'वो हाथ को हल्के से छू देती है। ये हाथ वापस नहीं खींचती। तो वो हाथ और कस के पकड लेती है। उंगलियों से खेलने लगती है।' ये स्क्रीनप्ले है दो औरतों की प्रेम कहानी का। ‘द अदर लव स्टोरी (http://theotherlovestorywebseries।com/) यानि ‘एक दूसरी प्रेम कहानी’। भारत के बेंगलूरू शहर में फिल्माई गई ये कहानी शनिवार को एक वीडियो सीरीज के तौर पर इंटरनेट पर रिलीज की गई। पर भारत में समलैंगिक यौन संबंध अब भी गैरकानूनी हैं। ऐसे में ये फिल्म बनाने के लिए पैसे देने को कोई प्रोड्यूसर तैयार नहीं था।
पर्दे पर दिखेगी दो औरतों की प्रेम कहानी
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दो औरतों की प्रेम कहानी
फिल्म की निर्देशक रूपा राव के मुताबिक कुछ को फिल्म में सेक्स सीन चाहिए थे और कई परेशान थे कि शायद दर्शक इसे पसंद ना करे। रूपा बताती हैं, “आइडिया सबको पसंद आता था, पर कोई कहता था कि फिल्म बैन होने का खतरा है तो एक ने पलटकर कहा कि उनके मां-बाप ने ऐसी फिल्म में पैसे लगाने से मना कर दिया है”। आखिरकार रूपा ने अपने प्रोजेक्ट को एक ‘क्राउडफंडिंग’ वेबसाइट पर डाला। ‘क्राउडफंडिंग’ यानि आम लोगों से पैसे इकट्ठा करने का तरीका।
दो औरतों की प्रेम कहानी
इससे उन्हें पैसे तो मिले पर अपनी सीरीज उन्हें यूट्यूब पर छोटे-छोटे एपिसोड्स के जरिए रिलीज करनी पडी। यानि इससे पैसे वापस कमाने की उम्मीद ना के बराबर है। साल 1998 में भारत में पहली बार किसी समलैंगिक रिश्ते को एक मुख्यधारा की फिल्म में दिखाया गया था। लेकिन इस फिल्म, ‘फायर’ का कई दक्षिणपंथी गुटों ने हिंसक विरोध किया था। उस प्रकरण से समलैंगिकता और अभिव्यक्ति की आजादी पर सार्वजनिक बहस तो छिडी पर 18 साल बाद भी इस मुद्दे पर सिनेमा में खुल कर बात नहीं हो रही।
दो औरतों की प्रेम कहानी
इसी साल समलैंगिकों के प्रति ‘फोबिया’ या डर पर बनी एक और सीरिज आई – ‘ऑल अबाउट सेक्शन 377’। ( https://www।youtube।com/channel/UCFzWoc9pT9E18gscS5ghElg) ये भारत में समलैंगिक यौन संबंधों को गैरकानूनी बताने वाली आईपीसी की धारा 377 और उसके समाज पर असर पर बनी है। पर ये भी प्रोड्यूसर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स की कमी को चलते इंटरनेट पर ही रिलीज हुई। ये ऑडियंस को पसंद आई तो अब एक सीक्वेल तैयार हो रही है और ऐडवर्टाइजर्स ढूंढे जा रहे हैं। ‘एजेंट्स ऑफ इश्क’ नाम की वेबसाइट चलानेवाली पारोमिता वोहरा के मुताबिक इस सबके लिए समाज में जिज्ञासा है पर प्रोड्यूसर्स नए काम में पैसा लगाने का खतरा उठाना नहीं चाहते। इसीलिए अपनी वोबसाइट को वो प्यार, यौन संबंध और रिश्तों पर खुली बातचीत का जरिया बना रही है।
वो कहती हैं, 'रूढिवादी सोच से ज्यादा, पैसा, मार्केट को देखकर लगाया जाता है, प्रोड्यूसर्स ज्यादातर वहीं पैसा लगाना चाहते हैं जहां उन्हें मुनाफे और तय ऑडियंस की उम्मीद है, वो पका-पकाया खाना चाहते हैं नई रेसिपी से घबराते हैं।' भारत में समलैंगिक यौन संबंध गैर-कानूनी होने के बावजूद, ये समुदाय अपनी आवाज बुलंद कर रहा है। बदलती तकनीक इनकी कहानियां कहने के नए रास्ते तो निकाल रही है पर नजरिया बदलने पर ही ये रास्ते आर्थिक रूप से व्यावहारिक बन पाएंगे।