शानदार अभिनेता हैं पवन मल्होत्रा। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने वाली फिल्मों बुद्धदेब दास गुप्ता की ‘बाघ बहादुर’ और सईद मिर्जा की ‘सलीम लंगड़े पे मत रो’ के हीरो रहे हैं। थिएटर का वह जाना पहचान नाम हैं। दोस्तों के बुलावे पर एक बार जो मुंबई आए तो फिर यहीं के होकर रह गए। घर चलाने के लिए पवन ने कभी किसी काम से परहेज नहीं किया। जो भी काम मिला, पूजा समझ कर करते गए। दिल्ली में जन्मे पवन शनिवार को 64 साल के हो गए। जन्मदिन की पूर्व संध्या पर उन्होंने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत की। आइए जानते हैं, उनके अब तक के सफर के बारे में...
Pavan Malhotra B’day: ड्रेसमैन बनकर की सिनेमा में शुरुआत, फिर मिला नसीरुद्दीन शाह के लिए लिखा रोल और...
ड्रेसमैन से हुई शुरुआत
ये उन दिनों की बात है जब पवन मल्होत्रा दिल्ली में थिएटर कर रहे थे। पवन बताते हैं, 'दिल्ली के कुछ मेरे दोस्त मुंबई में रह रहे थे। मुझे बार बार बोल रहे थे कि मुंबई आकर फिल्मों के लिए कोशिश करो। मुझे लगता था कि फिल्मों में मुझे कोई क्यों काम देगा। जब मुंबई आया तो कुंदन शाह एक फिल्म 'जाने दे भी यारो' बना रहे थे। उन दिनों कुंदन शाह और विनोद चोपड़ा का एक ग्रुप हुआ करता था, सब एक दूसरे की शूटिंग में मदद करते रहते थे। ‘जाने भी दो यारों’ में विनोद चोपड़ा लाइन प्रोडूसर हो गए। मैं इससे पहले दिल्ली में 'गांधी' फिल्म में ड्रेसमैन का काम कर चुका था। इस फिल्म में मैं प्रोडक्शन सहायक बन गया। इसके बाद सईद मिर्जा की फिल्म 'मोहन जोशी हाजिर हो' और विधु विनोद चोपड़ा की 'खामोश' में भी प्रोडक्शन मैनेजर रहा। इससे पहले कुंदन शाह के धरावाहिक 'ये जो है जिंदगी' में सहायक निर्देशक भी रहा।
‘नुक्कड़’ धारावाहिक में मिला पहला ब्रेक
उन दिनों ‘नुक्कड़’ सीरियल की खूब चर्चा थी। इस धारावाहिक में पवन मल्होत्रा ने हरी मौर्या का किरदार निभाया था जो साइकिल रिपेयरिंग की दुकान चलाता है। पवन मल्होत्रा अपने पहले ब्रेक के बारे में बताते हैं, 'यह किरदार पहले कोई दूसरा एक्टर निभा रहा था जो रोल अच्छा न होने की वजह से शो को छोड़कर चला गया। इसी बीच शो का प्रोडक्शन देखने वाले का एक्सीडेंट हो गया तो मुझे प्रोडक्शन के लिए बुलाया गया। लेकिन कुंदन शाह और सईद मिर्जा मुझे वह रोल दे दिया। उसके बाद 'सर्कस' के दसवें एपिसोड में भी मेरी एंट्री हुई।’
जब मिला नसीर वाला रोल
साल 1989 अभिनेता पवन मल्होत्रा के लिए बहुत खास रहा। इस साल उनकी दो फिल्में सईद मिर्जा की 'सलीम लंगड़े पे मत रो' और बुद्धदेब दासगुप्ता की 'बाघ बहादुर' रिलीज हुईं। इन फिल्मों में पवन मल्होत्रा के काम की खूब तारीफ हुई। दोनों फिल्मों को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिले। पवन मल्होत्रा बताते हैं, 'फिल्म ‘सलीम लंगड़े पे मत रो' की कहानी नसीरुद्दीन शाह को ध्यान में रखकर लिखी गई थी, लेकिन यह फिल्म उनके साथ नहीं बन पाई तो मुझे उनके लिए रचा गया किरदार मिल गया।’
जान पहचान का मतलब दोस्ती नहीं
कम लोगों को ही पता होगा कि अभिनेता पवन मल्होत्रा और सुपरस्टार शाहरुख खान दिल्ली में एक ही मोहल्ले राजेंद्र नगर के हैं। दोनों ने धारावाहिक ‘सर्कस’ साथ काम किया। फिर ‘परदेस’ और ‘डॉन’ फिल्मों भी पवन को शाहरुख के साथ काम करने का मौका मिला। पवन मल्होत्रा कहते हैं, 'शाहरुख खान से दिल्ली में कभी मुलाकात नहीं हुई, उनसे पहली मुलाकात ‘सर्कस’ की शूटिंग के दौरान मुंबई में ही हुई है। बाद में उनके साथ 'परदेस' और 'डॉन' में काम किया है। हमारी उनसे सिर्फ जान पहचान है। एक ही मोहल्ले के होने और साथ काम करने का मतलब यहां ये नहीं होता कि हम दोस्त बन गए।’