अभिनेता, निर्देशक आर माधवन की चर्चा उनकी फिल्म 'रॉकेट्री द नंबी इफेक्ट' के लिए खूब हो रही है। इस फिल्म की सफलता से उत्साहित आर माधवन कहते हैं, 'इस फिल्म से लोगों का जो प्यार और सम्मान मिला है। वह 1000 करोड़ की कमाई से भी ज्यादा है। शुरूआत में इस फिल्म की रफ्तार थोड़ी कम थी, लेकिन वर्ड ऑफ माउथ से इस फिल्म को धीरे धीरे बहुत फायदा मिला है।' एक अनोखे एप सिनेडब्स के साथ माधवन ने शुक्रवार को मुंबई में अपनी फिल्म ‘रॉकेट्री’ की कामयाबी का जश्म मनाया और इस मौक पर इच्छा जताई कि वह फिल्म ‘शोले’ को तमिल में सिनेमाघरों में देखना चाहते हैं।
CineDubs: माधवन ने बताई ‘रॉकेट्री’ बनाने की ये असल वजह, अब बड़े परदे पर ‘शोले’ तमिल में देखने की जताई इच्छा
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सिनेडब्स एक तरह का नया तकनीकी प्रयोग है जिसे सिनेमाघर की टाइमिंग से मैच करके दर्शक किसी भी फिल्म की भाषा को सिनेमाघरों में अपने ईयरफोन की मदद से अपनी पसंदीदा भाषा में बदल सकता है। सिनेडब्स की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम में पहुंचे आर माधवन कहते है, 'नंबी नारायणन न तो मेरे पिता है, ना ही मेरे कोई रिश्तेदार हैं। मुझे उनसे कुछ भी लेना देना नहीं। लेकिन जब उनसे मिला और उनकी कहानी सुनी तो सारी बातें मेरे जेहन में ऐसी चिपक गईं कि निकल ही नहीं रही थी। उनसे मिलने के बाद महीने भर उनके बार सोचता रहा, नींद में भी उनसे बाते करता रहता। उनके साथ जो खतरनाक सिचुएशन थी, मैं सोच रहा था कि अगर मेरे साथ ऐसा हुआ होता तो क्या होता? मुझे लगा कि ये कहानी दुनिया के सामने आनी चाहिए।’
जल्द ही फिल्म ‘रॉकेट्री’ ओटीटी पर भी रिलीज हो रही है, जो दर्शक सिनेमा हाल में फिल्म नहीं देख पाए हैं वे ओटीटी पर इसे देख पाएंगे। कभी कभी भाषाई समस्या को लेकर भी बहुत सारे दर्शक सिनेमा से जुड़ नहीं पाते है, लेकिन अब एक ऐसा एप सिनेडब्स आ गया है कि इस एप के जरिए आप किसी भी भाषा की फिल्म को अपनी भाषा में देख सकते हैं। इस एप के ब्रांड एंबेसडर आर माधवन को बनाया गया है। इस ऐप की शुरुआत उनकी फिल्म 'रॉकेट्री द नंबी इफेक्ट' से हो रही है।
इस एप के ब्रांड एंबेसडर बने आर माधवन कहते हैं, ‘मैं किसी भी ब्रांड का एंबेसडर बनने से पहले उस ब्रांड के बारे में पूरी रिसर्च करने के बाद ही हामी भरता हूं, जब चीज टेक्नोलॉजी से जुड़ी हो तो मेरी जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ जाती है।’ उन्होंने कहा, “ऐसा संभव था कि विभिन्न शहरों में रह रहे अलग-अलग भाषा बोलने वाले लोग फिल्म देखने से वंचित रह जाते। लेकिन अब सिनेडब्स के माध्यम से देश के किसी भी हिस्से के लोग अपनी पसंद की भाषा में फिल्म देख सकेंगे। आमतौर पर दूसरे भाषा की फिल्में जब सब टाइटल के साथ रिलीज होती है तो दर्शकों का ध्यान सब टाइटल पढ़ने पर होता है और वो कलाकार के परफॉर्मेंस पर ध्यान नहीं दे पाते हैं।'
आर माधवन कहते है, ' हिंदी में ऐसी बहुत सारी फिल्मे बनी है जो हम दक्षिण की भाषा में नहीं देख पाए है। मेरी बहुत बड़ी इच्छा है कि 'शोले' को मैं तमिल में देखूं। और मैं चाहता हूं कि लोग तमिल फिल्म 'नायकम' को हिंदी में देखें। ये फिल्मे ऐसी हैं कि जितनी बार भी आप देखो बोर नहीं होंगे। इस समय लोगों का टेस्ट एकदम बदल गया है। कोई यह नहीं बता पा रहा है कि कौन सी फिल्म चलेगी और कौन सी फिल्म नहीं चलेगी। आप कितना भी जोर लगा लो जो चीज पब्लिक को पसंद आएगी वही चलेगी। इस हिसाब से अभी लोगों को बदलना पड़ेगा, अब किसी फिल्म की खतरनाक ओपनिंग लगेगी ऐसी बात रही नहीं।’