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स्वीट और सिंपल नहीं रह गईं थी आनंदी!

Sun, 03 Apr 2016 08:16 PM IST
रवि बुले/अमर उजाला, मुंबई
रवि बुले/अमर उजाला, मुंबई Updated Sun, 03 Apr 2016 08:16 PM IST
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Pratyusha Banerjee's behavior has so changed before commit suicide

प्रत्यूषा बनर्जी की आत्महत्या के बाद मनोचिकित्सक भी मैदान में हैं, जो बता रहे हैं कि ‘स्मॉल टाउन’ कलाकारों के लिए ग्लैमर इंडस्ट्री अग्निपरीक्षा जैसी है। एक तो सफलता के रास्ते में कई कांटे बिछे होते हैं और दूसरे कामयाबी मिल जाए तो उसे संभाल पाने में ये कलाकार अक्सर नाकाम रहते हैं। क्या प्रत्यूषा की कहानी भी ऐसी है?



सीरियल बालिका वधू की आनंदी के रूप में प्रत्यूषा बनर्जी ने जब सबका दिल जीता था तो वह मासूम, सीधी-सरल लड़की थीं। केवल 18 साल की उम्र में उन्हें यह कामयाबी मिली थी। 2010 में वह जमशेदपुर (झारखंड) से मुंबई पहुंची थीं। प्रत्यूषा की सफलता परी कथा जैसी लगती है, जिसमें एक लड़की को वह सब मिलता है, जो वह सोचती है।

जमशेदपुर में प्रत्यूषा कथक सीख रही थीं। उन्हें रंगमंच से प्यार था। वह गीत-संगीत की शिक्षा ले रही थीं। एक दिन मंच पर मोहन राकेश के प्रसिद्ध नाटक आषाढ़ का एक दिन में काम करते हुए प्रत्यूषा को जब तारीफें मिली तो उन्हें लगा कि काश मुझे बालिका वधू में आनंदी बनने का मौका मिल जाए! टीवी पर उन दिनों इस सीरियल की धूम थी और प्रत्यूषा सोचती थीं कि उनके अंदर भी एक आनंदी है।

इसे रॉन्डा बर्न की बेस्ट सेलर किताब रहस्य में लिखे इस तथ्य की सच्चाई समझिए कि हम जो भी दिल से चाहते हैं वह हमारे पास खिंचा चला आ जाता है या फिल्म ओम शांति ओम में शाहरुख खान के डायलॉग की हकीकत कि, ‘अगर किसी चीज को दिल से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है।’ प्रत्यूषा के साथ यही हुआ। जब सीरीयल में बड़ी आनंदी के लिए देश भर में टैलेंट हंट हुआ तो प्रत्यूषा को उस रोल के लिए चुन लिया गया।

शोहरत को संभलाना आसान नहीं होता

Pratyusha Banerjee's behavior has so changed before commit suicide

रातोंरात मिली शोहरत को संभलाना आसान नहीं होता। प्रत्यूषा के साथ भी संभवतः यही हुआ। जानकार बताते हैं कि दो महीने बाद ही उनमें बदलाव दिखने लगा। सीरीयल के प्रोडक्शन से जुड़े लोग कई बातें नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताते हैं।

लोकप्रिय होते ही प्रत्यूषा जल्द से जल्द खूब धन कमाने की दौड़ में लग गई। शो रूम के रिबन काटने से लेकर शादियों में डांस करने तक को उन्होंने ऐक्टिंग से ज्यादा तवज्जो देनी शुरू की । सूत्र बताते हैं कि इन कामों के लिए उन्हें कुछ ही घंटों में दो से पांच लाख रुपये मिलते थे। जो ऐक्टिंग फीस के मुकाबले आसानी से आते थे।

इन कामों के लिए वह अन्य शहरों में जाने लगीं और शूटिंग में रुकावट आने लगी। प्रोड्यूसरों और चैनल ने उन्हें चेतावनी दी लेकिन इसका असर नहीं हुआ। लोकप्रिय प्रत्यूषा को एकदम भी नहीं हटाया जा सकता था। 2012 के अंत तक प्रत्यूषा और निर्माताओं/चैनल के बीच तनाव बढ़ गया और बालिका वधू की नायिका बदल गई। प्रत्यूषा समझ नहीं सकीं कि उन्हें कार्यक्रमों में ‘आनंदी’ होने की वजह से बुलाया जाता है।

