बॉलीवुड में अपनी बेहतरीन अदाकारी से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले राजेन्द्र कुमार ने करीब चार दशक तक फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया। यहां तक कि राजेन्द्र कुमार को 60 के दशक का सबसे बेहतरीन एक्टर माना जाता था। राजेंद्र कुमार के करियर में एक ऐसा भी समय आया था जब उनकी छह से सात फिल्में एक ही समय पर सिनेमाघरों में लगी रहती थीं। राजेन्द्र कुमार का जन्म पाकिस्तान के सियाल कोट में हुआ था। उस दौर में बॉलीवु़ड हर बड़ी हीरोइन उनके साथ काम करना चाहती थी। राजेन्द्र कुमार शादीशुदा तब भी बॉलीवुड हसीनाएं उनपर फिदा हो जाती थी।
राजेन्द्र कुमार पुण्यतिथि: पर्दे पर गीता बाली संग रोमांस नहीं करना चाहते थे 'जुबली कुमार', वजह बेहद दिलचस्प
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दरअसल, हिंदी सिनेमा में गीता बाली एक शानदार एक्ट्रेस मानी जाती हैं। अपने करियर में उन्होंने एक से बढ़कर एक फ़िल्में दी हैं, और असल जिंदगी में उन्होंने शम्मी कपूर से शादी की थी। फिल्म ‘वचन’ करने से पहले उन्होंने कई फिल्में की हुई थीं। हालांकि इस फिल्म में उनके अभिनय को लोगों ने ख़ूब पसंद किया था। यही नहीं इस फ़िल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस के लिए नॉमिनेट भी किया गया था।
इस फिल्म में वह राजेंद्र कुमार की बड़ी बहन बनी थीं। इस फिल्म में राजेंद्र कुमार ने अपने किरदार को इतने दिल से निभाया था, कि वह मन ही मन गीता को अपनी बहन मानने लगे थे। वहीं 'वचन' के बाद गीता बाली एक्ट्रेस के साथ-साथ निर्माता भी बन गई थीं। ऐसे में वह अपनी एक फ़िल्म के लिए राजेंद्र कुमार को अपने अपोज़िट लेना चाहती थीं, लेकिन एक्टर ने उनके ऑफ़र को ठुकरा दिया। राजेंद्र कुमार ने बताया कि वह उन्हें दिल से बहन मानते हैं, ऐसे में वह उनके साथ पर्दे पर रोमांस नहीं कर सकते।
साल 1963 से 1966 के दौरान सभी फिल्में सुपरहिट हुई। कहा जाता है कि उस वक्त हर सिनेमाघर में राजेन्द्र कुमार की ही फिल्म लगी थी और सभी फिल्मों ने सिल्वर जुबली मनायी। जिस वजह से लोग राजेन्द्र कुमार को 'जुबली कुमार' कहकर बुलाने लगे। कहा जाता है कि राजेश खन्ना के फिल्मों में आते ही राजेन्द्र कुमार का स्टारडम फीका पड़ने लगा। हालांकि उन्होंने अपने बेटे कुमार गौरव के लिए फिल्म का निर्देशन भी किया। इस फिल्म का नाम 'लव स्टोरी' था।
एक वक्त ऐसा आ गया था जब राजेन्द्र कुमार की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई थी। यहां तक कि उन्होंने अपना बंगला राजेश खन्ना तक को बेच दिया था। इस बंगले का नाम उस वक्त 'डिंपल' था। लोगों का कहना है कि जिस दिन राजेन्द्र कुमार ने बंगला छोड़ा था वह उस रात फूट-फूटकर रोए थे। राजेन्द्र कुमार का फिल्मों में बहुत योगदान रहा है जिस वजह से उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है। राजेन्द्र कुमार ने अपने करियर में 85 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। इन फिल्मों के नाम धूल का फूल, पतंग, धर्मपुत्र और हमराही हैं। 12 जुलाई 1999 को राजेंद्र कुमार ने अंतिम सांस ली।