अपनी कम बैक फिल्म ‘भूमि’ के साथी कलाकारों अदिति राव हैदरी और शेखर सुमन के साथ संजय दत्त बुधवार को अमर उजाला के चांदपुर इंडस्ट्रियल इस्टेट स्थित कार्यालय में ‘अमर उजाला संवाद’ में मौजूद थे। ‘संजू बाबा’ ने इस दौरान अपने माता-पिता को याद किया। 36 साल पहले होम प्रोडक्शन ‘रॉकी’ के लिए 50 हजार रुपए फीस मिलने की जानकारी देते हुए ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ को अपने फिल्मी सफर की यादगार और पसंदीदा फिल्म बताया। करीब आधा घंटा चले सवाल-जवाब के सिलसिले के संपादित अंश यहां प्रस्तुत हैं।
पहली फिल्म के लिए संजय दत्त को मिली थी इतनी फीस, जानें संजू बाबा से जुड़ी कुछ खास बातें
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150-200 करोड़ की कमाई जैसे आंकड़ों पर मैं कभी नहीं जाता। अगर फिल्म लोगों को पसंद आ जाए तो मेरे लिए संतोष की बात होती है। मैंने हमेशा इसी सोच को लेकर फिल्में की हैं। जब भी मुझे कोई कहानी मिलती है तो मैं इसे दर्शकों से कनेक्ट जरूर करता हूं। ‘अग्निपथ’ भी अचानक मिल गई थी और रोल पसंद आने के कारण ही की थी।
आप सुपर स्टार रह चुके हैं। बॉलीवुड में सुपर स्टार्स में नंबर की होड़ रहती है। अब खुद को इनमें से कहां देखते हैं?
पहली बात ‘मैं संजय दत्त हूं’, कोई नंबर नहीं। दूसरे, मैंने शुरुआत से अब तक अपने को इस दौड़ से बाहर रखा है। मैं इस पर विश्वास नहीं करता। मैं सिर्फ एक्टर हूं। कहानी सुनता हूं, जो अच्छी लगती है, उसे पूरे मन से करता हूं। बाकी दर्शकों के ऊपर है कि वह मेरे बारे में क्या सोचते हैं। भाई, मैं जो हूं, जैसा हूं, वैसा ही अच्छा हूं पर सुपरस्टार नहीं।
लोग आपकी रफ-टफ स्टाइल और फिटनेस के दीवाने हैं। फिल्मों में अपना भविष्य तलाश रहे न्यू कमर्स के लिए फिटनेस कितनी जरूरी है?
यह उनके ऊपर डिपेंड करता है कि वह क्या चाहते हैं। हालांकि न्यू कमर्स के लिए फिटनेस जरूरी है लेकिन सबसे जरूरी है अभिनय। अगर बॉडी-सॉडी बना भी लिया और एक्टिंग नहीं आती है तो फिर क्या मतलब। फिटनेस होनी चाहिए पर एक्टिंग तो जरूरी है।
पिता सुनील दत्त की ऐसी कौन सी फिल्म है, जिसके रीमेक में आप खुद लीड रोल करना चाहेंगे?
अब लीड रोल की उम्र नहीं रही (मुस्कुराते हुए)। मगर, मौका मिला तो दत्त साहब की ‘मुझे जीने दो’ में जरूर काम करना चाहूंगा। यह गजब फिल्म है। (इसी दौरान शेखर सुमन ने कहा कि मैं भी बस इसी फिल्म का नाम लेने जा रहा था। ऐसी फिल्में बड़ी ही मुश्किल से बनती है।)
सुनील दत्त के बाद आपने वैरायटी एक्टर के रूप में वॉलीबुड में लंबा सफर तय किया है। ढेर सारे किरदार बेहतरीन ढंग से निभाए। क्या कोई ऐसा किरदार बाकी है, जिसके लिए मन में ललक हो?
(सोच कर ठहाका लगाते हुए) ये बताना इतना आसान नहीं। मुझे इसका जवाब देने के लिए एक हफ्ते तक सोचना पड़ेगा।
अपनी अगली फिल्म ‘मलंग’ के बारे में बताना चाहेंगे?
मैं बनारस दोबारा आना चाहता हूं। ‘मलंग’ एक सस्पेंस थ्रिलर मूवी है। यह पूरी तरह से बनारस पर आधारित है। इस फिल्म की शूटिंग दिसंबर से फरवरी तक वाराणसी के विभिन्न लोकेशन पर प्रस्तावित है। यह एक अनोखी लव स्टोरी है और इसमें बनारस का एक अलग ही रंग, खूबसूरती और संस्कृति रुपहले पर्दे पर देखने को मिलेगी।
आपका पूरा परिवार राजनीति से जुड़ा रहा है। पिता सुनील दत्त के बाद उस विरासत को बहन प्रिया दत्त ने संभाला। फिर राजनीति में आना चाहेंगे?
राजनीति में कदम रखकर भाग चुका हूं। देख भी चुका हूं। यह क्षेत्र मुझे कतई रास नहीं आया है। आगे भी राजनीति नहीं करनी है। मैं एक अच्छा एक्टर ही रहना चाहता हूं। अब और कुछ भी नहीं बनना चाहता।
नई पीढ़ी के किन स्टार्स में आप ज्यादा संभावनाएं देखते हैं?
रणबीर कपूर, रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और आलिया भट्ट सर्वाधिक संभावनाशील हैं। इनके अभिनय से जाहिर है कि ये सभी आने वाले दिनों में वैरायटी देते हुए दर्शकों का मनोरंजन करते रहेंगे।