अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की रिपोर्ट में उदीयमान अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के निधन की वजह आत्महत्या बताए जाने के बाद अभिनेता रणवीर शौरी परेशान हैं। वह समझ नहीं पा रहे कि वह अब सुशांत के निधन के लिए किसे जिम्मेदार ठहराएं तो उन्होंने ताजा शिगूफा एक ऐसे गैंग के बारे में छोड़ा है जो उनके मुताबिक पूरी हिंदी फिल्म ‘इंडस्ट्री’ को संचालित कर रहा है।
सुशांत केस: समझिए कि रणवीर शौरी को गुस्सा क्यों आता है? अब भी लगे हैं ‘माफिया गैंग’ के पीछे
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हिंदी फिल्मों में होने वाली गुटबाजी को लेकर रणवीर का मानना है कि यहां कोई पांच से छह लोग ऐसे हैं, जिन्होंने आपस में एक गुट बना रखा है और पूरी इंडस्ट्री पर राज करते रहे हैं। हालांकि रणवीर कहते ये भी कि अभी तक देश में सिनेमा को इंडस्ट्री का दर्जा नहीं मिलने से भी यहां गुटबाजी करने के मौके लोगों को मिलते हैं। वह मानते हैं कि यह भी एक कारण है कि यहां पर कोई नियम नहीं चलता। सब अपनी मनमानी करते हैं। बाहर से आए हुए कलाकारों के लिए यहां पर अपना करियर बनाने के इसलिए बहुत ही कम मौके होते हैं।
अभिनेता रणवीर शौरी ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में होने वाली गुटबाजी और वंशवाद पर एक अलग ही परिभाषा पेश की है। रणवीर मानते हैं कि कोई पिता अगर अपने बेटे को अपनी संपत्ति सौंपता है तो उसमें किसी बाहरी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। लेकिन अपनी बात में वह जोड़ते हैं कि बाहरियों को तकलीफ इसलिए नहीं होती क्योंकि एक पिता अपने बेटे या भतीजे को वह संपत्ति सौंप रहा है। बल्कि, बाहरियों को दिक्कत इस बात से होती है कि बेटे या भतीजे को संपत्ति के साथ प्रसिद्धि भी मिल जाती है।
अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या मामले के बाद रणवीर शौरी, कंगना रणौत, शेखर कपूर और शेखर सुमन लगातार मुखर रहे हैं। इनमें से शेखर कपूर अब पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट के मुखिया बन चुके हैं। शेखर सुमन के बारे में सुनने में आ रहा है कि वह बिहार चुनाव में प्रचार के लिए उतर सकते हैं। कंगना रणौत की मां बीजेपी में पहले ही शामिल हो चुकी हैं और माना जा रहा है कि अगले लोकसभा चुनाव में कंगना भी बीजेपी से चुनाव लड़ सकती हैं। बस, रणवीर शौरी इस पूरी गहमागहमी में अकेले छूट गए हैं।
रणवीर बताते हैं कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बड़े कलाकार अपने बच्चों को संपत्ति के साथ प्रतिष्ठा और प्रसिद्धि भी थमा देते हैं। फिर उस बच्चे की छवि भी ऐसी बन जाती है जैसी उसके पिता की थी। दिक्कत यहीं पर है। रणवीर कहते हैं कि पुरस्कार समारोहों में भी बाहरी लोगों को दरकिनार किया जाता है। उन्हें तो अपने काम के लिए नामित भी नहीं किया जाता। जब कोई बाहरी कलाकार किसी मल्टीस्टारर फिल्म में काम करें तो भी उस फिल्म में प्रसिद्ध लोगों का नाम तो लिखा जाएगा लेकिन उन कलाकारों के नाम नहीं लिखे जाते जो अपनी मेहनत से बड़े हो रहे हैं।
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