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लाहौर में जन्मे राजकपूर की फिल्म में दिखा था पहला न्यूड सीन, हीरो से भी खाया थप्पड़
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम
Updated Thu, 13 Dec 2018 01:46 PM IST
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raj kapoor
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राजकपूर एक ऐसा नाम जिन्होंने हिंदी सिनेमा को एक अलग पहचान ही, इनका अभिनय इस कदर लोगों के दिल में अपना घर बना लेता था कि लोग उनकी भावनाओं से जुड़ जाते थे। 1965 में संगम 1970 में मेरा नाम जोकर और 1983 में प्रेम रोग के लिए उन्हें बेस्ट डायरेक्टर के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड दिया गया। डालते हैं हिंदी सिनेमा के लेजेंड की जिंदगी के कुछ अनसुने पहलुओं पर नजर
राज कपूर
राजकपूर का जन्म 14 दिसंबर 1924 को पेशावर में हुआ था, उनका पूरा नाम रणवीर राजकपूर था। राज कपूर ने 10 के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। राज एक बेहद ही रसूखदार खानदान से थे लेकिन उन्होंने अपनी करियर को लेकर बेहद मेहनत की। इस कबिलियत के लिए उन्हें एक थप्पड़ भी खाना पड़ा था। राज कपूर ने इंडस्ट्री में करियर की शुरुआत एक क्लैपर बॉय के तौर पर की थी।
Raj Kapoor
यह फ़िल्म ..किदार शर्मा डायरेक्ट कर रहे थे। शूटिंग चल ही रही थी हुआ यह था कि राज सीन के वक्त हीरो के इतने करीब आ गए थे कि क्लैप देते ही हीरो की दाढ़ी क्लैप में फंस गई थी, जिसके लिए उन्हें एक थप्पड़ खाना पड़ा था। साल 1935 में उन्होंने फिल्म इकबाल में बतौर बाल कलाकार काम किया। इसके बाद उन्होंने मधुबाला के साथ फिल्म नीलकमल में लीड रोल हासिल किया।बता दें राज कपूर ने ही बॉलीवुड की फिल्मों में न्यूड सीन्स देने की शुरुआत की थी।मेरा नाम जोकर और बॉबी जैसी बेहतरीन फिल्मों में उन्होंने ऐसे सीन्स फिल्माए थे।
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राज कपूर नर्गिस
बता दें राज कपूर को बचपन से ही सफेद साड़ी बेहद पसंद थी। कहा जाता है कि जब वह छोटे थे तब उन्होंने सफेद साड़ी में एक महिला को देखा था, जिस पर उनका दिल आ गया था। राज कपूर ने 24 साल की उम्र में अपना प्रोडक्शन स्टूजियों आर के फिल्म्स शुरू किया। उनके प्रोडक्शन की पहली फिल्म आग थी। इस फिल्म में उन्होंने डायरेक्टर और एक्टर दोनों की भूमिका निभाई।
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Raj Kapoor
1971 में पद्मभूषण, साल 1987 में उन्हें सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार जबकि 1960 की फिल्म अनाड़ी और 1962 कि फिल्म जिस देश में गंगा बहती है के लिए बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर पुरस्कार भी राज कपूर ने जीता। बॉलीवुड में राजकपूर अपना मेकअप रूम किसी और को इस्तेमाल नहीं करने देते थे। वहां सिर्फ देवान्द को ही आने की इजाजत थी।