सिनेमा के महारथी कहे जाने वाले इरफान खान का आज जन्मदिन है। साल 2020 में कैंसर से अभिनेता का निधन हो गया था। निधन के बाद इरफान का ये पहला जन्मदिन है। उनके बेटे बाबिल ने तस्वीर साझा कर अपने पिता को याद किया है। 1966 में जयपुर में जन्मे इरफान खान का बचपन एक छोटे से कस्बे टोंक में गुजरा। 32 साल के करियर में इरफान ने कुछ ऐसी फिल्में की हैं जो मील का पत्थर साबित हुईं। खास बात है कि इरफान को 'पान सिंह तोमर' फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।आज हम आपको इरफान खान की पांच उन बेहतरीन फिल्मों के बारे में बताएंगे जिसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।
Irrfan Khan: रोमांटिक रोल से लेकर बीहड़ का डाकू बनने तक, ये हैं सिनेमा के महारथी कहे जाने वाले इरफान खान की पांच बेहतरीन फिल्में
विशाल भारद्वाज के निर्देशन में बनी इस फिल्म में इरफान ने मकबूल का मुख्य किरदार निभाया है। फिल्म की कहानी में मकबूल एक अंडरवर्ल्ड डॉन अब्बा जी (पंकज कपूर) का भरोसेमंद आदमी है। वह अब्बा जी के यहां काम करने वाली एक नौकरानी निम्मी (तब्बू) से चुपचाप प्यार करता है। वह मकबूल को अब्बा जी खिलाफ भड़काती है और मकबूल अब्बा जी का कत्ल कर देता है। इरफान के किरदार में अकस्मात बदलाव फिल्म की गति के हिसाब से अद्वितीय लगता है।
भारतीय राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाला पान सिंह तोमर चम्बल का मशहूर डाकू कैसे बन जाता है? यह फिल्म उस डाकू की आदि से अंत तक की पूरी सच्चाई को बयां करती है। तिग्मांशु धूलिया ने पान सिंह तोमर के किरदार में पर्दे पर इरफान को पेश किया। मध्य प्रदेश की भाषा और बोली को फिल्म में जब इरफान बोलते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे इरफान उसी परिवेश में पले बढ़े हैं। 2012 में आई इस फ़िल्म के लिए इरफ़ान ख़ान को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था।
लंच बॉक्स (2013)
लंच बॉक्स यानी दोपहर के खाने का डब्बा। एक डब्बे की अदला बदली से प्यार पनपने की कहानी सुनने में अजीब लगेगी, लेकिन विस्तार से देखने पर आप भी भावनाओं में बह जाएंगे। इरफान की फिल्में कमाई कम करती हैं, तारीफें ज्यादा पाती हैं। इरफ़ान ने साजन फ़र्नेंडिस को जिस नज़ाकत से निभाया वो एक्टिंग की मास्टरक्लास ही समझी जा सकती हैं। ये फिल्म कान फिल्म फेस्टिवल तक गई।
मदारी (2016)
निशिकांत कामत के निर्देशन में बनी इस फिल्म के मदारी कोई और नहीं बल्कि खुद इरफान खान हैं। वह भारतीय सेना और सीबीआई को अपने डमरू की धुन पर ऐसा नचाते हैं कि उनका छोटा सा संदेश पूरे भारत में खुद ब खुद फैल जाता है। एक पुल के ढह जाने पर निर्मल कुमार (इरफान खान) के बेटे अपू की जान चली जाती है। अपने बेटे की मौत पर निर्मल अपना आप खो देता है। सिस्टम को सबक सिखाने के लिए वह गृहमंत्री के बेटे का अपहरण करता है।