अभिलाषा एफएनयू। पहली बार में तो नाम सुनकर इस बात पर ही ध्यान जाता है कि ये एफएनयू क्या है? उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से ताल्लुक रखने वाली अभिलाषा हॉलीवुड में तेजी से अपनी जगह बना रही हैं। पत्रकार बनने की ख्वाहिश लिए पढ़ाई करते करते उन्हें दूरदर्शन में काम करने का न्योता मिला, लेकिन शुरुआती दिनों में ही उन्हें समझ आ गया कि मीडिया के प्रति उनका प्रेम खबरों से ज्यादा उस कल्पनालोक को लेकर है जिसे फिल्मों के जरिये रचा जा सकता है। अभिलाषा लॉस एंजेलिस आईं। फिर न्यूयॉर्क फिल्म अकादमी में पढ़ाई शुरू की और तभी कोरोना आ गया। लेकिन अभिलाषा ने हिम्मत नहीं हारी। वह अपने काम मे लगी रहीं और अब उन्हें अच्छे-अच्छे निर्माताओं से स्क्रिप्ट मे साथ देने का बुलावा आता रहता है। वह हॉलीवुड की चर्चित स्क्रिप्ट सुपरवाइजर बन चुकी हैं।
Abhilasha FNU: मिर्जापुर की बिटिया ने हॉलीवुड में किया धमाल, भारत लौटकर सिनेमा की सूरत बदलने की जताई ख्वाहिश
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सिनेमा के बारे में बताने वाला कोई नहीं
‘एफएनयू मतलब फर्स्ट नेम अननोन!’ अभिलाषा बताती हैं। अपनी पसंद बदलने के बारे में वह कहती हैं, ‘मैंने अनसुनी कहानियों के जरिये समाज में बदलाव लाने के लिए पत्रकारिता का पेशा चुना था फिर मुझे लगा कि सिनेमा के जरिये इन कहानियों को और प्रभावी तरीके से कहा जा सकता है।’ अपने बचपन में ले जाते हुए अभिलाषा अपने बारे में थोड़ा और खुलासा करती हैं, ‘मैं शुरू से कुछ न कुछ बनाती रहती थी। कहानियां कहने के तरीकों में मुझे हर तरह की कलाएं पसंद रहीं फिर चाहे वह नृत्य हो, गाना हो, कहानियां सुनाना हो यहां तक कि चित्रकारी भी। किशोरावस्था तक तो फिल्मों में जाने का मुझे ख्याल तक नहीं आता था। डॉक्टरों और इंजीनियरों के परिवार से होने के चलते सिनेमा के बारे में मुझे कोई कुछ खास बताने वाला भी नहीं था लेकिन मेरे डैडी की वह सीख मुझे हमेशा याद रहती है कि जहां चाह, वहां राह!’
नामचीन सितारों संग काम करने का मौका
जब कोरोना दुनिया में आया तो तमाम लोगों के कामकाज धीमे पड़ गए लेकिन अभिलाषा के करियर ने इसी के बाद रफ्तार पकड़ी। वह बताती हैं, ‘साल 2020 से लेकर अब तक मैं हॉलीवुड के करीब 60 फिल्म और टीवी प्रोजेक्ट से जुड़ चुकी हूं। इस दौरान मुझे एरिक रॉबर्ट, लियोन ब्रिजेस, टोरी स्पेलिंग जैसे नामचीन लोगों के साथ काम करने का मौका मिला। हाल ही में मैंने ‘ए मिरेकल बिफोर क्रिसमस’ में अपना काम पूरा किया है। क्रिश्चियन ऑनलाइन फिल्म फेस्टिवल में मुझे ‘आई राइज’ के लिए बेस्ट आर्ट क्रिएटर का पुरस्कार भी मिल चुका है।’
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भारतीय सिनेमा में बदलाव की तमन्ना
तो अब आगे क्या इरादा है? इस सवाल के जवाब में अभिलाषा कहती हैं, ‘मैं हॉलीवुड में इस इरादे के साथ काम कर रही हूं कि मुझे एक स्क्रिप्ट सुपरवाइजर की हैसियत से यहां की रचनात्मकता के साथ साथ फिल्में बनाने के दौरान नैतिक व्यवहार की सही जानकारी मिल सके। और, एक बार ये सब मैंने सीख लिया तो फिर मेरा इरादा वापस भारत आकर इनके जरिये वहां के सिनेमा में बदलाव लाने का है। लॉस एंजेलिस में रहने के दौरान मैं नई नई चीजों के बारे में जानने की कोशिश के साथ साथ अपनी अलग स्टोरीटेलिंग भी समझने में लगी हुई हूं। मैं प्रयोगों में यकीन रखती हूं और चाहती हूं कि विविधता पूर्ण पृष्ठभूमि से आने वाले विविध कलाकारों के साथ मिलकर कुछ रच सकूं।’
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‘अंधाधुन’ और ‘तुम्बाड’ ने बदली सूरत
विश्व सिनेमा में आ रहे बदलाव का भारतीय सिनेमा पर वह क्या असर देखती हैं? इसके बारे में अभिलाषा कहती हैं, ‘वैश्वीकरण ने भारतीय सिनेमा को विश्व पटल पर एक नई दमक के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का बेहतरीन मौका दिया है। भारत में इतनी खूबसूरती, अनोखी और अनसुनी कहानियां है जिनकी तरफ ध्यान देकर भारतीय सिनेमा बॉलीवुड की खर्च हो चुकी म्यूजिकल्स की अपनी छवि से बाहर आ सकता है। हाल के दिनों में श्रीराम राघवन की फिल्म ‘अंधाधुन’ और राही अनिल बर्वे की फिल्म ‘तुम्बाड’ ने विश्व सिनेमा का ध्यान अपनी तरफ खींचने में कामयाबी पाई है। भारतीय सिनेमा की इस समय की सबसे बड़ी चुनौती फिल्मों को मिलने वाला बजट है और मुझे लगता है कि स्वतंत्र सिनेमा के लिए भारत में यही सबसे बड़ी अड़चन है।’
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