हिंदी सिनेमा के ‘मुगल ए आजम’ कहलाए पृथ्वीराज कपूर, जानें दिलचस्प बातें
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थियेटर में काम करने को लेकर वह लाहौर आए लेकिन किसी नाटक मंडली ने उन्हें काम नहीं दिया। इसकी वजह थी कि वे बहुत ज्यादा पढ़े लिखे थे। सितंबर, 1929 को वे काम की तलाश में बंबई (मुंबई) आ गए और इंपीरियल फिल्म कंपनी में बिना वेतन के एक्स्ट्रा कलाकार बन गए लेकिन पृथ्वीराज कपूर को तो बहुत आगे तक जाना था।
1931 में भारत की पहली बोलती फिल्म आलमआरा में पृथ्वीराज कपूर ने महज 24 साल की उम्र मे जवानी से लेकर बुढ़ापे तक की भूमिका निभाई। 1941 में उन्होंने सोहराब मोदी की फिल्म 'सिकंदर' में सिकंदर की भूमिका निभाई। 1960 में मुगल ए आजम में अकबर का किरदार निभाकर उन्होंने सबके सामने अभिनय की मिसाल पेश की।
पृथ्वीराज कपूर ने हिंदी सिनेमा को राज कपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर सहित अनेक सितारे दिए। आगे चलकर रणधीर कपूर, ऋषि कपूर, करिश्मा कपूर, करीना कपूर और रणबीर कपूर ने अभिनय की इस विरासत को आगे बढ़ाया। कपूर खानदान की गिनती बॉलीवुड के प्रतिष्ठित खानदान में होती है।
राज कपूर ने पिता का नाम इस कदर आगे बढ़ाया कि फिल्मी दुनिया में पृथ्वीराज कपूर को राज कपूर के पिता के तौर पर पुकारा जाने लगा। हालांकि यह राज कपूर ही थे जिन्हें नहीं लगता था कि वह अपने पिता से बेहतर हो पाए। वे अपने पिता का इतना आदर करते थे कि उनके सामने कभी सिगरेट और शराब नहीं पीते थे।
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