{"_id":"5c9e1a78bdec221401277f8c","slug":"remembering-anand-bakshi-death-anniversary-unknown-facts","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"सेना की नौकरी छोड़ बॉलीवुड में आए थे आनंद बख्शी, बंदूक की जगह थामी कलम","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
सेना की नौकरी छोड़ बॉलीवुड में आए थे आनंद बख्शी, बंदूक की जगह थामी कलम
अपने सदाबहार गीतों से लोगों को दीवाना बनाने वाले बॉलीवुड के मशहूर गीतकार आनंद बख्शी ने लगभग चार दशकों तकन सभी के दिलों पर राज किया। फिल्म गीतकार आनंद बक्शी का 72 वर्ष की उम्र में साल 2002 में निधन हो गया था। आज आनंद बख्शी साहब की डेथ एनिवर्सिरी है। आइए आपको बताते हैं उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें...
2 of 5
आनंद बख्शी
आनंद बख्शी के पिता रावलपिंडी में बैंक मैनेजर थे। किशोरावस्था में आनंद टेलीफोन ऑपरेटर बनकर सेना में शामिल हो गए लेकिन बम्बई और सिनेमा दुनिया में आने की ख्वाहिश ने उन्हें इससे बांधे रखा। बंटवारा हुआ तो बक्शी परिवार शरणार्थी बनकर हिन्दुस्तान आ गए। जब मायानगरी में कुछ ना हुआ तो आनंद बख्शी ने फिर से सेना ज्वाइन कर ली और कुछ समय तक वहीं काम करते रहे।
3 of 5
आनंद बख्शी
तीन वर्ष सेना में नौकरी करने के बाद उन्होंने तय किया कि उनकी जिंदगी का मकसद बंदूक चलाना नहीं गीत लिखना है। अपने फिल्मी करियर में बख्शी ने 4000 से ज्यादा गीत लिखे। उन्हें पहली बार गीत लिखने का मौका 1957 में मिला लेकिन सफलता उनसे दामन चुराती रही। 1963 में अभिनेता और निर्देशक राज कपूर ने उन्हें अपनी फिल्म 'मेंहदीं लगे मेरे हाथ' के लिए गीत लिखने का अवसर दिया। उसके बाद सफलता ने कभी आनंद बक्शी का साथ नहीं छोड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 5
आनंद बख्शी
- फोटो : SELF
आनंद बक्शी के करियर का शुरुआती माइलस्टोन बनी ‘आराधना’, ‘अमर प्रेम’ और ‘कटी पतंग’ जैसी फिल्में, जिनके कांधे चढ़कर राजेश खन्ना भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार बने। आनंद बक्शी ने फिल्मकारों की कई पीढ़ियों के साथ काम किया। उनकी सबसे बड़ी खूबी ये थी कि समय के साथ उनके गीतों का लहजा बदलता रहा।
विज्ञापन
5 of 5
आनंद बख्शी
वर्ष 1965 में 'जब जब फूल खिले' प्रदर्शित हुयी तो उन्हे उनके गाने 'परदेसियों से न अंखियां मिलाना' 'ये समां.. समां है ये प्यार का' ,' एक था गुल और एक थी बुलबुल' सुपरहिट रहे और गीतकार के रूप में उनकी पहचान बन गई। आनंद बख्शी वो नाम है जिसके बिना म्यूजिकल फिल्मों को शायद वो सफलता नहीं मिलती जिनको बनाने वाले गर्व करते हैं। इनका नाम उन गीतकारों में शुमार हैं, जिन्होंने साल दर साल एक से बढ़कर एक गीत फिल्म इंडस्ट्री को दिए हैं।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।