जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्याल (जेएनयू) में हुई हिंसा पर बॉलीवुड स्टार्स खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। बीते दिनों दीपिका पादुकोण, वरुण धवन, कंगना रनौत, अनुपम खेर और अजय देवगन जैसे बड़े स्टार्स ने इस विवाद पर अपने विचार रखे थे। अब 90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री रवीना टंडन ने भी इस पर अपनी राय रखते हुए सुझाव दिया है।
जेएनयू हिंसा पर आया रवीना टंडन का बयान, छात्रों से पूछा ये सवाल
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पहले किसने मारा?
A). पहले उसने मारा! B). नहीं पहले उसने मारा
अरे बच्चा लोग, दंगे से नहीं, शिक्षा से देश आगे बढ़ता है। तो आप एक-दूसरे को मारने की जगह पढ़ाई कब करोगे? #taxpayer'
Pehle kisne maara? A) Pehle usne maara! B) Nahi pehle usne maara . Arey bachalog, Dange se nahi , shiksha se desh aage badhta hai. So when do you’ll study besides whacking each other? #taxpayer
— Raveena Tandon (@TandonRaveena) January 11, 2020
इससे पहले अनुपम खेर ने जेएनयू विवाद पर 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' को जमकर लताड़ लगाई थी। उन्होंने एक वीडियो शेयर करते हुए कहा था, 'पिछले कुछ सालों में कुछ खास किस्म के लोगों ने सरकार गिराने की पूरी कोशिश की है। इन्हीं लोगों ने असहिष्णुता, भीड़ हिंसा जैसे कैम्पेन चलाकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाया है। जब इन मुद्दों पर ये कुछ नहीं कर पाए तो ये गिने चुने लोग छात्रों की आड़ में उनका इस्तेमाल करके हमारे देश को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। ये वही लोग हैं जिन्हें देश की सेना से परेशानी है, राष्ट्रगान के लिए खड़े होना चाहिए या नहीं इस पर भाषण देते हैं। ये आतंकवादियों को फांसी से बचाने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा आधी रात खटखटाते हैं। छात्र आंदोलनों में ये फ्री कश्मीर का पोस्टर लहराते हैं। यही चंद लोग देश को बदनाम कर रहे हैं हम और आप इन्हें ऐसा नहीं करने देंगे। ये खुद को बचाने हमें कई नामों से बुलाते हैं। हां हम भक्त हैं, हम अपने देश के भक्त हैं। हम इनके मंसूबे पूरे नहीं होने देंगे, मैं जानता हूं। वंदे मातरम, जय हिन्द।'
अजय देवगन ने जेएनयू मुद्दे पर ट्वीट करते हुए लिखा था, 'मैंने हमेशा कोशिश की कि हमें उचित तथ्यों का इंतजार करना चाहिए। मैं सभी से अपील करता हूं कि हम शांति और भाइचारे की भावना को आगे बढ़ाएं। इसमें किसी भी तरह से लापरवाही नहीं करनी चाहिए।'
वहीं कंगना रनौत ने इस हिंसा को लेकर कहा था, जेएनयू में छात्रों पर हुई हिंसा की वर्तमान में जांच चल रही है। यह समझा जाता है कि विश्वविद्यालय में दो पक्ष हैं। कॉलेज समय में गैंगवॉर (दो गुटों के बीच लड़ाई) होना आम बात है। मैं छात्रावास में रहती थी, लड़कों का होस्टल भी बगल में था। वहां लोगों का दिन दहाड़े पीछा किया गया और उनकी हत्या कर दी गई. एक लड़का एक बार हमारे छात्रावास में कूद गया था और भीड़ द्वारा मारे जाने वाला था, लेकिन हमारे छात्रावास प्रबंधक ने उसे बचा लिया। पुलिस को चाहिए कि वह अपराधियों को हिरासत में ले और प्रत्येक को चार थप्पड़ लगाए। इस प्रकार के लोग हर जगह मिलते हैं, हर गली और कॉलेज में। इसे राष्ट्रीय मुद्दा नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि वे इस लायक ही नहीं हैं।'
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