एक अच्छे अभिनेता की खासियत होती है कि वह फिल्म के किरदार में पूरी तरह से डूब जाता है। निर्माताओं की फिल्म के कलाकारों से अपेक्षा होती है कि वह लिखी गई स्किप्ट के अनुसार ही उस रोल को निभाए। बॉलीवुड में अब तक कई ऐसे सेलेब्स देखे गए जो अपने किरदारों में इतने ज्यादा फिट हुए कि आगे चलकर वे एक ही तरह के रोल में फंस कर रह गए। आइए जानते हैं इन सितारों के बारे में...
Bollywood: एक जैसे किरदार में बंध कर रहे गए ये सितारे, एक अभिनेता ने तो सैकड़ों बार निभाया पुलिस अफसर का रोल
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आलोक नाथ को सिने प्रेमी 'बाबूजी' के नाम से भी जानते हैं। राजश्री प्रोडक्शंस की फिल्मों का उन्हें यह टैग दिलाने में खास योगदान रहा है। बड़े पर्दे पर वे अक्सर जमीन से जुड़े व्यक्ति के रूप में दिखे हैं। ज्यादातर फिल्मों में वे पिता, चाचा या अभिभावक की भूमिका में नजर आए हैं। उनके बाबूजी वाले मीम्स ने इंटरनेट पर खूब चलते हैं।
जगदीश राज हिंदी फिल्मों के मंझे हुए अभिनेता थे। शानदार चरित्र अभिनेताओं की लिस्ट में उनका नाम भी जरूर शामिल किया जाता है। पूरे करियर मे उन्होंने सैकड़ों बार ऑन-स्क्रीन पुलिस की भूमिका निभाई थी। वे पहली बार एक पुलिस वाले के रूप में 1956 में राज खोसला की देव आनंद अभिनीत फिल्म सीआईडी में दिखाई दिए थे। इसके बाद वे कानून (1960), इत्तेफाक (1969), जॉनी मेरा नाम (1970), धुंध (1974), रोटी (1974), काला पत्थर (1979), सिलसिला (1981), शक्ति (1982), बोल राधा बोल (1992), जैसी मशहूर फिल्मों में पुलिस अफसर के रोल में नजर आए।
इफ्तेखार अहमद को उनकी सहायक भूमिकाओं के लिए जाना जाता है। हिंदी फिल्मों में वे पुलिस के बड़े अधिकारी के रूप में अक्सर नजर आते थे। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत साल 1944 में आई फिल्म तकरार से की थी। दुबले-पतले शरीर और आकर्षक व्यक्तित्व की वजह से वे बड़े पर्दे पर एक पुलिस अधिकारी, पुलिस कमिश्नर, कोर्ट रूम जज और डॉक्टर की भूमिकाओं फिट नजर आते थे। संगम (1964), तीसरी मंजिल (1966), इत्तेफाक (1969), जॉनी मेरा नाम (1970), द ट्रेन (1970), गैम्बलर (1971) जैसी फिल्मों में कमिश्नर की भूमिका निभाते नजर आए थे।
शराबी की भूमिकाओं में अगर किसी को महारत हासिल थी तो वे केष्टो मुखर्जी ही थे। पर्दे पर अपने अभिनय से उन्होंने लाखों दिलों पर राज किया। हालांकि, प्रभावशाली एक्टिंग के बावजूद भी वे एक शराबी के रूप में टाइपकास्ट होकर ही रह गए। बॉम्बे टू गोवा (1972), आप की कसम (1974), चुपके चुपके (1975), काला सोना (1975), इनकार (1977), गोलमाल (1979), रॉकी (1981), कुदरत (1981) जैसी फिल्मों में उन्होंने शराबी का रोल निभाकर लोगों की खूब वाहवाही लूटी।
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