दादा साहेब फाल्के के बाद इंडियन सिनेमा में सबसे बड़ा नाम सत्यजीत रे का है। सत्यजीत रे की गिनती उन सितारों में होती है जिन्होंने विदेश में भी भारतीय सिनेमा का परचम बुलंद किया। ने सत्यजीत रे ने भारतीय फिल्म जगत को दुनिया भर में पहचान दिलाई। सत्यजीत रे को दुनिया को अलविदा कहे 28 बरस हो गए हैं, लेकिन उनकी फिल्में, उनका निर्देशन आज भी याद किया जाता है। आज सत्यजीत रे की पुण्यतिथि के मौक पर हम आपको बताते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें।
सत्यजीत रे ने जीते थे ऑस्कर सहित 32 राष्ट्रीय पुरस्कार, भारत रत्न सम्मानित निर्देशक की इस फिल्म पर हुआ था बवाल
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ऑस्कर पुरस्कार
सिनेमा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए ही उन्हें ऑस्कर सम्मान दिया गया था। तीस मार्च 1992 को भारतीय फिल्मकार सत्यजीत रे को 'ऑनररी लाइफ टाइम अचीवमेंट' पुरस्कार से नवाजा गया था। वहीं ऐसा भी कहा जाता है कि सत्यजीत रे के बीमार होने की वजह से खुद ऑस्कर के पदाधिकारी कोलकाता में उन्हें अवॉर्ड देने आए थे।
भारत रत्न
भारत रत्न, भारत का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। यह किसी भी क्षेत्र में सर्वोच्च सेवा या प्रदर्शन के लिए दिया जाता है। इस सम्मान के तहत एक सम्मन पत्र और मेडल दिया जाता है। इसके तहत किसी भी तरह की नगद राशि नहीं दी जाती। बता दें कि 1992 में सत्यजीत रे को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
32 राष्ट्रीय पुरस्कार
सत्यजीत रे का सिनेमा को अहम योगदान रहा था। इस बात का अंदाजा आप खुद इस बात से लगा सकते हैं कि भारत सरकार द्वारा सत्यजीत रे को 32 राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। याद दिला दें कि पाथेर पांचाली, अपराजितो, अपूरसंसार और चारूलता जैसी यादगार फिल्में बनाने वाले सत्यजीत रे ने अपने जीवन में कुल 37 फिल्में बनाई थीं।
पाथेर पांचाली की आलोचना
पाथेर पांचाली सत्यजीत रे की अपू ट्राईलॉजी की पहली फिल्म थी। ये भारतीय सिनेमा की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। इस फिल्म को विदेश में तो खूब पसंद किया गया लेकिन देश में इसकी आलोचना हुई। दरअसल रे ने भारत की असल तस्वीर दिखाई थी, जिसे विदेशों में तो खूब सराहा गया लेकिन भारत में नहीं। भारत में फिल्म की आलोचना इसलिए हुई क्योंकि इसमें भारत की गरीबी का महिमामंडन था। खास तौर से पश्चिम बंगाल के हालात को खुल कर पेश किया था। बता दें कि पाथेर पांचाली को भारतीय फिल्म जगत का बेहतरीन क्लासिक कहा जाता है।