाएं।
पुण्यतिथि विशेष: किस्सा मीना कुमारी की आखिरी फिल्म 'पाकीजा' का
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फिल्म का नाम रखा गया "पाकीजा"
इसके बाद बारी आई फ़िल्म के किरदारों की कास्टिंग की। फिल्म का मुख्य किरदार साहिबजान का था जिसे मीना कुमारी निभा रही थी। कमाल अमरोही साहब ने सलीम जो कि एक बिजनेसमैन का रोल था, उसके लिए अभिनेता अशोक कुमार को साइन किया।
जब फिल्म की शूटिंग शुरू हुई तो यह तय किया गया कि फिल्म ब्लैक एंड व्हाइट फॉर्मेट में बनेगी। मगर फिल्म की शूटिंग के शुरू होने के कुछ समय बाद भारत में रंगीन फिल्मों का दौर आ गया था। इसको देखते हुए कमाल अमरोही साहब ने फिल्म को रंगीन प्रिंट में फिर से शूट करने का फैसला किया। अभी रंगीन प्रिंट में शूटिंग शुरू हुई थी कि सिनेमास्कोप लेंस की तकनीक भारत में आ गई। कमाल अमरोही साहब ने सिनेमास्कोप लेंस रॉयलिटी बेसिस पर लेकर शूटिंग शुरू की। इसी दौरान सिनेमास्कोप लेंस से शूटिंग करते वक्त कुछ तकनीकी दिक्कतें पेश आने लगीं। जब सिनेमास्कोप लेंस निर्माता कंपनी को यह बात बताई गयी तो तो उन्होंने खेद जताते हुए फौरन लेंस को ठीक करके दिया। साथ ही, लेंस निर्माता कंपनी ने यह तय किया कि वह कमाल अमरोही साहब से लेंस की रॉयलिटी मनी नहीं लेगी और उन्हें यह लेंस एक उपहार के रूप में दे देगी।
इस तरह शूटिंग का काम एक बार फिर सुचारू रूप से चलता रहा। 1964 आते-आते जब आधे से ज्यादा फिल्म शूट हो गई थी तभी निजी कारणों के चलते कमाल अमरोही और मीना कुमारी अलग हो गये। हालांकि उन्होंने कानूनी तौर पर तलाक नहीं लिया था मगर अब वो साथ नहीं रहते थे। इसका यह असर हुआ कि फिल्म डिब्बाबंद हो गई। लगभग 4 साल यूं ही गुजर गये और इस दौरान कमाल अमरोही साहब की एक अन्य फिल्म "दिल अपना और प्रीत पराई"रिलीज हो गई।
कमाल अमरोही साहब के लिए फ़िल्म "पाकीज़ा" अपनी मुहब्बत मीना कुमारी के लिए उनके इश्क का एक नजराना थी। अब क्यूंकि दोनों साथ नहीं थे, इसलिए फिल्म बनाने की कोई वजह नहीं थी। मगर फिल्म निर्माण में कई कलाकारों और फिल्म टेकनिशियन की रोजी रोटी और उनके परिवार की जिंदगी जुड़ी होती है। इस तरह पाकीजा जैसी बड़े बजट की फिल्म का रुकना कई लोगों के जीवन में आर्थिक संकट का कारण बन गया था।
इसी सब से रूबरू होते हुए कमाल अमरोही साहब ने 24 अगस्त 1968 मीना कुमारी को एक खत लिखा। खत में कमाल अमरोही साहब ने लिखा कि वो जानते हैं कि मीना कुमारी सिर्फ इस शर्त पर फिल्म पाकीजा को पूरा करेंगी अगर वो उन्हें तलाक दे दें। कमाल साहब ने आगे कहा कि उन्हें मीना कुमारी जी की हर बात मंजूर है और वह उन्हें हर तरह से आजाद करने के लिए राजी हैं। वो यह दरख्वास्त करते हैं कि कई लोगों की जिंदगी इस फिल्म के बनने से जुड़ी है इसलिए मीना कुमारी फिल्म पूरी करने में मदद करें।
इस खत के जवाब में मीना कुमारी ने कमाल अमरोही साहब को सन 1969 की शुरुवात में एक खत लिखा। खत में मीना कुमारी जी ने लिखा कि फिल्म पाकीजा उनके दिल के बेहद करीब है। वो हमेशा से फिल्म को करना चाहती थी और उन्हें फिल्म को पूरा करके बहुत खुशी मिलेगी। साथ ही, मीना कुमारी ने कहा कि वह इस फिल्म के लिए सिर्फ एक सिक्का बतौर मेहनताना लेंगी।
उसी फिल्म के अभिनेता सुनील दत्त और उनकी पत्नी नर्गिस दत्त ने इस फिल्म के शूट हुए हिस्से को देखा और बहुत प्रभावित हुए। उन्हें महसूस हुआ कि यह शानदार फिल्म तो पूरी बननी चाहिए। दोनों ने कमाल अमरोही साहब और मीना कुमारी की मीटिंग करवाई और इस तरह फिर से एक बार फिल्म पाकीजा की शूटिंग शुरू की गई। कमाल अमरोही साहब ने मीना कुमारी जी को धन्यवाद करते हुए एक सोने का सिक्का दिया।
जब 1968 में फिल्म की शूटिंग दोबारा शुरू की गयी तो कमाल अमरोही साहब के सामने कई चुनौतियाँ थी। सबसे पहली चुनौती फिल्म की कास्टिंग और म्यूजिक को लेकर थी। फिल्म को शुरू हुए लगभग 10 साल हो गये थे और फिल्म के मुख्य अभिनेता अशोक कुमार बूढ़े हो चले थे। इसे देखते हुए कमाल अमरोही साहब ने उनके रोल सलीम के लिए एक्टर राज कुमार को साइन किया। इसके साथ ही राज कुमार की शख्सियत के हिसाब से उस रोल को बिजनेसमैन के किरदार से बदलकर एक फॉरेस्ट अधिकारी का किरदार बना दिया। हालांकि एक्टर अशोक कुमार फिल्म में बरकरार रहे और उनके लिए एक नए रोल हाकिम साहब की रचना की गई। मगर अंत में ये तय हुआ कि अशोक कुमार साहब शहाबुद्दीन का किरदार निभाएंगे जबकि हाकिम साहब का रोल डी.के सप्रू करेंगे।