राजेश खन्ना एक स्टार नहीं बल्कि सुपरस्टार थे। आज उनकी पुण्यतिथि है। साल 2012 में आज ही के दिन इस सुपरस्टार ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। आज राजेश खन्ना की पुण्यतिथि पर उनके फैंस उन्हें याद कर रहे हैं। राजेश खन्ना वो स्टार थे जिनकी दुनिया दीवानी थी। लड़कियां उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब रहती थीं। राजेश खन्ना का सुपरस्टारडम भले ही ज्यादा लंबा नहीं चला लेकिन जिस कदर उस छोटे से दौर में लोगों ने उन्हें चाहा, उन्हें लेकर जो दीवानगी थी, वैसी शायद हिंदी फिल्मों के किसी अभिनेता को नसीब नहीं हुई। ऐसे में राजेश खन्ना को अगर भारतीय सिनेमा का पहला सुपरस्टार कहा जाए तो इसमें कोई दो राय नहीं होगी। आइए एक नजर डालते हैं उनके स्टारडम पर...
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राजेश खन्ना
- फोटो : Twitter
राजेश खन्ना पर लिखी गई किताब 'द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ इंडियाज फर्स्ट सुपरस्टार' में यासिर उस्मान कहते हैं- "बंगाल की एक बुजुर्ग महिला थीं। उनसे मैंने पूछा कि राजेश खन्ना क्या थे आपके लिए? उन्होंने कहा कि आप नहीं समझेंगे। जब हम उनकी फिल्म देखने जाते थे तो हमारी और उनकी बाकायदा डेट हुआ करती थी।"
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राजेश खन्ना
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राजेश खन्ना की फिल्में ही काफी नहीं थी उनका स्टाइल, उनका कॉलर वाली शर्ट पहनने का तरीका या फिर पलकों को हल्के से झुकाकर गर्दन टेढ़ी कर देखना...ये सब उन्हें सभी स्टार्स से अलग बनाता था। आलम ये था कि जब उनकी सफेद गाड़ी कहीं खड़ी होती थी तो लड़कियों के लिपस्टिक के रंग से उनकी गाड़ी गुलाबी हो जाती थी। कहा जाता है कि कई लड़कियां उनकी फैन थीं और खून से लेटर लिखकर वो अपने प्यार का इजहार करती थीं। इतना ही नहीं उसी खून से लड़कियां राजेश खन्ना के नाम का सिंदूर तक लगाती थीं।
राजेश खन्ना जैसा स्टारडम पाने वाला स्टार न कभी हुआ है न ही शायद कभी होगा। राजेश खन्ना के बारे में मशहूर था कि वो अहंकारी थे और सेट पर हमेशा लेट आते थे। राजेश खन्ना ने कभी किसी भी चीज के लिए अपना लाइफ-स्टाइल नहीं बदला। वो सेट पर तभी आते थे जब उनका मन करता था बावजूद इसके प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर उन्हें अपनी फिल्म में कास्ट करने के लिए लाइन लगाते थे।
राजेश खन्ना ने अपने बॉलीवुड करियर में 180 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था। उन्होंने 1966 में आई फिल्म आखिरी खत से बॉलीवुड में कदम रखा था। बस इसी के बाद से उनका सुपरस्टार बनने का सफर शुरू हो गया। लेकिन कहते हैं न दुनिया का हर अच्छा सिलसिला हमेशा के लिए वैसा नहीं रहता। राजेश खन्ना के साथ भी ऐसा ही हुआ। कहा ये गया कि वो कामयाबी को ढंग से हैंडल नहीं कर पाए और गुमनामी में खो गए।