नया चलन तो यही कि सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्में, इसके बाद ओटीटी पर रिलीज होती हैं और फिर सैटेलाइट टीवी चैनलों पर प्रसारित होती हैं। सिनेमाघरों तक न पहुंच पाने वाली फिल्में भी पहले ओटीटी और फिर टीवी चैनलों पर आती हैं। लेकिन, फिल्म 'सब मोह माया है' डायरेक्ट टू टीवी का चलन फिर से लौटाने वाली फिल्म बन चुकी है। ये फिल्म सिनेमाघरों में तो नहीं ही रिलीज हो रही और ओटीटी से पहले जी अनमोल सिनेमा पर 18 नवंबर को रिलीज होने जा रही है।
Sab Moh Maaya Hai: सरकारी नौकरी के लिए बेटे ने बनाया पिता की मौत का प्लान, इस दिन सीधे टीवी पर दिखेगी फिल्म
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फिल्म 'सब मोह माया है' की कहानी परिवार, रिश्तों और सपनों, महत्वाकांक्षा, जिम्मेदारी और लोगों द्वारा अपने प्रियजनों के लिए किए जाने वाले बलिदान की कहानी है। उज्जैन के रहने वाले रामनरेश मिश्रा अपनी सेवानिवृत्ति के करीब हैं और जिला कलेक्ट्रेट में एक साधारण चपरासी के रूप में काम करते हैं। उनका बेटा पीयूष पढ़ा लिखा है, लेकिन उसको कहीं नौकरी नहीं मिलती है। वह अपने पिता की ही कमाई पर आश्रित है। नौकरी को लेकर पिता और पुत्र के बीच लगातार झगडे होते रहते हैं। रामनरेश मिश्रा अपने बेटे पीयूष की सरकारी नौकरी पाने में असमर्थता के लिए गरीबी को जिम्मेदार मानते हैं, जबकि पीयूष आरक्षण को जिम्मेदार मानता है। बेहतर भविष्य की इच्छा से प्रेरित होकर पीयूष अपने पिता को एक चौंकाने वाला विचार प्रस्तावित करता है। वह अपने पिता को सुझाव देता है कि सेवानिवृत्ति से पहले निधन हो जाना चाहिए जिससे उसे अनुकंपा योजना के माध्यम से सरकारी नौकरी मिल सके।
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फिल्म में रामनरेश मिश्रा की भूमिका निभा रहे अभिनेता अन्नू कपूर कहते हैं, 'यह फिल्म मानवीय रिश्तों के सार, महत्वाकांक्षा और परिवार के बीच के सही संतुलन को छूती है। इस फिल्म में मेरा रामनरेश मिश्रा का ऐसा किरदार है, जो जीवन के रोजमर्रा के संघर्षों के बीच जूझ रहा है। जैसे हर पिता का सपना होता है कि उसके बच्चे जीवन में सफल और खुश रहे, वैसे ही रामनरेश मिश्रा भी एक ही सपना है कि बेटा सफल और खुश रहे। जब बेटा कहता है कि जीते जी कुछ नहीं किए तो मरकर ही परिवार का भला कर दो। यह बात सुनकर थोड़ी देर के लिए उसे बुरा जरूर लगता है,लेकिन जब इस बारे में वह गहराई से सोचता है, तो मरने के लिए तैयार हो जाता है। इससे बड़ा त्याग अपने परिवार के लिए एक पिता का क्या हो सकता है।'
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फिल्म में पीयूष मिश्रा की भूमिका निभा रहे शरमन जोशी कहते हैं, 'यह फिल्म एक पिता और पुत्र के बीच के निर्विवाद प्रेम के बारे में है। मेरी अपनी यात्रा उतार-चढ़ाव से भरी रही है, और इस फिल्म ने मुझे व्यक्तिगत स्तर पर काफी प्रभावित किया है। इसने मुझे अपने सपनों को पूरा करने के लिए किए गए बलिदानों और उनके साथ आने वाली जिम्मेदारियों के बारे में सोचने पर मजबूर कर किया। यह फिल्म पारिवारिक बंधनों की मजबूती का प्रमाण है कि कैसे वे हमारे जीवन को आकार देते हैं। इस फिल्म में अन्नू कपूर जैसे दिग्गज अभिनेता के साथ काम करना मेरे लिए एक अद्भुत अनुभव था।'
फिल्म ''सब मोह माया है' में अनुकंपा नियुक्ति जैसे गंभीर विषय को निर्देशक अभिनव पारीक ने एक कटाक्ष के रूप में पेश किया है। एक पिता अपने बच्चों की परवरिश किसी भी हाल में कर लेता है। अपनी छोटी-छोटी खुशियों को नजरअंदाज करके एक -एक पाई जोड़कर अपने बच्चे को इस काबिल बनाता है, ताकि उसके बच्चे भविष्य में अपने पैर पर खड़े होकर उसके बुढ़ापे का सहारा बने। लेकिन जब रिटायरमेंट की अवस्था आती है, तो वहीं बच्चे कहते हैं कि जीते जी तो कुछ किए ही नहीं, अब मरकर ही हमारा भला कर दो, ताकि हम अपने परिवार की देखभाल कर सकें।