{"_id":"5cde3258bdec220710357e03","slug":"pankaj-udhas-birthday-know-about-his-unknown-facts","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"हर शो से पहले हनुमान चालीसा पढ़ते हैं पंकज उधास, जानें गजल सम्राट की जिंदगी से जुड़े रोचक तथ्य","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
हर शो से पहले हनुमान चालीसा पढ़ते हैं पंकज उधास, जानें गजल सम्राट की जिंदगी से जुड़े रोचक तथ्य
Fri, 17 May 2019 01:06 PM IST
भावना शर्मा
एंटरटेनमेंट डेस्क, मुंबई
एंटरटेनमेंट डेस्क, मुंबई
Published by: भावना शर्मा
Updated Fri, 17 May 2019 01:06 PM IST
विज्ञापन
pankaj udhas
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गज़ल गायिकी की दुनिया में एक अलग चमक बिखेर चुके पंकज उधास का जन्म 17 मई 1951 को गुजरात के जेतपुर में हुआ। तलत अजीज और जगजीत सिंह जैसे मशहूर गायकों के साथ मिलकर पंकज ने संगीत की इस विधा 'गजल' को एक नया आयाम दिया है। हिंदी सिनेमा में पंकज उधास की गजलें किसी जादू से कम नहीं हैं। बेचैनी या तनाव में पंकज के सदाबहार नग़मे हमेशा ही दिल को सुकून देते रहे है। आइए जानते हैं उनके बारे में 10 रोचक जानकारियां...
pankaj udhas
- फोटो : अमर उजाला
पहला इनाम
पंकज उधास को मिलने वाला पहला इनाम 51 रुपए का था। जी हां, दरअसल पंकज के बड़े भाई मनहर मशहूर पार्श्व गायक बन चुके थे। इन्हीं की वजह से पंकज की संगीत में रुचि बढ़ी। भारत-चीन युद्ध के समय पंकज के बड़े भाई मनहर उधास का एक स्टेज शो चल रहा था। इस दौरान पंकज ने रंगमंच पर 'ए मेरे वतन के लोगों' गाया। इस गाने पर खुश होकर एक दर्शक ने पंकज को 51 रुपये इनाम दिया।
पंकज उधास को मिलने वाला पहला इनाम 51 रुपए का था। जी हां, दरअसल पंकज के बड़े भाई मनहर मशहूर पार्श्व गायक बन चुके थे। इन्हीं की वजह से पंकज की संगीत में रुचि बढ़ी। भारत-चीन युद्ध के समय पंकज के बड़े भाई मनहर उधास का एक स्टेज शो चल रहा था। इस दौरान पंकज ने रंगमंच पर 'ए मेरे वतन के लोगों' गाया। इस गाने पर खुश होकर एक दर्शक ने पंकज को 51 रुपये इनाम दिया।
pankaj udhas
विज्ञान से स्नातक
राजकोट की संगीत नाट्य अकादमी से चार साल तबला बजाने की बारीकियां सीखने के बाद पंकज ने मुम्बई के विल्सन कॉलेज से विज्ञान विषय में स्नातक की डिग्री ली। इसके साथ ही पंकज मास्टर नवरंग से शास्त्रीय संगीत गायिकी की बारीकियां सीखते रहे।
राजकोट की संगीत नाट्य अकादमी से चार साल तबला बजाने की बारीकियां सीखने के बाद पंकज ने मुम्बई के विल्सन कॉलेज से विज्ञान विषय में स्नातक की डिग्री ली। इसके साथ ही पंकज मास्टर नवरंग से शास्त्रीय संगीत गायिकी की बारीकियां सीखते रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
pankaj udhas
बार में भी काम किया
जमींदार घराने से ताल्लुक रखने वाले पंकज के परिवार का शुरू में संगीत की दुनिया से कोई लेना देना नही था। हां, कभी कभार उनकी मां शादी विवाह में गाना गाया करती थीं। कॉलेज में स्नातक डिग्री लेने के बाद पंकज एक बार में काम करने लग गए। इसके साथ वह समय निकालकर संगीत गायिकी का अभ्यास भी करते रहे। मजे की बात यह है कि पंकज के दोनों भाई निर्मल और मनहर भी संगीत की दुनिया से जुड़े। मनहर एक जाने-माने पार्श्व गायक रहे और निर्मल भी एक प्रसिद्ध गजल गायक हैं ।
जमींदार घराने से ताल्लुक रखने वाले पंकज के परिवार का शुरू में संगीत की दुनिया से कोई लेना देना नही था। हां, कभी कभार उनकी मां शादी विवाह में गाना गाया करती थीं। कॉलेज में स्नातक डिग्री लेने के बाद पंकज एक बार में काम करने लग गए। इसके साथ वह समय निकालकर संगीत गायिकी का अभ्यास भी करते रहे। मजे की बात यह है कि पंकज के दोनों भाई निर्मल और मनहर भी संगीत की दुनिया से जुड़े। मनहर एक जाने-माने पार्श्व गायक रहे और निर्मल भी एक प्रसिद्ध गजल गायक हैं ।
विज्ञापन
pankaj udhas
सिनेमा में पहला मौका
हिंदी सिनेमा में पंकज को पहला मौका मिला 1972 में आई फिल्म कामना से। इस बारे में पंकज बताते हैं कि कामना में काम कर रहे सभी कलाकार नए थे तो फिल्म के निर्देशक को एक नई आवाज की तलाश थी। इस फिल्म की संगीतकार ऊषा खन्ना के सुझाव पर पंकज को इस फिल्म में गाने का मौका दिया गया। यह फिल्म तो फ्लॉप रही लेकिन पंकज के गाने की काफी प्रशंसा हुई।
हिंदी सिनेमा में पंकज को पहला मौका मिला 1972 में आई फिल्म कामना से। इस बारे में पंकज बताते हैं कि कामना में काम कर रहे सभी कलाकार नए थे तो फिल्म के निर्देशक को एक नई आवाज की तलाश थी। इस फिल्म की संगीतकार ऊषा खन्ना के सुझाव पर पंकज को इस फिल्म में गाने का मौका दिया गया। यह फिल्म तो फ्लॉप रही लेकिन पंकज के गाने की काफी प्रशंसा हुई।