अपनी पहली फिल्म ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ से लेकर अपनी पिछली फिल्म ‘पद्मावत’ तक निर्माता, निर्देशक संजय लीला भंसाली ने भारतीय कहानियों को ही अपने सिनेमा का केंद्र बिंदु रखा है। वह भारतीय सिनेमा के मौजूदा शो मैन तो हैं ही, वह अपनी इन कहानियों के जरिये दुनिया को भारतीय सभ्यता, संस्कृति और विरासत से भी लगातार परिचित करा रहे हैं। उनकी एक फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ जल्द रिलीज होने वाली है और उनकी पहली वेब सीरीज ‘हीरा मंडी’ की चर्चा अब पूरी दुनिया में हो रही है। इस सीरीज का एलान नेटफ्लिक्स ने अपने ग्लोबल इवेंट ‘टुडुम’ में किया और भंसाली ने अब ये खुलासा किया है कि ‘हीरा मंडी’ की कहानी उनके पास पिछले 14 साल से मौजूद रही है।
Heera Mandi: पिता को याद कर भंसाली बोले, ‘उन्होंने कहा- यहां बैठो हिलना मत और तब से मैं वहीं बैठा हूं’
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संजय लीला भंसाली के सिनेमा में दिखने वाली भव्यता दरअसल उनके साथ बचपन की यादों के साथ चली आई है। वह कहते हैं, 'मुझे अब भी याद है, बचपन में किसी थिएटर में जाना और उन प्रोजेक्टर को देखना जो परदे पर रोशनी की बौछार किया करते थे। यह बौछार मेरे दिमाग पर भी पड़ती थी और मेरा हमेशा फिल्म से ध्यान उचट जाता था। मेरा दिमाग किरणों की शक्ल में उड़ती उन नन्हीं परियों की तरफ चला जाता था और मुझसे कहता था- ठीक है, एक दिन मेरी कहानी भी इसी तरह लहराएगी।'
संजय लीला भंसाली को सबसे ज्यादा खुशी इस एहसास में मिलती है कि वह अपने बचपन का सपना पूरा कर सके। दुनिया भर में अपनी फिल्मों से भारतीय सिनेमा का स्तर ऊंचा करने वाले निर्देशक संजय लीला भंसाली कहते हैं, “ये तमाम चीजें जो मैंने बनाई हैं, मुझे लगता है कि मैं नौ फिल्में बना चुका हूं और 10वीं बनाने जा रहा हूं और इसमें 25 साल बीत गए। मुझे यही करते अभी 25 साल और बिताने हैं।”
नेटफ्लिक्स ने हाल ही में ‘हीरामंडी’ को अपनी वैश्विक कार्यक्रम सूची का स्पॉटलाइट शो घोषित किया है। इसके बारे में संजय लीला भंसाली दिलचस्प खुलासा करते हुए बताते हैं, "ये कहानी मेरे दोस्त मोइन बेग 14 साल पहले लेकर मेरे पास आए थे। जब हमने इसे नेटफ्लिक्स के सामने पेश किया तो उनकी बांछे खिल गईं! उन्हें लगा कि इसको एक मेगासीरीज में तब्दील करने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यह बहुत बड़ी है, विराट है। यह आजादी से पहले की तवायफों की कहानी है। वे अपने हुनर से संगीत, शायरी और नृत्य को जिंदा रखती थीं और कोठों के भीतर चलने वाली राजनीति के बीच जीने की कला के दम पर विजेता बन कर उभरती थीं।"