दम मारो दम मिट जाए गम.... कश लगाती ज़ीनत अमान पर फिल्माया गया ये हिप्पी गाना जब शुरू होता है तो सबसे पहले सुनाई देती है गिटार की धुन। ये धुन इसकी पहचान बन चुकी है। इस गाने को बनाने वाले आरडी बर्मन, गाना गाने वाली आशा भोसले और गाना लिखने वाले आनंद बख़्शी का नाम तो सब जानते हैं। लेकिन उस कलाकार का नाम कम ही लोग जानते हैं जिन्होंने अपने गिटार से गीत में चार चाँद लगाए। उस गिटारिस्ट का नाम है भूपिंदर सिंह जो करीब 20 साल तक बतौर गिटारिस्ट काम करते थे। ये वही भूपिंदर हैं जो बाद में बतौर गायक भी मशहूर हुए। आज गिटार से सजे कुछ मशहूर गानों और इन गानों में गिटार बजाने वाले कलाकारों की बात करते हैं जिनका जिक्र कम ही होता है।
पर्दे के पीछे रहकर गानों में इन गिटारिस्ट ने भरी जान, आज जी रहे गुमनामी की जिंदगी
एक हसीना थी...
सुभाष घई की फिल्म 'कर्ज' का वो क्लाइमेक्स सीन याद कीजिए जब मॉन्टी (ऋषि कपूर) स्टेज पर गिटार बजाता है और उसे सुनकर सिमी गरेवाल को उनका अतीत याद आता है। जब शूटिंग चल रही थी तो ऋषि कपूर ने सुभाष घई से कहा कि सीन करते समय अगर वाकई कोई धुन बज रही हो तो उन्हें आसानी होगी। सुभाष घई ने कुछ मोहलत माँगी और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से गिटार पर सजी वो धुन लेकर आए - 'एक हसीना थी'। पर्दे पर भले ही वो गिटार ऋषि कपूर ने बजाई हो लेकिन असल में इसे ऋषि कपूर के लिए बजाया था गिटारिस्ट गोरख शर्मा ने जो प्यारेलाल के भाई भी थे। साल 2018 में उनका निधन हो गया।
#GorakhSharma, a most versatile guitarist of #Bollywood music industry and brother of music composer Pyarelal, passed away on Friday 26th January 2018 at 11.20 p.m. pic.twitter.com/YvhFJfJ1JR
— SYED AMMAR ALAVI (@AMMARALAVI) February 1, 2018
गोरख शर्मा ने सत्तर, अस्सी और 90 के दशक में कई बेहतरीन गानों के लिए गिटार बजाई। ऋषि कपूर के लिए ही फिल्म बॉबी में 'मैं शायर तो नहीं' एक खूबसूरत मिसाल है। 'ये कहाँ आ गए हम'... फिल्म सिलसिला के इस गाने में अमिताभ बच्चन की आवाज के बीच गिटार के जो खूबसूरत नोट सुनाई देते हैं वो भी गोरख शर्मा के ही हैं। आशिकी के गाने 'साँसों की जरूरत है जैसे' में उनकी बजाई गिटार गाने में जान भरती है तो जादू तेरी नजर में भी उनकी ही गिटार का जादू था।
चुरा लिया है तुमने जो दिल को...
गायक बनने से बहुत पहले भूपिंदर फिल्म इंडस्ट्री के उम्दा गिटारिस्ट थे जो अक्सर आरडी बर्मन के साथ काम करते थे। दम मारो दम के अलावा भूपिंदर ने फिल्म यादों की बारात के मशहूर गाने 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को' में भी गिटार बजाया था। शुरू के दिनों में उन्हें चेतन आनंद ने मौका दिया 1966 की फिल्म 'आख़िरी खत' में जो राजेश खन्ना की पहली फिल्म थी। उस फिल्म के एक गाने में भूपिंदर ने सिर्फ गिटार बजाई है, वो गाना गाया भी और वो गाना भूपिंदर पर फिल्माया भी गया और ऐसा इत्तेफाक कम ही होता है। गाना था 'रुत जवां जवां, रात मेहरबां। छेड़ो कोई दास्तां।'
नीले नीले अंबर पे...
1983 में आई फिल्म कलाकार का एक सीन- रात के अंधेरे में एक आर्टिस्ट अपनी ही धुन सें सवार गिटार लिए गाना गाता है- 'नीले नीले अंबर पे'। वहाँ पास में रहने वाली एक लड़की( श्रीदेवी) उसी शिद्दत से चोरी चोरी वो गाना सुनती है। इस गाने में बजाए गए गिटार के नोट्स को कई गिटार बजाने वाले बेंचमार्क मानते हैं। पर्दे पर तो ये गिटार कुनाल गोस्वामी (मनोज कुमार के बेटे) ने बजाई थी लेकिन असल में इसे बजाया था रमेश अय्यर ने जो फिल्मों में दिग्गज गिटार आर्टिस्ट थे। ये गाना वैसे पहले तमिल में संगीतकार इलयाराजा ने बनाया था जिसमें पर्दे के पीछे चंद्रशेखर नाम के कलाकार ने गिटार बजाया था। फिल्म 'सागर' में ऋषि कपूर अपनी चाहत बयां करने के लिए जब 'चेहरा है या चाँद खिला है' गाते हैं तो दरअसल अकूस्टिक गिटार पर ऋषि कपूर के नहीं रमेश अय्यर के हाथ जादू चला रहे होते हैं।
