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Eid 2022: हिंदी सिनेमा में अब नहीं दिखती मुस्लिम परिवारों की आम कहानी, वीर-जारा के बाद नहीं बनी कोई फिल्म

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: मोहम्मद फायक अंसारी Updated Tue, 03 May 2022 07:00 AM IST
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Muslim families story no longer seen in Hindi cinema, no film made after Veer-Zaara Eid 2022
बॉलीवुड की फिल्में - फोटो : सोशल मीडिया

हिन्दी सिनेमा का सौ वर्षों से अधिक का इतिहास रहा है, जिसमें एक से बढ़कर एक शानदार फिल्में बनी हैं। इनमें कई ऐसी फिल्में जिसमें मुस्लिम समाज के बारे में शानदार तरीके से बात की गई है। बॉलीवुड में ऐसी बहुत सारी फिल्में बनी हैं, जिनमें मुस्लिम पात्रों को खलनायक के रूप में नहीं बल्कि उनके जीवन के सुख-दुख, संघर्ष और रहन सहन के तरीकों को दिखाया गया है।

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Muslim families story no longer seen in Hindi cinema, no film made after Veer-Zaara Eid 2022
निकाह - फोटो : फाइल
इन फिल्मों में दिखी मुस्लिम समाज की झलक
साल 1973 में आई फिल्म में गर्म हवा में मुस्लिम परिवार के तौर तरीकों को दिखाया गया है। एमएस सथ्यू की यह फिल्म मुस्लिम परिवार के अस्तित्व के संघर्ष के इर्द-गिर्द घूमती है जो बंटवारे के भारत में रहने का फैसला करता है। इस फिल्म में बलराज साहनी ने मुख्य भूमिका निभाई थी। हिंदी सिनेमा में ऐसा पहली बार था जब एक मुस्लिम परिवार को वास्तविक रूप से चित्रित किया गया था। इसके बाद साल 1982 में रिलीज हुई फिल्म निकाह में भी उर्दू जुबान और मुस्लिम माहौल देखने को मिला। यह फिल्म उस समय काफी हिट हुई थी। फिल्म में तीन तलाक जैसे गंभीर विषय को दिखाया गया था। जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया था।
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वीर जारा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वक्त के साथ बदल गया ट्रेंड
मुस्लिम समाज पर दर्जनों फिल्में बनने के बाद बॉलीवुड में धीरे धीरे ऐसी फिल्मों का चलन कम होता चला गया। साल 2004 के बाद ऐसी कोई फिल्में नहीं आईं जिनमें मुस्लिम परिवेश को दिखाया गया हो। फिल्म वीर जारा शाहरुख खान के करियर की सुपरहिट फिल्मों में से एक है। इस फिल्म में जारा का किरदार प्रीति जिंटा ने निभाया था। यशराज प्रोडक्शन की बनी इस फिल्म में भारत-पाकिस्तान के बीच की कहानी दिखाई गई थी। 
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तीस मार खां-सांवरिया - फोटो : सोशल मीडिया
सांवरिया और तीस मार खां ने किया निराश
फिल्म वीर जारा तक तो मामला ठीक रहा लेकिन इसके बाद तो स्थिति और भी बुरी हो गई। फिल्म तीस मार खां और सांवरिया इसके दो उदाहरण हैं। फिल्म तीस मार खां में अक्षय कुमार ने एक मुस्लिम शख्स का किरदार निभाया था। लेकिन यह फिल्म लोगों पर कोई खास छाप नहीं छोड़ सकी थी। यही हाल संजय लीला भंसाली की फिल्म सांवरिया का भी था। फिल्म में सोनम कपूर ने सकीना का किरदार निभाया था। लेकिन निर्देशक ने फिल्म ने मुस्लिम सोशल बिहेवियर को ठीक से फिल्माने में बड़ी चूक कर दी। लव स्टोरी होने के बावजूद फिल्म लोगों को बिलकुल भी पसंद नहीं आई।
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