नेटफ्लिक्स पर फिल्मावली का सीजन फिर लौटने वाला है। ‘लस्ट स्टोरीज’, ‘घोस्ट स्टोरीज’ और ‘अजीब दास्तान्स’ के बाद अब उम्मीद की किरण एक नई फिल्म एंथॉलजी यानी फिल्मावली ‘रे’ में दिखनी वाली है। सत्यजीत रे की चार अलग अलग कहानियों का ताना बाना लेकर नए सिरे से बुनी गईं इन चार कहानियों में ओटीटी स्टार बिदिता बाग भी दिखेंगी और ओटीटी के ही चले मनोज बाजपेयी भी। मनोज बाजपेयी और बिदिता बाग के अलावा कुछ और दमदार सितारे भी इस फिल्मावली में अगले महीने के आखिरी शुक्रवार को नजर आएंगे। देसी ओटीटी जी5 की फिल्मावली ‘फॉरबिडेन लव’ की देसी कहानियों के आगे हालांकि नेटफ्लिक्स की ‘घोस्ट स्टोरीज’ और ‘अजीब दास्तान्स’ दोनों बहुत हल्की पड़ी और प्राइम वीडियो की फिल्मावली ‘अनपॉज्ड’ का भी ज्यादा हंगामा नहीं हुआ। लेकिन इस बार नेटफ्लिक्स की तैयारी करण जौहर से आगे जाने की है। वॉयकॉम18 स्टूडियोज की डिजिटल शाखा टिपिंग प्वाइंट के साथ ‘जामताड़ा’, ‘शी’ और ‘ताजमहल 1989’ बना चुके नेटफ्लिक्स ने इसी कंपनी के साथ अब ‘रे’ बनाई है।
Ray: बिदिता बाग और मनोज बाजपेयी संग सजेगी नेटफ्लिक्स की महफिल, सत्यजीत रे की कहानियों के नए तेवर
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‘रे’ की चार कहानियों को एक धागे से बांधा है इसके सृजनकर्ता सायंतन मुखर्जी ने। और, ‘हंगामा है क्यों बरपा’, ‘फॉरगेट मी नॉट’, ‘बहुरूपिया’ और ‘स्पॉटलाइन’ नामक इन कहानियों के निर्देशन का जिम्मा अभिषेक चौबे, सृजित मुखर्जी और वासन बाला ने संभाला है।
मनोज बाजपेयी और बिदिता बाग के अलावा इस फिल्मावली में गजराज राव, के के मेनन, हर्ष वर्धन कपूर, चंदन रॉय सान्याल आदि कलाकार भी अपना दम दिखाते नजर आएंगे। सीरीज की पहली कहानी ‘हंगामा है क्यों बरपा’ एक गजल गायक की कहानी है। उसके अतीत के कुछ राज हैं।
ट्रेन के सफर में उसे पहलवान से पत्रकार बना बेग मिलता है। दोनों बातों में उलझते ही हैं कि गजल गायक को याद आता है कि इस हमसफर से तो वह 10 साल पहले भी मिल चुका है। दूसरी कहानी ‘फॉरगेट मी नॉट’ में कॉरपोरेट का झूठा फुग्गा है। इंसानी अहं का बेमतलब फूला गुब्बारा है और है एक ऐसा किरदार जिसके सामने आते ही कहानी के हीरो की हवा निकल जाती है।
सीरीज की तीसरी कहानी में ही फिल्मावली की असली जान नजर आती है। ‘स्पेशल ऑप्स’ के हीरो के के मेनन और ‘शोले गर्ल’ बिदिता बाग के साथ इस कहानी में दिब्येंदु भी दिखेंगे। कहानी मुखौटों के पीछे पकनी शुरू होती है और ये मुखौटे जिस कलाकार के प्रतिशोध का सहारा बनते हैं, उसी के पतन की कहानी भी साथ में लिख रहे होते हैं। आखिरी कहानी है ‘स्पॉटलाइट’ और जैसा कि नाम से ही जाहिर होता है ये ग्लैमर वर्ल्ड की कहानी है। चकाचौंध रोशनी के पीछे क्या कोई उम्मीद की किरण भी नजर आती है, यही इस फिल्म की कहानी है।
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