हिंदी सिनेमा में भारतीय संस्कृति का गौरव गान करने की नई कोशिश है यशराज फिल्म्स की नई फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’। शुक्रवार को अपेक्षा से कम ओपनिंग मिलने के बाद फिल्म ने शनिवार और रविवार को अपने कलेक्शन में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी की है। फिल्म के लेखक, निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी को भारतीय लोक परंपराओं और इतिहास के नायकों पर शोध करने की पुरानी आदत भी रही है और यह ही उनका स्वाध्याय भी रहा है। अपनी इस फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ के अलावा आमिर खान के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रहे ‘महाभारत’ से लेकर अजय देवगन के साथ प्रस्तावित फिल्म ‘चाणक्य’ तक से जुड़े सवालों पर उनसे ये खास बातचीत की ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने।
Samrat Prithviraj: सोने की चिड़िया वाले भारत की कहानियां कहना बहुत जरूरी, बोले ‘सम्राट पृथ्वीराज’ के निर्देशक
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फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ को सिनेमाघरों तक पहुंचाने की यात्रा आसान नहीं रही आपके लिए, इतना जीवट बनाए रखने की हिम्मत कहां से मिली आपको?
पृथ्वीराज चौहान पर फिल्म बनाना मेरा सपना रहा है। बीते दो दशक से ये विषय मेरे साथ सांसें पाता रहा। इसे मैंने काफी लंबे समय तक विकसित किया है। एक शक्तिशाली और महान राजा पर फिल्म बनाने से पहले का शोध ही बहुत व्यापक रहा। सारे तथ्य इकट्ठा करने के बाद मैंने इसे लिखा और सिर्फ इसके तथ्य फिर से जांचने में मैंने महीनों लगाए हैं। अब मैं संतुष्ट हूं कि एक फिल्मकार के तौर पर मैंने एक ऐसी फिल्म बनाई है जो उनकी वीरता व उदार जीवनशैली को सच्ची श्रद्धांजलि है। इसे बड़े परदे तक लाने का हौसला बनाए रखने का पूरा श्रेय इसके निर्माता आदित्य चोपड़ा को जाता है, जिन्होंने इसे सिर्फ और सिर्फ सिनेमाघरों में ही रिलीज करने का फैसला किया और इस पर अंत तक कायम रहे।
और, इतनी रिसर्च को सिर्फ एक फिल्म में समेट पाना भी काफी मुश्किल रहा होगा?
मैंने इस विषय पर साल 2004 में काम करना शुरू किया। चार साल पहले आदित्य चोपड़ा ने मुझे किसी और काम से बुलाया था। फिर उन्हें पृथ्वीराज चौहान पर मेरे काम की सूचना कहीं से मिली तो उन्होंने इस फिल्म को यशराज फिल्म्स के लिए बनाने का मुझे न्योता दिया। अक्षय कुमार का नाम जब मैंने पृथ्वीराज के चरित्र के लिए प्रस्तावित किया तो उन्होंने मुझसे और विकल्प भी पूछे लेकिन मेरे मस्तिष्क में किसी दूसरे अभिनेता की छवि कभी रही ही नहीं इस चरित्र को लेकर। हां, ये कहना आपका सही है कि इतना सारा शोध सिर्फ एक फिल्म में समेट पाना मुश्किल है। मैंने आदित्य चोपड़ा को बाकी बची सामग्री को लेकर पृथ्वीराज चौहान पर एक वेब सीरीज बनाने का सुझाव दिया है।
और, अक्षय कुमार से इस फिल्म को लेकर आपके जो रिश्ते बने, वे अगली फिल्म ‘राम सेतु’ तक होते हुए कितना आगे पहुंच चुके हैं?
अक्षय कुमार की वजह से ही फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ बन सकी। इतने समर्पित कलाकार का साथ मिलना मैं किसी सौभाग्य से कम नहीं समझता हूं। वह एक बार फिल्म के विषय को लेकर सारी शंकाओं का समाधान कर लेते हैं और उसके बाद खुद को निर्देशक के अनुसार ढालने में कोई कसर नहीं छोड़ते। उनकी अगली फिल्म ‘राम सेतु’ से भी मैं जुड़ा हूं। अक्षय कुमार को कहानियों की बेहतरीन समझ है और मुझे लगता है कि ‘सम्राट पृथ्वीराज’ और ‘राम सेतु’ से भारतीय सिनेमा में एक नए सिनेमा का उदय हो रहा है।
अपनी बात थोड़ा विस्तार से समझाएं?
सिनेमा को एक शक्ति के रूप में अमेरिका, चीन और जापान जैसे देशों में देखा गया है। ये एक ऐसा माध्यम है जो दर्शक की मनोस्थिति को न सिर्फ बदलता है बल्कि उसकी विचारों को भी प्रभावित करता है। भारतीय सिनेमा में भी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और हमारी संस्कृति की अनसुनी कहानियों का समावेश जरूरी है। मैं मानता हूं कि ये एक श्रमसाध्य कार्य है लेकिन इसे करना जरूरी है। मेरी अगली कुछ कहानियां भी उस भारत की कहानियां कहने की कोशिश करेंगी जिसे सोने की चिड़िया कहा जाता था।