हिंदी सिनेमा की दुनिया दिनोंदिन दिलचस्प होती जा रही है। जैसे जैसे मसाला फिल्में बॉक्स ऑफिस पर ढेर हो रही हैं, निर्माताओं के बीच अच्छे लेखकों की तलाश बढ़ने लगी है। और, अच्छे कलाकारों को मुंबई में तलाश रहती है एक ऐसे अड्डे की जहां बैठकर वह दूसरे विचारशील लोगों से बातें कर सकें, उनसे कुछ सीख सकें या फिर अपने हुनर के बारे में दूसरों को बता सकें। कंगना रनौत, शिल्पा शेट्टी, मौनी रॉय और सनी लियोन के रेस्तरां कारोबार के बारे में आपने खूब पढ़ा होगा, लेकिन क्या आप किसी ऐसे रेस्तरां के बारे में जानते हैं, जहां पेट पूजा के साथ साथ सरस्वती पूजा भी होती हो? जी हां, मुंबई में एक ऐसे ही रेस्तरां की इन दिनों खूब चर्चा है जहां तकरीबन हर सप्ताहांत कोई न कोई ऐसा आयोजन होता दिखता है जिसमें ग्लैमर के साथ साथ ज्ञान का तड़का भी होता है।
Hitchens: कंगना, शिल्पा, मौनी से दो कदम आगे अपर्णा सूद, रेस्तरां को मिला बौद्धिक मेलजोल का ये अनोखा अवतार
Hitchens: अपर्णा सूद ने अपने रेस्तरां में बौद्धिक मेलजोल का अनोखा अवतार पेश किया है, जो कंगना, शिल्पा और मौनी से भी एक कदम आगे है।
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कंगना रनौत ने जब से मनाली में अपना नया रेस्तरां ‘द माउंटेन स्टोरी’ खोला है और इसे हिमाचल प्रदेश की स्थानीय कला और स्वाद को समर्पित किया है, तब से लोगों का ध्यान इन डिजाइनर रेस्तरां की तरफ खूब जाने लगा है। ऐसा ही एक रेस्तरां इस बार हमें दिखा खार की उस इमारत में जो कभी फिल्म निर्माता वाशू भगनानी की रिहाइश हुआ करती थी। नाम, हिचेन्स कॉकटेल्स एंड आइडियाज। कॉकटेल के साथ आइडिया जुड़ा होने से ही ये रेस्तरां इन दिनों मुंबई की जेन जी के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और ऐसा इसलिए भी क्योंकि यहां स्टैंड अप कॉमेडी शोज से लेकर नई किताबों के लॉन्च, कॉरपोरेट ब्रेन स्टॉर्मिंग और फिल्म निर्माण कंपनियों के बौद्धिक तक होने लगे हैं।
रेस्तरां के बारे में पहले पहल जानकारी धर्मा प्रोडक्शंस में काम करने वाले एक ऐसे उच्च अधिकारी से हासिल हुई, जिन्होंने इस रेस्तरां को रचनात्मक कार्यों पर चर्चा के लिए सबसे उपयुक्त बताया। धर्मा की टीम ने हाल ही में यहां अपना एक मिलन समारोह इसी उद्देश्य से आयोजित किया था। खार पश्चिम में लिंक रोड के करीब स्थित हिचेन्स कॉकटेल्स एंड आइडियाज तक पहुंचने में खास दिक्कत इसलिए भी नहीं हुई क्योंकि गूगल मैप ने इसकी गिनती मुंबई के चोटी के 10 रेस्तरां में कर रखी है। यहां पहुंचकर पता चला कि ये रेस्तरां मशहूर लेखक क्रिस्टोफर हिचेन्स के नाम पर रखा गया है। किसी लेखक के नाम पर रेस्तरां का नाम रखना अपने आप में मुंबई शहर में काफी रोचक है।
ये पता चलने पर कि इस रेस्तरां का पूरा डिजाइन और विचार हिंदी सिनेमा की अव्वल नंबर प्रोडक्शन डिजाइनर अपर्णा सूद का है, ‘अमर उजाला’ ने उनसे इस बारे में बात की। फिल्म ‘नीरजा’ से लेकर वेब सीरीज ‘जुबली’ तक के हर फ्रेम में कलाकारों के अलावा जो कुछ दिखता है, वह सब अपर्णा का सोचा हुआ है। रामगोपाल वर्मा की तमाम फिल्मों में उनके कंधे से कंधा मिलाकर काम करती रहीं अपर्णा इस बारे में पूछे जाने पर पहले तो हिचकिचाती हैं, फिर बहुत जोर देने पर इस बारे में बात करने को तैयार हुईं। वह बताती हैं, “हां, इस रेस्तरां के विचार को मूर्त रूप मैंने और मेरे पति फिल्म निर्माता राकेश सिंह ने ही दिया है, लेकिन इसे इस रूप में लाने में पूरी एक टीम ने हमारा साथ दिया है। रेस्तरां के खाने के मेन्यू से लेकर यहां परोसे जाने वाले कॉकटेल तक सब विश्वस्तरीय हैं लेकिन फिर भी ये उन सारे लोगों की पहुंच में हैं जो अपना सप्ताहांत किसी रेस्तरां में बिताते हैं। हमारे यहां हमने ऐसे पलों को संजोने के लिए इसे थोड़ा वैचारिक रूप दिया है।”
Aparna Sud: ‘जुबली’ की प्रोडक्शन डिजाइनर अपर्णा की संघर्ष यात्रा, बोलीं, नई दुनिया रचने का आनंद ही कुछ और है
जानकारी के मुताबिक फिल्म निर्माता राकेश सिंह की पहुंच हिंदी सिनेमा से लेकर हॉलीवुड तक रही है। फिल्म ‘लॉयन’ और एमसीयू की चर्चित फिल्म ‘डॉक्टर स्ट्रेंज’ की निर्माण टीम का वह अहम हिस्सा रहे हैं। दुनिया के मशहूर शेफ ग्रेसियां डिसूजा और शेफ हर्ष पारिख का साथ मिलने के बाद अपर्णा और राकेश को अपना सपना सच होता लगा। इसमें मिक्सोलॉजिस्ट पवन सिंह रावत ने भी अपना खास स्वाद का सुरूर बिखेरा है। अपर्णा बताती हैं, “हमने इस रेस्तरां को एक कम्युनिटी हब के तौर पर विकसित किया है। ये एक नया विचार है और इस तरह का शायद ये देश का पहला रेस्तरां हैं। अथर्व घाटुलकर और नागनाथ मंकेश्वर जैसे हुनरमंदों के साथ ने हमारा हौसला बढ़ाया। हिंदी सिनेमा की चर्चित कॉस्ट्यूम डिजाइनर प्रियांजली लाहिड़ी ने यहां के पूरे स्टाफ की यूनिफॉर्म डिजाइन की। हम चाहते हैं कि यहां आने वाले हर शख्स को यहां के माहौल में अपनापन मिले, थोड़ा सा हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम युग की झलक मिले और मिले एक ऐसा माहौल जहां आते ही लोगों के दिमाग की वैचारिक खिड़कियां अपने आप खुल जाएं।”