लगातार बदलते रहे प्रत्युषा के दोस्त

Pratyusha Banerjee's behavior has so changed before commit suicide

एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में ऐक्टर घंटों घर से दूर अकेले रहते हैं। ऐसे में वह किसी के करीब आ ही जाते हैं। मुंबई में साल भर के भीतर प्रत्यूषा की जिंदगी में मकरंद मल्होत्रा नाम का युवक आया। मकरंद व्यवयासी हैं और टीवी सीरियलों के सैट का बिजनेस करते हैं। मकरंद के साथ दिसंबर 2011 में हुई दोस्ती जून 2012 में खत्म हो गई।

फिर बालिका वधू में सह-अभिनेता शशांक व्यास से प्रत्यूषा का रोमांस शुरू हुआ। सूत्र बताते हैं कि यह रोमांस परवान चढ़ा और दोनों की नजदीकियों से शूटिंग बाधित होने लगी। प्रत्यूषा सीरियल से बाहर हुईं तो मकरंद ने सहारा दिया, मगर जब बिग बॉस (2013) का ऑफर इस अभिनेत्री को मिला तो वह मिथुन चक्रवर्ती के बेटे महाअक्षय के साथ डेटिंग के लिए चर्चा में आईं।

तब मकरंद ने प्रत्यूषा से बात की तो दोनों में झगड़ा हुआ। बात इतनी बढ़ी कि उन्होंने मकरंद के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। 2014 में राहुल राज सिंह से प्रत्यूषा की पहचान हुई। वह भी प्रत्यूषा के राज्य झारखंड से थे। अतः नजदीकियां बढ़ने में ज्यादा वक्त नहीं लगा।

मीडिया में यह बात भी आई है कि डेढ़ साल पहले प्रत्यूषा के गृहराज्य से ही एक व्यक्ति एक न्यूज चैनल के पास इस अभिनेत्री से अपने विवाह की तस्वीरें लेकर पहुंच गया था। तब प्रत्यूषा ने फोन पर अनुरोध करके वह खबर रुकवाई थी।

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नशे की लत का शिकार हो गईं थी प्रत्युषा

Pratyusha Banerjee's behavior has so changed before commit suicide

प्रत्यूषा के दोस्त मानते हैं कि राहुल का साथ मिलने के बाद उनमें काफी नकारात्मक बदलाव आए। प्रत्यूषा ने करिअर पर ध्यान देना कम कर दिया। राहुल के साथ रहते हुए उनकी नशे की लत बढ़ गई। दोनों साथ नशा करते थे। इसका प्रमाण भी मिला जब पुलिस ने शनिवार को उनके फ्लैट की छानबीन की। पुलिस को फ्लैट में दो कार्टन (बक्से) बीयर के मिले। जिनमें से एक खाली था और दूसरे में बीयर के कुछ केन थे। अल्कोहल की बोतलें भी वहां थी।

पुलिस को बेडरूम में दो पैकेट मिले, जिनमें गांजा होने का संदेह है। इन्हें जांच के लिए भेजा गया है। फ्लैट में पुलिस को सिगरेटों के 150 बचे हुए टुकड़े भी मिले। राहुल ने भी अपने बयान में पुलिस से कहा है कि शुक्रवार सुबह (जब प्रत्यूषा ने आत्महत्या की) उनके बीच झगड़ा हुआ था और तब वह शराब पीने लगी थीं।

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सफलता के बाद नहीं रह गईं थी स्वीट और सिंपल

Pratyusha Banerjee's behavior has so changed before commit suicide

प्रत्यूषा के कई दोस्त स्वीकार करते हैं कि सफलता ने उन्हें बदल दिया था। वह स्वीट और सिंपल नहीं रह गई थीं। कई बार वह किसी को अपने आगे कुछ नहीं समझती थीं। बात-बात पर गुस्सा और तुनक मिजाजी प्रत्यूषा के स्वभाव का हिस्सा बन गया था। यह बात बालिका वधू के सैट पर भी कई लोगों की परेशानी का सबब थी।

राहुल के साथ उनके झगड़ों की एक वजह यह भी थी और इसका सबसे बुरा पक्ष यह था राहुल उन्हें कई बार पीट भी देता था। राहुल ने यह भी कहा है कि प्रत्यूषा अक्सर उसे नीचा दिखाने वाली बातें करती थीं। स्वभाव बिगड़ने के साथ कई बातें प्रत्यूषा के हाथ से निकल गई थीं और उनकी जिंदगी में नई-नई मुश्किलें आने लगी थीं। जिनमें आर्थिक समस्याएं भी थीं।

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