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Pandit Ravi Shankar Birthday: शुरुआत से लेकर अंत तक, ये सात महिलाएं ऐसे बनीं पंडित रवि शंकर के जीवन की सात सरगम

एंटरनेटमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: हर्षिता सक्सेना Updated Thu, 07 Apr 2022 09:58 AM IST
सार

शास्त्रीय संगीत की बात की जाए और सितार वादक पंडित रवि शंकर का जिक्र न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। पंडित रविशंकर भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनके सितारों के सुरों से आज भी आनंद की अनुभूति की जा सकती है।

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Pandit Ravi Shankar Birthday: From the beginning of life to the end these women plays important role in ravishankar’s life
पंडित रवि शंकर - फोटो : सोशल मीडिया

शास्त्रीय संगीत की बात की जाए और सितार वादक पंडित रवि शंकर का जिक्र न किया जाए ऐसा हो ही नहीं सकता। पंडित रविशंकर भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनके सितारों के सुरों से आज भी आनंद की अनुभूति की जा सकती है। साल 1920 में आज ही के दिन बनारस में जन्मे रविशंकर 7 भाइयों में सबसे छोटे थे। शुरुआत में डांस की तरफ झुकाव रखने वाले पंडित रविशंकर ने 18 साल की उम्र में सितार सीखना शुरू किया और देश- विदेश में अपनी एक अमिट पहचान बना ली। 

अपनी लय, सुर और सरगम के लिए मशहूर पंडित रविशंकर के जीवन में यूं तो कई लोगों की अपनी अलग अहमियत रही, लेकिन उनके जीवन में सात महिलाएं ऐसी थीं जो उनके लिए सात सरगम के बराबर थीं। आज पंडित रविशंकर के जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनके जीवन की इन सात सरगम रूपी महिलाओं के बारे में-

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Pandit Ravi Shankar Birthday: From the beginning of life to the end these women plays important role in ravishankar’s life
पंडित रविशंकर की पुण्यतिथि - फोटो : Twitter

हेमांगिनी देवी (मां)
हर व्यक्ति के जीवन में मां एक अहम भूमिका निभाती हैं। पंडित रविशंकर के जीवन में भी उनकी मां ने एक विशेष भूमिका निभाई थी। उनके जीवन में पहली सरगम बनीं रविशंकर की मां हेमांगिनी देवी। रविशंकर के पिता श्याम शंकर झालवाड़ राज्य के दीवान थे और उनकी मां हेमांगिनी देवी एक गृहिणी थीं। कुछ समय बाद दीवान श्याम शंकर लंदन जाकर वकालत करने लगे और वहीं दूसरी शादी भी कर ली। इसके बाद रविशंकर की मां ने ही उनकी परवरिश की। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि रविशंकर को उनके जीवन में सभी संस्कार अपनी मां से ही मिले। 



 
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अन्नपूर्णा देवी के साथ रविशंकर - फोटो : सोशल मीडिया

अन्नपूर्णा देवी (पहली पत्नी) 

सितार सीखने के लिए पंडितजी उस्ताद अलाउद्दीन खां से मैहर गए। बस फिर क्या था सितार और पं. रविशंकर एक-दूसरे के पर्याय बन गए। इसके बाद उनके जीवन में प्रवेश हुआ दूसरी सरगम बनकर आईं उनकी पहली पत्नी अन्नपूर्णा देवी का। पंडितजी ने अपने गुरु की बेटी अन्नपूर्णा देवी से साल 1941 में शादी की। इस शादी से दोनों का एक बेटा भी हुआ, जो अब इस दुनिया में नहीं है। करीब 20 साल साथ रहने के बाद वे अन्नपूर्णा से अलग हो गए।

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pt ravi shankar - फोटो : social media

कमला देवी (पहली प्रेमिका)

अपनी पहली पत्नी के अलग हुए रविशंकर के जीवन की तीसरी सरगम बनीं क्लासिकल डांसर कमला देवी। नृत्यांगना कमला देवी के संपर्क में आए रविशंकर कई समय तक उनके साथ लिव-इन-रिलेशन में रहे। हालांकि, बाद में कमला देवी के साथ उनके सारे संबंध टूट गए।

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pt ravi shankar - फोटो : social media

सू जोन्स (दूसरी प्रेमिका)

कमला देवी के बाद रविशंकर के जीवन की चौथी सरगम बनीं सू जोन्स। पंडितजी कमला देवी से अलग होने के बाद न्यूयॉर्क की कॉन्सर्ट प्रोड्यूसर सू जोन्स के संपर्क में आए। लिव-इन-रिलेशन में रहने के दौरान सू ने 1979 में एक बेटी नोराह जोन्स को जन्म दिया। उनकी बेटी नोराह भी गायिका और सितार वादक हैं। 

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