राजू श्रेष्ठ ऐसे अभिनेता हैं, जिन्होंने चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर 70 और 80 के दौर में उस समय के हिंदी सिनेमा के सभी दिग्गज सितारों के साथ काम किया है। 15 अगस्त 1966 को मुंबई में जन्मे राजू श्रेष्ठ आज अपना 57 वां जन्मदिन मना रहे हैं। राजू का जन्मदिन बेहद खास मौके पर पड़ता है, क्योंकि वह अपने जन्मदिन के साथ-साथ इस दिन आजादी का महोत्सव भी बहुत धूमधाम से मनाते हैं। अपने जन्मदिन पर राजू श्रेष्ठ ने अमर उजाला से खास बातचीत की।
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आपका जन्म स्वतंत्रता दिवस यानी कि 15 अगस्त के दिन हुआ, यह दिन तो आपके लिए डबल सेलिब्रेशन जैसा होता होगा?
इस दिन मेरे जन्मदिन की खुशी तो रहती ही है, लेकिन स्वतंत्रता दिवस की खुशी इतनी बड़ी होती है कि मेरी जन्मदिन की खुशी बहुत छोटी हो जाती है। मेरे जन्मदिन पर तो स्कूल में छुट्टी होती थी, तो 16 अगस्त को स्कूल में मिठाई बांटकर दोस्तो के साथ जन्मदिन मनाता था। 15 अगस्त की शाम को दोस्तों के साथ जन्मदिन का सेलिब्रेशन होता है। लेकिन दिन में कहीं न कहीं स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण के समय भी मौजूद रहता हूं।
शुरुआत आपकी चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर हुई, किस फिल्म से आपने शुरुआत की? जब आप पहले दिन शूटिंग पर गए होंगे तो फिल्मों और शूटिंग को लेकर आपके मन में क्या विचार आ रहे थे?
मैंने एक्टिंग की शुरुआत तकरीबन तीन-चार साल की उम्र में ही कर दी थी। उस वक्त तो वह मेरे लिए एक पिकनिक जैसा माहौल होता था। मेजर रोल में मेरी पहली फिल्म गुलजार साहब की 'परिचय' थी। यह जितेंद्र जी के होम प्रोडक्शन की फिल्म थी। इसमें मेरे साथ और भी बच्चे थे। 'परिचय' से पहले भी हमने जो एक दो फिल्में की हैं, उसमें छोटे-छोटे रोल थे। उसमें भी मेरा काम दूसरे बच्चों के साथ था। शूटिंग पर मेरे लिए हमेशा बच्चों के साथ खेलने और मस्ती करने जैसा ही माहौल था। मुझे पता ही नहीं चलता था कि शूटिंग हो रही है। 'परिचय' की शूटिंग के दौरान गुलजार साहब ने ऐसा माहौल बनाकर रखा था कि हमें पता ही नहीं चलता था कि शूटिंग कर रहे हैं। शूटिंग करते-करते मुझे समझ में आया कि यह मेरा प्रोफेशन है और लोग मुझे पहचान रहे हैं।
परिचय में आपने जया भादुड़ी (बच्चन) के छोटे भाई की भूमिका निभाई थी। भाई-बहन के बीच कैसी केमिस्ट्री रही?
इस फिल्म में तो मेरे साथ और भी बच्चे थे, लेकिन हरकतों से सबसे छोटे बच्चे जीतू जी (जितेंद्र) थे। उनका खुद का होम प्रोडक्शन था, तो हमारे साथ वह खेलते रहते थे। माहौल ऐसा सहज बनाकर रखते थे, ताकि हम लोग बोर न हो। गुलजार साहब के बारे में क्या कहें, उनको पता है कि एक्टर से काम कैसे निकालते हैं ? जया जी के साथ काम करने का अनुभव बहुत ही अच्छा रहा। उस जमाने की तकरीबन सभी हीरोइन के साथ काम किया है। इस लिस्ट में मौसमी चटर्जी, नीतू सिंह, जीनत अमान, परवीन बॉबी, योगिता बाली, हेमा मालिनी, टीना मुनीम आदि के नाम शामिल हैं। फिर बड़े होने के बाद मैंने माधुरी दीक्षित के साथ काम किया है।
आपने शक्ति सामंत के निर्देशन में बनी फिल्म 'अमर प्रेम' में काम किया था, इस फिल्म से जुड़ी कुछ यादें शेयर करना चाहेंगे?
'अमर प्रेम', 'अन्नदाता', 'बावर्ची', जैसी मेरी कुछ ऐसी फिल्में हैं, जो 'परिचय' से एकाध साल पहले शूट की थीं। 'अमर प्रेम' का सेट नटराज स्टूडियो में लगा था। इस फिल्म में मैंने बिंदु जी के बेटे का किरदार निभाया था। उस वक्त ऐसा था कि जो मुझसे डायलॉग बोलने के लिए बोला जाता था बोल देता था। लेकिन गुलजार साहब और बासु चटर्जी के निर्देशन में काम करने का बड़ा अच्छा अनुभव रहा है। ये ऐसे निर्देशक रहे हैं कि बुरे एक्टर से भी अच्छा प्रदर्शन करा लेते हैं। मैं यह नहीं कहता कि शक्ति सामंत अच्छे निर्देशक नहीं थे, लेकिन उनका ऐसा ही था कि यहां बैठ जाओ और ऐसे डायलॉग बोलो। मैं आपको ऋषि दा ( ऋषिकेश मुखर्जी) की फिल्म 'बावर्ची' का एक किस्सा शेयर करता हूं।