इसी हफ्ते 11 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई अक्षय कुमार की फिल्म 'रक्षा बंधन' पिछले काफी दिनों से सुर्खियों में चल रही है। रिलीज से पहले ही अक्षय की इस बहुप्रतीक्षित फिल्म को सोशल मीडिया पर बायकॉट करने की मांग उठ रही थी। इसका असर साफ फिल्म की बॉक्स ऑफिस कमाई पर देखने को मिल रहा है। रक्षा बंधन के त्योहार पर रिलीज हुई भाई-बहन के प्यार को दर्शाने वाली इस फिल्म को समीक्षकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिलने के बाद भी बॉक्स ऑफिस पर एक धीमी शुरुआत मिली। सिनेमाघरों में मिलते ठंडे रिस्पॉन्स के साथ-साथ फिल्म की सोशल मीडिया पर खूब आलोचना भी हो रही है। ऐसे में फिल्म के निर्देशक आनंद एल राय ने फिल्म को लेकर एक साक्षात्कार में खुलकर बात की है, जिसमें उन्होंने समाज और लोगों को लेकर एक बड़ी बात कही है।
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आनंद एल राय, अक्षय कुमार
- फोटो : social media
इंडस्ट्री के मशहूर निर्देशक आनंद एल राय हमेशा से ही अलग मुद्दों पर फिल्म बनाने के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में उनके निर्देशन में बनी फिल्म 'रक्षा बंधन' को भी सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। अक्षय की अदाकारी से सजी इस फिल्म की कहानी चार बहनों और उनके भाई के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में भारत में दहेज प्रथा की भयावहता को दिखाया गया है, जिसके बाद दर्शक इसकी आलोचना कर रहे हैं कि फिल्म में महिलाओं को ऐसे दर्शाया गया कि उनकी जिंदगी के लिए शादी ही सबकुछ है। अब इस पर एक मीडिया संस्थान को दिए इंटरव्यू में आनंद एल राय ने अपनी फिल्म का बचाव किया है।
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अक्षय कुमार-आनंद एल राय
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
आनंद एल राय ने फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा, 'आप इस मुद्दे को अनदेखा नहीं कर सकते। मुझे पता है, हमें बहुत प्रगतिशील होना चाहिए। हम बहुत से मामलों में हैं भी, लेकिन इसके बावजूद कई चीजें हैं हमें जिनका ध्यान रखने की जरूरत है। आप अपनी आंखें बंद नहीं कर सकते। इसके बारे में बात न करने से आपको कोई समाधान नहीं मिलेगा। एक निर्माता के रूप में मैं आर्टिकल्स नहीं लिख सकता, मैं डॉक्यूमेंट्री नहीं बना सकता। खुद को व्यक्त करने के लिए मेरा एकमात्र तरीका फिल्में ही हैं। अगर आपको ऐसा महसूस हो रहा है कि इसमें पिछड़ी सोच दिखती है तो इसका मतलब है कि समाज को ठीक करने का समय आ गया है।'
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रक्षा बंधन
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
आनंद एल राय ने फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा, 'आप इस मुद्दे को अनदेखा नहीं कर सकते। मुझे पता है, हमें बहुत प्रगतिशील होना चाहिए। हम बहुत से मामलों में हैं भी, लेकिन इसके बावजूद कई चीजें हैं हमें जिनका ध्यान रखने की जरूरत है। आप अपनी आंखें बंद नहीं कर सकते। इसके बारे में बात न करने से आपको कोई समाधान नहीं मिलेगा। एक निर्माता के रूप में मैं आर्टिकल्स नहीं लिख सकता, मैं डॉक्यूमेंट्री नहीं बना सकता। खुद को व्यक्त करने के लिए मेरा एकमात्र तरीका फिल्में ही हैं। अगर आपको ऐसा महसूस हो रहा है कि इसमें पिछड़ी सोच दिखती है तो इसका मतलब है कि समाज को ठीक करने का समय आ गया है।'