फिल्म 'पद्मावती' का विवाद बढ़ते-बढ़ते अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। अखंड राष्ट्रवादी पार्टी ने पद्मावती के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई जाए क्योंकि फिल्म में रानी पद्मिनी की छवि को खराब करने की कोशिश हुई है। साथ ही याचिका में सेंसर बोर्ड को कमेटी बनाकर आपत्तिजनक सीन हटाने का आग्रह किया है।
'पद्मावती विवाद': रिलीज पर रोक के लिए HC में दायर हुई याचिका, 20 दिसंबर को होगी सुनवाई
याचिका में ये भी कहा गया है कि जब दिल्ली के शासक अलाउद्दीन खिजली की गलत नजर रानी पद्मिनी पर पड़ी थी तो उन्होंने 16000 अन्य महिलाओं के साथ जौहर कर लिया था। उनका चरित्र महान था और वह आज भी हमारी आन-बान-शान हैं। फिल्म में इतिहास की मनगढ़ंत कहानी बनाई गई है।
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इस याचिका पर हाईकोर्ट सोमवार को सुनवाई कर सकता है। जबकि इससे पहले हाईकोर्ट 'पद्मावती' के मामले में हस्ताक्षेप करने से मना कर चुका है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी 'पद्मावती' पर एक तीखा बयान दिया है।
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उन्होंने डायरेक्टर संजय लीला भंसाली पर राजपूत समुदाय की भावनाओं की परवाह न करने का आरोप लगया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'यदि हम पद्मावती के आदर के बारे में बात कर रहे हैं तो यह हमारा नैतिक दायित्व है कि हर महिला का आदर करें। फिल्म 'पद्मावती' की अभिनेत्री या अभिनेता का अनादर अनैतिक है।'
केंद्रीय मंत्री ने अपने अगले ट्वीट में कहा, 'निर्देशक और पटकथा लेखक के तौर पर काम कर रहे उनके सहयोगी इसकी कहानी के प्रति जिम्मेदार हैं। उनको लोगों की भावनाओं और ऐतिहासिक तथ्यों का ख्याल रखना चाहिए। सेंसर बोर्ड एक स्वतंत्र संस्था है। हमें उम्मीद है कि फिल्म को लोगों की भावनाओं पर विचार करते हुए मंजूरी दी जाएगी।'
