{"_id":"5ad060b54f1c1bd53d8b4e5a","slug":"national-film-awards-2018-best-hindi-film-rajkumar-rao-newton","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"इन 5 कारणों की वजह से राजकुमार राव की पॉलीटिकल सटायर NEWTON बनी बेस्ट फिल्म, आप भी जानिए","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
इन 5 कारणों की वजह से राजकुमार राव की पॉलीटिकल सटायर NEWTON बनी बेस्ट फिल्म, आप भी जानिए
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Fri, 13 Apr 2018 01:26 PM IST
विज्ञापन
NEWTON
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार कमेटी के चेयरमैन शेखर कपूर ने 65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का ऐलान किया है। फिल्म न्यूटन को बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड दिया गया। इसी फिल्म के लिए पंकज त्रिपाठी को स्पेशल अवॉर्ड दिया गया। महज 8 करोड़ के बजट में बनी फिल्म ‘न्यूटन’ अब तक कई अवॉर्ड जीत चुकी है। आज हम आपको वो 5 कारण बताने जा रहे हैं जिसकी वजह से न्यूटन ये अवॉर्ड जीतने में कामयाब हो पाई।
newton
राजकुमार राव की एक्टिंग
राजकुमार राव ने न्यूटन के किरदार को बखूबी निभाया है। सच कहा जाए तो राव ने न्यूटन के किरदार में अपनी मासूमियत और फेस एक्स्प्रेशन से जान डाल दी है। आत्मा सिंह के रोल में पकंज त्रिपाठी खूब जमे हैं। फिल्म को रियल लोकेशन पर शूट किया गया है जिसकी वजह से फिल्म में वास्तविकता झलकती है।
राजकुमार राव ने न्यूटन के किरदार को बखूबी निभाया है। सच कहा जाए तो राव ने न्यूटन के किरदार में अपनी मासूमियत और फेस एक्स्प्रेशन से जान डाल दी है। आत्मा सिंह के रोल में पकंज त्रिपाठी खूब जमे हैं। फिल्म को रियल लोकेशन पर शूट किया गया है जिसकी वजह से फिल्म में वास्तविकता झलकती है।
Newton
फिल्म के डॉयलॉग्स
‘न्यूटन’ के इन दो डायलॉग फिल्म का खास बनाने की ताकत रखते हैं। 'मां-बाप ने नूतन कुमार नाम रखा था तो सब लोग बहुत मजाक उड़ाते थे तो मैंने टेंथ के फॉर्म में 'नू' का 'न्यू' और 'तन' का 'टन' कर दिया।' 'मेरे से भी पहले बहुत पहले एक न्यूटन था। पढ़ाई करे वक्त उसकी बात कभी समझ नहीं आई पर अब काम करते वक्त आ रही है कि जब तक कुछ नहीं बदलोगे न दोस्त तो कुछ नहीं बदेलगा।' फिल्म के एक सीन में मतदान बूथ को लेकर पंकज त्रिपाठी का किरदार कहता है,'मैं लिख के देता हूं, कोई नहीं आएगा'।
‘न्यूटन’ के इन दो डायलॉग फिल्म का खास बनाने की ताकत रखते हैं। 'मां-बाप ने नूतन कुमार नाम रखा था तो सब लोग बहुत मजाक उड़ाते थे तो मैंने टेंथ के फॉर्म में 'नू' का 'न्यू' और 'तन' का 'टन' कर दिया।' 'मेरे से भी पहले बहुत पहले एक न्यूटन था। पढ़ाई करे वक्त उसकी बात कभी समझ नहीं आई पर अब काम करते वक्त आ रही है कि जब तक कुछ नहीं बदलोगे न दोस्त तो कुछ नहीं बदेलगा।' फिल्म के एक सीन में मतदान बूथ को लेकर पंकज त्रिपाठी का किरदार कहता है,'मैं लिख के देता हूं, कोई नहीं आएगा'।
विज्ञापन
विज्ञापन
न्यूटन फिल्मS
- फोटो : SELF
फिल्म की कहानी दमदार
फिल्म की कहानी शुरू से अंत तक आपको बांधने का दम रखती है। फिल्म कई बार आपको देश की चुनाव प्रणाली, सरकारी अफसरों की सोच और सिक्योरिटी फोर्स के नजरिये के बारे में सोचने पर मजबूर करती है। न्यूटन एक ऐसी फिल्म है जो दर्शकों की एक खास क्लास के लिए है, जिन्हें रियलिटी को स्क्रीन पर देखना पंसद है।
फिल्म की कहानी शुरू से अंत तक आपको बांधने का दम रखती है। फिल्म कई बार आपको देश की चुनाव प्रणाली, सरकारी अफसरों की सोच और सिक्योरिटी फोर्स के नजरिये के बारे में सोचने पर मजबूर करती है। न्यूटन एक ऐसी फिल्म है जो दर्शकों की एक खास क्लास के लिए है, जिन्हें रियलिटी को स्क्रीन पर देखना पंसद है।
विज्ञापन
RAJKUMAR RAO
फिल्म के किरदार अपने आप में खास
राजकुमार राव की एक्टिंग से तो आप बखूबी वाकिफ होंगे लेकिन फिल्म के अन्य किरदारों में भी इतनी ग्रैविटी है कि वह आपको अपनी ओर खींच लेंगे। पंकज त्रिपाठी, रघुवीर यादव और अंजलि पाटिल जैसे किरदार फिल्म को कंप्लीट करने का काम करते हैं।
राजकुमार राव की एक्टिंग से तो आप बखूबी वाकिफ होंगे लेकिन फिल्म के अन्य किरदारों में भी इतनी ग्रैविटी है कि वह आपको अपनी ओर खींच लेंगे। पंकज त्रिपाठी, रघुवीर यादव और अंजलि पाटिल जैसे किरदार फिल्म को कंप्लीट करने का काम करते हैं।