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मदरसे में काजी थे मुकरी, परिवार चलाने के लिए की बॉम्बे टॉकीज में नौकरी फिर ऐसे बने कॉमेडियन

Sun, 05 Jan 2020 11:21 AM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: अपूर्वा राय Updated Sun, 05 Jan 2020 11:21 AM IST
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Mukri Birth Anniversary His roles always memorable Comedian Muhammad Umar Mukri
mukri - फोटो : social media

परदे पर जिन्हें देखते ही दर्शकों के होंठों पर मुस्कुराहट आ जाती थी ऐसे ही एक शख्स थे मोहम्मद उमर मुकरी। चार फुट कद के गोल-मटोल मुकरी ने 600 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। उनकी भूमिका चाहे छोटी ही क्यों ना रही, लेकिन दर्शकों को हंसाने में उन्होंने कभी कंजूसी नहीं बरती। उस दौरान बड़े से बड़ा स्टार भी मुकरी की हास्य प्रतिभा का कायल था। दिलीप कुमार, सुनील दत्त, राज कपूर, देवानंद, संजीव कुमार, प्राण ही नहीं बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन से भी उनकी गहरी यारी रही।

Mukri Birth Anniversary His roles always memorable Comedian Muhammad Umar Mukri
mukri - फोटो : Social Media
कहा तो यह भी जाता है कि अमिताभ बच्चन ने मुकरी से लोगों को हंसाने के गुर सीखे थे। मुकरी को इंग्लिश नहीं आती थी। लेकिन वे बड़े आत्मविश्वास से इंग्लिश के शब्द बोलते थे। मुकरी ये यह अंदाज अमिताभ ने सीखा और इसे नमक हलाल में दर्शाया। जी हां, फिल्म में.. इंग्लिश इज ए फन्नी लैंग्वेज, आई कैन टाक इंग्लिश, आई कैन वाक इंग्लिश... जैसे संवाद बोलकर अमिताभ ने खूब वाहवाही लूटी। यह सब मुकरी की प्रेरणा से उन्होंने किया।
Mukri Birth Anniversary His roles always memorable Comedian Muhammad Umar Mukri
mukri - फोटो : Social Media
फिल्मों में आने से पहले मुकरी काजी थे, जिनका काम मदरसे में बच्चों को कुरान पढ़ाना था। लेकिन इससे आमदनी कम होती थी। परिवार चलाने के लिए मुकरी को देविका रानी के फिल्म स्टूडियो बॉम्बे टॉकीज में नौकरी करनी पड़ी लेकिन मुकरी को क्या पता था यहां आकर उनको वो मिलेगा जो पाने के कभी चाह ही उनके अंदर नहीं रही। मुकरी को परदे पर सामने लाने का श्रेय देविका रानी को जाता है। बताते चलें कि 05 जनवरी 1922 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के अलीबाग में जन्मे मुकरी का असली नाम मोहम्मद उमर मुकरी था। मुकरी मजहबी इंसान थे और उनके घर का माहौल भी धार्मिक हुआ करता था।
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Mukri Birth Anniversary His roles always memorable Comedian Muhammad Umar Mukri
mukri - फोटो : Social Media
4 सितंबर 2000 में मुकरी इस दुनिया को छोड़कर चले गए और अपने पीछे छोड़ गए यादें जो उनकी फिल्मों के देख उनके फैंस को आज भी आती है। बांबे टाकीज की मालकिन मशहूर अभिनेत्री देविका रानी अक्सर मुकरी को देखा करती थीं। उनका छोटा कद, गोल-मटोल चेहरा और सहज दंतविहीन मुस्कान देखते ही देविका रानी हंसे बिना न रहतीं। मुकरी को देखते ही उनका तनाव दूर हो जाता। उन्होंने सोचा कि यह आदमी कैमरे के पीछे की बजाय परदे पर ठीक रहेगा। बस मुकरी परदे पर आ गए। उनको ज्यादा संवाद बोलने की जरूरत नहीं पड़ी। दर्शक उन्हें देखकर ठहाके भरने लगते।
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Mukri Birth Anniversary His roles always memorable Comedian Muhammad Umar Mukri
mukri - फोटो : Social Media

मुकरी को पहली बार मौका मिला दिलीप कुमार के साथ 1945 में आई फिल्म ‘प्रतिमा’ में। इसके बाद मुकरी की किस्मत चल पड़ी। मुकरी की चर्चित फिल्में हैं- परदेस, सजा, मिर्जा गालिब, मदर इंडिया, कालापानी, काली टोपी लाल रूमाल, अनाड़ी, बेवकूफ, अनुराधा, मनमौजी, असली नकली, फूल बने अंगारे, बहुरानी, पूजा के फूल, मेरा साया, दादी मां, सूरज, मिलन, अनीता, राजा और रंक, इज्जत, पिया का घर, अनोखी रात, चिराग, प्रेम पुजारी, पारस, बांबे टू गोवा, लोफर, नया दिन नयी रात, अर्जन पंडित, फकीरा, गंगा की सौगंध, दि बर्निंग ट्रेन, उमराव जान, नसीब, लेडीज टेलर, लावारिस, खुद्दार, गंगा जमुना सरस्वती, राम लखन, दाता आदि। अमर अकबर एंथनी के बाद मुकरी हर घर में जाने जाने लगे।

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