एक्टर आर माधवन इसरो के पूर्व वैज्ञानिक एस. नंबी नारायणन पर बन रही फिल्म 'रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट' में काम कर रहे हैं। इस फिल्म में वह इसरो के एक साइंटिस्टएस. नंबी नारायणन की भूमिका में नजर आएंगे। हाल ही में माधवन ने अपने इंस्टा पर तस्वीरें शेयर की हैं जिसे देखकर लोग असली नंबी नारायणन और आर माधवन के बीच फर्क करना भूल गए हैं।
14 घंटे लगातार मेकअप के बाद माधवन को मिला ISRO के इस वैज्ञानिक का लुक, बेहद रोचक है फिल्म की कहानी
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आर माधवन ने अपने किरदार के लिए जिस मेकअप को करवाया है उससे उनका लुक बिल्कुल रियल नारायणन जैसा लग रहा है। इस लुक को पाने के लिए आर माधवन को लगातार 14 घंटों तक चेयर पर बैठे रहना पड़ा। इस फिल्म के साथ वो बॉलीवुड में अपना डायरेक्शन डेब्यू भी करने जा रहे हैं।
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आर माधवन की यह फिल्म हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, तेलगु और मलयालम में बन रही है। हाल ही में फिल्म का टीजर रिलीज किया गया। टीजर में आंकड़ों के जरिए ये बताया गया था कि कैसे मंगल मिशन को पूरा करने में अमेरिका की स्पेस संगठन नासा को 19 बार प्रयास करना पड़ा। रूस ने यह मिशन 16 प्रयासों के बाद पूरा किया जबकि भारत ने इन दोनों देशों से आधी कीमत में पहली बार में ही यह मिशन पूरा कर लिया था।
एस. नंबी नारायणन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में क्रायोजेनिक्स डिपार्टमेंट में इंचार्ज थे। नंबी 1970 के समय से लिक्विड फ्यूल वाले इंजनों के क्षेत्र में काम कर रहे थे जो आगे चलकर भारत को बहुत फायदा पहुंचाते। लेकिन 1994 में नंबी को जासूसी के झूठे आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। नंबी और उनके साथियों पर पाकिस्तान को इसरो रॉकेट इंजन की सीक्रेट जानकारी और अन्य जानकारी दूसरे देशों को देने के आरोप थे। इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों ने नारायणन से पूछताछ शुरू की। हालांकि नारायणन ने आरोपों का खंडन किया और इसे गलत बताया।

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