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Pankaj udhas Birthday: गायिकी के लिए पहले इनाम से लेकर एयरहोस्टेस से शादी तक, पढ़िए पंकज उधास के दिलचस्प किस्से

Sun, 17 May 2020 11:48 AM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: अपूर्वा राय Updated Sun, 17 May 2020 11:48 AM IST
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Pankaj udhas Birthday Special: Here Are Some Intresting Facts About Gazal Singer
पंकज उधास बर्थडे - फोटो : अमर उजाला

गजल गायिकी से दुनियाभर में मशहूर हुए गायक पंकज उधास का आज जन्मदिन है। पंकज उधास का जन्म 17 मई 1951 को गुजरात के जेतपुर में हुआ। राजकोट की संगीत नाट्य अकादमी से चार साल तबला बजाने की बारीकियां सीखने के बाद पंकज ने मुंबई के विल्सन कॉलेज से विज्ञान विषय में स्नातक की डिग्री ली। हिंदी सिनेमा में पंकज उधास की गजलें किसी जादू से कम नहीं हैं। बेचैनी या तनाव में पंकज के सदाबहार नगमे हमेशा ही दिल को सुकून देते रहे है। चलिए इस महान गायक के जन्मदिन पर आपको बताते हैं उनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें।

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पंकज उधास - फोटो : सोशल मीडिया

पंकज उधास को उनकी गायिकी के लिए मिलने वाला पहला इनाम 51 रुपये का था। दरअसल पंकज के बड़े भाई मनहर मशहूर पार्श्व गायक बन चुके थे। उनकी वजह से पंकज की संगीत में रुचि बढ़ी। भारत-चीन युद्ध के समय पंकज के बड़े भाई मनहर उधास का एक स्टेज शो चल रहा था। इस दौरान पंकज ने रंगमंच पर 'ए मेरे वतन के लोगों' गाया। इस गाने पर खुश होकर एक दर्शक ने पंकज को 51 रुपये इनाम दिया।

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पंकज उधास - फोटो : इंस्टाग्राम

हिंदी सिनेमा के लिए पंकज उधास ने पहली बार गाया गाया 1972 में आई फिल्म कामना के लिए। इस बारे में पंकज बताते हैं कि कामना में काम कर रहे सभी कलाकार नए थे तो फिल्म के निर्देशक को एक नई आवाज की तलाश थी। इस फिल्म की संगीतकार ऊषा खन्ना के सुझाव पर पंकज को इस फिल्म में गाने का मौका दिया गया। यह फिल्म तो फ्लॉप रही लेकिन पंकज के गाने की काफी प्रशंसा हुई।

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पंकज उधास - फोटो : इंस्टाग्राम

हिंदी सिनेमा में कुछ खास सफलता न मिलने पर पंकज कनाडा चले गए। कनाडा और अमेरिका में उन्होंने छोटे-मोटे स्टेज शो किए। करीब 10 महीने विदेश में बिताने के बाद पंकज फिर से देश लौट आए। विदेश से लौटने के बाद वर्ष 1980 में पंकज ने अपनी पहली गजल एल्बम 'आहट' रिलीज की। यहां से पंकज की सफलता का दौर शुरू हो गया। इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक हिट्स दिए। 'घूंघट को मत खोल कि गोरी घूंघट है अनमोल..', 'चुपके-चुपके रात दिन..', 'कुछ न कहो कुछ भी न कहो..जैसी कई गजलें आज भी सुनी जाती हैं।

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पंकज उधास को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। उन्हें यह पुरस्कार संगीत और कला के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान देने के लिए दिया गया। इसके अलावा पंकज को दादाभाई नौरोजी मिलेनियम, रेडियो लोटस, इंदिरा गांधी प्रियदर्शी और के.एल.सहगल बेस्ट गजल गायिकी जैसे कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। पंकज उधास की प्रेमकहानी भी फिल्मों की कहानी जैसी है। ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान ही पंकज फरीदा नाम की लड़की को दिल दे बैठे।

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